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Chaibasa News : पैगंबर मोहम्मद के संसार में आमद का महीना है रबीउल अव्वल

Updated at : 26 Aug 2025 12:02 AM (IST)
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Chaibasa News : पैगंबर मोहम्मद के संसार में आमद का महीना है रबीउल अव्वल

रबीउल अव्वल इस्लामी साल का तीसरा महीना है.

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चक्रधरपुर.

रबीउल अव्वल इस्लामी साल का तीसरा महीना है. यह महीना मुसलमानों के लिए महान, फजीलत वाला और सम्मान का हकदार है. इसका कारण यह है कि इसी महीने में हमारे प्यारे नबी हजरत मुहम्मद (स.) की पैदाइश, हिजरत और विसाल (इंतकाल) जैसे महत्वपूर्ण वाकिए पेश आए.

रबीउल अव्वल की महानता

नबी (स.) की पैदाइश :

12 रबीउल अव्वल को ज्यादातर रिवायतों के मुताबिक नबी (स.) इस दुनिया में तशरीफ लाये. आपकी आमद से दुनिया के अंधेरे दूर हुए और इंसानियत को हिदायत का उजाला मिला. सुराही आल-इमरान में आया है कि अल्लाह ने मोमिनों पर बड़ा एहसान किया कि उनके बीच उन्हीं में से एक रसूल भेजा.

हिजरत-ए-मदीना

रबीउल अव्वल में ही नबी (स.) मक्का से मदीना हिजरत फरमा कर पहुंचे. यह वाकिया इस्लाम की तारीख में एक अहम मोड़ था क्योंकि इसी हिजरत से इस्लामी समाज की बुनियाद रखी गयी.

आदर और अहकाम

रबीउल अव्वल में खुशी मनाना जायज है, लेकिन शरीअत की हद से बाहर निकलना, बिदअत या ग़लत रस्मों से बचना जरूरी है. नबी (स.) की पैदाइश पर अल्लाह का शुक्र अदा करें, नफ़्ल नमाजें पढ़ें, क़ुरआन की तिलावत करें, दरूद-ओ-सलाम भेजें. इस महीने का असल मक़सद यही है कि हम अपनी ज़िंदगी को नबी (स.) की तालीमात के मुताबिक बनायें. रबीउल अव्वल में दरूद-ए-पाक की कसरत करें. नबी (स.) पर दरूद पढ़ना हर वक्त अफज़ल है. मगर इस महीने में खास एहतिमाम करें. नबी (स.) की ज़िंदगी और तालीमात को जानना और दूसरों तक पहुंचाएं. गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें.

मुसलमानों की बेहतरी और एकता के लिए दुआ करें. रबीउल अव्वल एक बरकत का महीना है, क्योंकि यह नबी (स.) की पैदाइश का महीना है. लेकिन इस महीने में किसी खास इबादत को शरीअत ने लाज़मी नहीं किया. असल मक़सद नबी (स.) से मोहब्बत, उनकी सुन्नत पर अमल और इस्लाम की शिक्षा को आम करना है.

विशाल-ए-मुबारक

इसी महीने में, 12 रबीउल अव्वल को नबी (स.) का इंतकाल भी हुआ. यह उम्मत के लिए ग़मगीन लम्हा था, मगर यह भी अल्लाह की तरफ़ से तय किया हुआ हुक्म था. रबीउल अव्वल की फजीलत असल में नबी (स.) की वजह से है. कुरआन और हदीस में इस महीने को किसी खास इबादत के लिए मुकर्रर नहीं किया गया, लेकिन नबी (स.) की सीरत का ज़िक्र करना, उनकी तालीमात पर अमल करना, दरूद-ओ-सलाम पढ़ना, सदका और खैरात करना, अल्लाह का ज़िक्र करना यह सब इस महीने में बरकत का जरिया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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