चाईबासा.
जिला समाहरणालय में सोमवार को डीसी ने बाल संरक्षण योजना की समीक्षा बैठक की. उपायुक्त ने 117 जरूतमंद बच्चों को स्पॉन्सरशिप और बाल देखरेख संस्थान के 03 बच्चों को फॉस्टर केयर (पालन पोषण देखरेख कार्यक्रम) से बेहतर पालन-पोषण के लिए दो परिवार के चयन को अनुमोदित किया. इसका उद्देश्य गरीब व जोखिम तबके के बच्चों का सर्वांगीण विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करना है. उन्होंने कहा कि दोनों योजना के तहत लाभुकों को 4000 रुपये प्रति माह वित्तीय लाभ प्रदान किया जाता है.कठिन परिस्थिति में रहने वाले बच्चों को चिह्नित कर लाभ दें
उपायुक्त ने बाल संरक्षण कार्यालय के पदाधिकारी व कर्मियों को निर्देश दिया कि जिला अंतर्गत कठिन परिस्थिति में रहने वाले अधिकाधिक परिवारों के बच्चे को चिह्नित कर योजना का लाभ प्रदान किया जाये, ताकि ऐसे परिवार के बच्चे को बाल तस्करी, बाल श्रम व पलायन आदि के खतरों से बचाते हुए बचपन को सुरक्षित किया जा सके.
बैठक में उपायुक्त ने पालन-पोषण देखभाल योजना (फॉस्टर केयर) अंतर्गत जोखिम तबके के बच्चों के लिए परिवार आधारित पालन पोषण के लिए इच्छुक परिवारों की संख्या को बढ़ाने के लिए आवश्यक निर्देश दिये.स्पॉन्सरशिप योजना से पूर्व में 337 बच्चों को मिला लाभ
बताया गया कि मिशन वात्सल्य- बाल संरक्षण योजना के तहत स्पॉन्सरशिप कार्यक्रम अंतर्गत पूर्व में कुल 337 बच्चों को बेहतर पालन पोषण के लिए वित्तीय लाभ दिया गया है. फॉस्टर केयर से 14 बच्चों को परिवार आधारित पालन पोषण से जोड़ा गया है. उपायुक्त ने चिह्नित बच्चों का नियमित निगरानी का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि निगरानी का उद्देश्य बच्चों का बेहतर पालन पोषण सुनिश्चित करना है.ग्रामीणों तक पहुंच बनायें
उपायुक्त ने योजना से अधिक से अधिक बच्चों को लाभान्वित करने के लिए जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को सभी प्रखंडों में समन्वय स्थापित कर ग्रामीण क्षेत्र के परिवारों तक पहुंच बनाने को कहा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

