Chaibasa News : बाइसाही जंगल में हाथी की मौत, 10 दिनों में तीसरी घटना

Published by : ANUJ KUMAR Updated At : 25 Nov 2025 11:50 PM

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जगन्नाथपुर. मौत के कारणों का पता नहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

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जैंतगढ़/जगन्नाथपुर. जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के कूदाहातु गांव स्थित बाइसाही टोला से सटे जंगल में मंगलवार को मृत हाथी मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया. क्षेत्र में बीते 10 दिनों में तीन हाथियों की मौत से विभाग चिंतित है. चाईबासा डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि मंगलवार सुबह गश्ती के दौरान नर हाथी मृत अवस्था में मिला. प्राथमिक जांच में स्पष्ट है कि हाथी की मौत पिछले रात हुई होगी, क्योंकि शरीर ताजा था. पोस्टमार्टम के दौरान छोटी आंत में रक्तस्राव के कुछ निशान मिले हैं, लेकिन कोई बाहरी चोट नहीं है. जहर देने की आशंका नहीं है. दांत सुरक्षित मिलने से शिकार की संभावना भी नहीं लगती है. वन विभाग ने डॉक्टरों की टीम बुलाकर शव का घटनास्थल पर पोस्टमार्टम करवाया. मृत हाथी के बिसरा और जरूरी अंगों को संरक्षित कर रांची लेबोरेटरी जांच के लिए भेज दिया है.

ग्रामीणों के सहयोग से दफनाया गया

हाथी के शव से दुर्गंध आ रही थी. पोस्टमार्टम के बाद विभाग की टीम ने जेसीबी से गड्ढा खोदकर ग्रामीणों के सहयोग से हाथी के शव को घटनास्थल पर दफना दिया. नोवामुंडी के रेंजर ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारणों का पता चलेगा.

हाथियों की लगातार मौत से उठ रहे सवाल

विदित हो कि क्षेत्र के जुगीनंदा गांव में 10 दिन पूर्व दो हाथियों का शव बरामद हुआ था. 10 दिनों के तीन हाथियों की मौत से कई सवाल उठ रहे हैं. रेंजर जितेंद्र प्रसाद ने कहा विभाग हर एंगल से जांच में जुटी है. ग्रामीणों से पूछताछ जारी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के कारणों का पता लग पायेगा.

हाथियों की मौत रहस्य बने, रिपोर्ट का इंतजार : स्मिता पंकज

क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (कोल्हान) स्मिता पंकज ने बताया कि 10 दिनों में तीसरा मामला है. चाईबासा वन प्रभाग में हाथियों के शव बिना किसी बाहरी चोट और बिना स्पष्ट जहरीले संकेतों के मिले हैं. यह हमारे लिए रहस्य बन गया है. 15 नवंबर को दो मादा हाथियों की मौत के मामले में एफएसएल, रांची से बिसरा रिपोर्ट की प्रतीक्षा है. स्मिता पंकज ने बताया कि एफएसएल में कार्यभार अधिक होने से रिपोर्ट में देरी हो रही है. इस बार हम बिसरा नमूने रांची के एफएसएल और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) की पशु चिकित्सा इकाई दोनों जगह भेजने पर विचार कर रहे हैं.

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