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Bokaro News : कथारा एरिया. रीजनल अस्पताल बना तो डिस्पेंसरियां हुईं डेड

Updated at : 05 Dec 2025 12:32 AM (IST)
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Bokaro News : कथारा एरिया. रीजनल अस्पताल बना तो डिस्पेंसरियां हुईं डेड

Bokaro News : कथारा रीजनल अस्पताल में इलाज की नहीं है समुचित व्यवस्था, लोगों की बढ़ी परेशानी

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Bokaro News : राकेश वर्मा, बेरमो. सीसीएल कथारा एरिया में कथारा एरिया अंतर्गत कथारा कोलियरी, जारंगडीह परियोजना, स्वांग-गोविंदपुर परियोजना, कथारा वाशरी एवं स्वांग वाशरी, गोविंदपुर भूमिगत खदान है, जिनमें करीब चार हजार कोल कर्मी कार्यरत हैं. पिछले एक से डेढ़ दशक अंदर एरिया की तीन डिस्पेंसरी बंद कर दी गयी हैं, वहीं एक अस्पताल को डिस्पेंसरी बनाकर कथारा रीजनल अस्पताल के साथ मर्ज कर दिया गया है. अगर माइंस में दुर्घटना में कोई वर्कर गंभीर रूप से घायल हो जाता है तो नजदीक की डिस्पेंसरी के बंद हो जाने के कारण उसे कथारा रीजनल अस्पताल ले जाना पड़ता है. यहां से मरीज को तुरंत ढोरी केंद्रीय अस्पताल रेफर कर दिया जाता है तथा ढोरी केंद्रीय अस्पताल से मरीज को रांची या फिर बोकारो रेफर कर दिया जाता है.

चिकित्सक व स्टॉफ की कमी :

कथारा रीजनल अस्पताल में चिकित्सक व पारा मेडिकल स्टॉफ की काफी कमी है. जीवन रक्षक दवा का अभाव है. इस अस्पताल में भी किसी गंभीर मरीज के इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने से सीसीएलकर्मियों व आसपास के हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यहां के जनप्रतिनिधि व यूनियन नेता कभी भी इस गंभीर मसले पर मुखर नहीं दिखे.

10-12 साल पहले बंद हो गयी कथारा बांध कॉलोनी की डिस्पेंसरी :

कथारा बांध कॉलोनी की डिस्पेंसरी करीब 10-12 साल पहले बंद कर दी गयी. इस डिस्पेंसरी में दो चिकित्सक के अलावा दवा, ड्रेसिंग, इंजेक्शन, ब्लड टेस्ट सहित कई तरह की सुविधाएं थीं. कोल कर्मियों का सीक-फिट भी यहीं से बन जाया करता था. इस डिस्पेंसरी से बांध कॉलोनी, महली बांध के सात टोलाें, बांध बस्ती, कमल टोला, आइबीएम कॉलोनी, झिरकी बस्ती के करीब 10 हजार लोगों को इलाज में सुविधा मिलती थी. अब यहां के लोगों को कथारा रीजनल अस्पताल जाना पड़ता है. वहीं कथारा रेलवे कॉलोनी की डिस्पेंसरी से रेलवे कॉलोनी, कथारा बस्ती, असनापानी, कथारा चार नंबर कॉलोनी के करीब पांच हजार लोगों को चिकित्सीय सुविधा मिल जाती थी. यह डिस्पेंसरी भी एक दशक से बंद है.

आरआर शॉप डिस्पेंसरी को बना दिया गया आउटसोर्सिंग कंपनी का ऑफिस :

कथारा एरिया के जारंगडीह आरआर शॉप की सभी संसाधनों से लैस अपनी एक डिस्पेंसरी हुआ करती थी, जिसमें आर आर शॉप के सीसीएल वर्कर के अलावा 1, 2 व 3 नवंबर कॉलोनी, सावित्री कॉलोनी व गंगोत्री कॉलोनी के लोगों को इलाज की सुविधा मिलती थी. यहां नियमित रूप से दो-तीन चिकित्सक बैठा करते थे. पांच-छह पहले इस डिस्पेंसरी को बंद कर दिया गया. अब इस डिस्पेंसरी में एनइपीएल-पीएम डब्ल्यू आउटसोर्सिंग कंपनी का ऑफिस खुल गया है.

डिस्पेंसरी के रूप में चल रहा है जारंगडीह अस्पताल :

सीसीएल कथारा एरिया अंतर्गत जारंगडीह में एनसीडीसी के समय कोलकर्मियों के अलावा आसपास के ग्रामीणों की सुविधा के लिए जारंगडीह अस्पताल खोला गया था, लेकिन 19 मई को प्रबंधन ने कथारा एरिया अस्पताल में इसे मर्ज कर दिया और यह डिस्पेंसरी के रूप में चल रही है. यूनियन प्रतिनिधियों के विरोध के बाद प्रबंधन ने इस अस्पताल में रोजाना एक घंटे के लिए एक चिकित्सक को कथारा एरिया अस्पताल से यहां भेजना शुरू किया. जारंगडीह से सटे गांव असनापानी, खेतको, बरवाबेड़ा के ग्रामीण भी यहां इलाज कराने आते थे. पहले जारंगडीह अस्पताल था तो यहां एक ओटी रूम, एक ड्रेसिंग रूम, तीन-चार रेगुलर चिकित्सक, आधा दर्जन से ज्यादा नर्स, एक ड्रेसर, एक फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्निशियन, एक किचेन, एक भंडार, चार डॉक्टर चेंबर, एक सिस्टर केबिन के अलावा 10 बेड (5-5 महिला व पुरुष) की व्यवस्था थी. वर्तमान में नर्स, फार्मासिस्ट, ड्रेसर व लैब टेक्निशियन एक भी नहीं है. जारंगडीह अस्पताल के नये अंत: विभाग का उद्घाटन 90 के दशक में सीसीएल के तत्कालीन सीएमडी एमए उबैध ने किया था.

बीएंडके एरिया : चार डिस्पेंसरी गयी गयी बंद, दो चालू

सीसीएल बीएंडके एरिया के चार नंबर बोकारो कोलियरी, केएसपी फेज दो, कोनार-खासमहल एवंं रामनगर में चल रही डिस्पेंसरी को बंद कर दिया गया है. जबकि बोकारो कोलियरी व जवाहर नगर की डिस्पेंसरी चल रही है. जवाहरनगर में करगली रीजनल अस्पताल से सप्ताह में तीन दिन एक घंटे के लिए एक चिकित्सक बैठते हैं. वहीं बोकारो कोलियरी डिस्पेंसरी में डॉ शंकर प्रसाद एवं डॉ केपी शाही बैठते हैं. अब डॉ केपी शाही को करगली रीजनल अस्पताल का सीएमओ बना दिया गया है. इस एरिया में कोल इंडिया की मेगा प्रोजेक्ट एकेके व कारो परियोजना के अलावा बोकारो कोलियरी है.

ढोरी एरिया : तीन डिस्पेंसरी बंद, दो संचालित

ढोरी एरिया में एनएसडी, मकोली व तारमी में संचालित डिस्पेंसरी को बंद कर दिया गया है, जबकि सेंट्रल कॉलोनी एवं कल्याणी डिस्पेंशरी चल रही है. सेंट्रल कॉलोनी डिस्पेंसरी में ढोरी सेंट्रल अस्पताल से रोटेशन के आधार पर चिकित्सक को भेजा जाता है. जबकि कल्याणी डिस्पेंसरी में रेगुलर डॉ सतीश बैठते हैं. इस एरिया में दो परियोजना एएओडीसीएम व एसडीओसीएम के अलावा तारमी व ढोरी खास यूजी माइंस है.

सीसीएल कर्मी व आसपास के लोगों की बढ़ी परेशानी

कथारा वाशरी डिस्पेंसरी के चालू रहने से कॉलोनी एवं आसपास प्रभावित गांव के लोगों को उपचार की बेहतर सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन डिस्पेंसरी बंद हो जाने से कॉलोनी एवं आसपास प्रभावित गांव के लोगों को इलाज के लिए तीन-चार किलोमीटर दूर कथारा क्षेत्रीय अस्पताल एवं प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ता है.

-राम विलास रजवार, कर्मी, कथारा वाशरी व बांध कॉलोनी निवासीविशेष कर कथारा वाशरी में कार्यरत कर्मचारियों के इलाज के लिए बांध कॉलोनी में डिस्पेंसरी बनवायी गयी थी. इसमें कॉलोनी सहित आसपास बांध बस्ती, महलीबांध, झिरकी आदि गांव के लोगों का इलाज होता था, लेकिन पिछले एक दशक से बंद हो जाने पर उपचार के लिए इधर उधर-भटकना पड़ता है.

-रंजय कुमार सिंह, कर्मी, कथारा वाशरी व बांध कॉलोनी निवासी

पूरे कथारा एरिया में चिकित्सा व्यवस्था की हालत खस्ताहाल

पूरी एरिया में चिकित्सीय व्यवस्था की हालत खस्ताहाल है. बांध कॉलोनी, रेलवे कॉलोनी व आरआर शॉप डिस्पेंशरी बंद कर दिया गया तो जारंगडीह अस्पताल को डिस्पेंशरी बनाकर कथारा रीजनल अस्पताल के साथ मर्ज कर दिया गया. पूरे मामले से बेरमो विधायक कुमार जयमंगल सिंह को अवगत कराया गया है.

-विल्सन फ्रांसिस उर्फ बबलू, सचिव, आरसीएमयू, कथारा एरिया

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डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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