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Bokaro News : प्रदूषण रोकने के लिए लगी थी ग्रिन नेट फेसिंग, चिथड़े उड़े

Updated at : 02 Dec 2025 10:57 PM (IST)
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Bokaro News : प्रदूषण रोकने के लिए लगी थी ग्रिन नेट फेसिंग, चिथड़े उड़े

Bokaro News : प्रदूषण को रोकने के लिए लगायी गयी ग्रिन नेट फेसिंग के चिथड़े उड़ गये है.

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राकेश वर्मा, बेरमो, सीसीएल बीएंडके एरिया में तीन साल पहले कोयले की रोड ट्रांसपोर्टिंग से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए लगायी गयी ग्रिन नेट फेसिंग के चिथड़े उड़ गये है. इस योजना पर 70 लाख रुपये खर्च हुए थे. सीसीएल मुख्यालय ने यह योजना तैयार की थी. इसके तहत करगली से लेकर कारो परियोजना तक की सड़क के किनारे ग्रिन नेट फेसिंग लगायी गयी थी. इसके लिए लोहे का करीब 12 फीट का स्ट्रक्चर खड़ा किया गया. कारो परियोजना जाने वाली बाइपास सड़क से कारो कांटा नंबर चार व छह होते हुए कारो शिव मंदिर से पहले तक और करगली ओसीपी अंतर्गतत करगली एक्सकेवेशन व करगली रीजनल अस्पताल के पास भी सड़क किनारे कुछ दूरी तक ग्रिन नेट फेसिंग लगायी गयी थी. कारो परियोजना में किये गये इस कार्य पर 52 लाख रुपये तथा करगली ओसीपी में किये गये इस कार्य पर 18 लाख रुपये खर्च हुए थे. योजना को धरातल पर उतारने में संवेदक को करीब आठ माह का समय लगा था. वर्ष 2022 में इस योजना के कार्य का आवंटन हुआ और कार्य जून 20222 में पूरा हुआ. कुछ दिनों तक तो यह ठीक-ठाक रहा. बाद में ग्रिन नेट फेसिंग के चिथडे उड़ गये. आसपास के ग्रामीण व सीसीएल की आवासीय कॉलोनियों के लोग पहले की तरह प्रदूषण का भीषण कहर झेल रहे हैं. कारो के विस्थापित ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2022 में करगली ऑफिसर्स क्लब में सीसीएल प्रबंधन के साथ हुई बैठक में तत्कालीन शिक्षा मंत्री स्व जगरनाथ महतो ने उपस्थिति सीसीएल के उच्च प्रबंधन के समक्ष कहा था कि ग्रिन नेट फेसिंग योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला. इसकी जांच होनी चाहिए. यह सरासर कंपनी के पैसे का दुरुपयोग है.

क्या कहते हैं कारो के विस्थापित

अजय गंझू ने कहा कि यह कार्य सिर्फ ठेकेदारी के उद्देश्य से किया गया है. हमलोग आज भी अपने हाल में जीने को विवश हैं. जीबू विश्वकर्मा ने कहा कि जिस उद्देश्य से यह योजना बनायी गयी थी, उसका लाभ लोगों को नहीं मिला. प्रदूषण से बीमारियों का खतरा बना हुआ है. मेघलाल गंझू ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए ग्रिन नेट लगाना प्रबंधन की खानापूर्ति थी. गांव के लोग प्रदूषण से त्रस्त हैं. यह देखने वाला कोई नहीं है. सोनाली देवी ने कहा कि प्रदूषण से बचाने के लिए लगाया गया ग्रिन नेट सिर्फ दिखावा है. प्रबंधन का उद्देश्य सार्थक नहीं हुआ और लाभ ठेकेदार को मिल गया.

अधिकारी बोले

कारो ओसीपी के पीओ एसके सिन्हा ने कहा कि फिलहाल ग्रिन नेट फेसिंग जगह-जगह से जीर्ण-शीर्ण हो गयी है. इसे दुरुस्त करने के लिए नये सिरे से प्रपोजल बनाया जा रहा है. बीएंडके एरिया के एसओसी सतीश सिन्हा ने कहा कि एरिया से फिलहाल कोई प्रपोजल नहीं बना है. हो सकता है परियोजना स्तर पर प्रपोजल बना हो. उक्त योजना मेरे कार्यकाल की नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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JANAK SINGH CHOUDHARY

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