Bokaro News : आस्था का केंद्र है एसबी पहाड़ी काली मंदिर

Published by : JANAK SINGH CHOUDHARY Updated At : 19 Oct 2025 11:48 PM

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Bokaro News : एसबी पहाड़ी काली मंदिर गांधीनगर में काली पूजा के दिन विशेष अनुष्ठान व पूजा का आयोजन होता है.

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गांधीनगर, एसबी पहाड़ी काली मंदिर गांधीनगर में काली पूजा के दिन विशेष अनुष्ठान व पूजा का आयोजन होता है. 56 वर्ष पुराना यह मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. झारखंड के अलावे प बंगाल, छत्तीसगढ़, ओड़िशा तथा बिहार से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालु बकरे की बलि भी देते हैं. पुजारी तन्मय गोस्वामी ने बताया के 20 अक्तूबर की रात मां काली की पूजा होगी तथा 21 अक्तूबर की सुबह भोग व आरती के बाद प्रसाद वितरण किया जायेगा. सीसीएल की खासमहल कोनार परियोजना तथा बोकारो कोलियरी में भी काली पूजा का आयोजन होता है.

बोकारो थर्मल में मिलन तीर्थ क्लब 43 वर्षों से कर रहा काली पूजा का आयोजन

बोकारो थर्मल. बोकारो थर्मल में मिलन तीर्थ क्लब द्वारा 43 वर्षों से काली पूजा का आयोजन किया जा रहा है. पूजा बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार दीपावली की रात मध्य रात्रि में शुरू होती है और अगले दिन सुबह चार बजे तक चलती है. जानकारी के अनुसार यहां पूजा की शुरुआत वर्ष 1982 में तापस भट्टाचार्य, गोपू गुप्ता, तरुण गुप्ता, हरपाल सिंह आदि ने मिलकर की थी. पूजा कमेटी के सदस्यों ने बताया कि यहां भव्य मंदिर बनाने की योजना है. इस पर जल्द ही कार्य शुरू किया जायेगा. इस वर्ष आयोजन को कमेटी के धर्मेंद्र सिंह, अजय यादव, बिल्ला भाटिया, रोहित सिंह, टुनटुन सिंह, हरपाल सिंह, तरुण गुप्ता, रवींद्र कुमार, संजय सिंह, रंजीत मंडल, मृत्युंजय मंडल, श्री भगवान यादव आदि का योगदान रहा.

अंगवाली में 145 वर्षों से हो रही काली पूजा

फुसरो. पेटरवार प्रखंड अंतर्गत अंगवाली उत्तरी पंचायत स्थित मां काली के मंदिर में 145 वर्षों से काली पूजा की जा रही है. पूजा की शुरुआत द्वारिकानाथ चटर्जी ने ग्रामीणों के सहयोग से मिट्टी का दीवार पर खपरैल की छत बना कर की थी. मां काली का विग्रह अंगवाली के दुमुहानी श्मशान घाट से लाकर यहां स्थापित किया गया था. श्री चटर्जी के बाद उनके पुत्र बनमाली चटर्जी ने आयोजन की जिम्मेदारी संभाली. कुछ सालों के बाद उन्होंने जिम्मेदारी जरीडीह प्रखंड के पथुरिया गांव के पुजारी निवारण मुखर्जी को सौंप दी. वर्तमान में उन्हीं के वंशज प्रदीप मुखर्जी द्वारा पूजा करायी जा रही है. ग्रामीणों के सहयोग से वर्ष 2017 में भव्य मंदिर का निर्माण किया गया. पूजा समिति की ओर से काली पूजा की रात को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. वर्तमान में मुखिया धर्मेंद्र कपरदार, समिति के लोगों व ग्रामीणों के सहयोग से आयोजन किया जा रहा है.

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