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Jharkhand News : बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर कर रहे जैविक खेती, आज भी विस्थापन का दंश झेल रहे संताली परिवार

इनके टमाटर व करेला की खरीदारी के लिए झारखंड के बोकारो, पेटरवार, विष्णुगढ़ व गोमिया के व्यापारी अपने वाहन से बाराटांड़ पहुंचते हैं. हजारीबाग के एनजीओ द्वारा पाइप के माध्यम से पानी खेत में पहुंचाया गया है. उसी से सिंचाई की जा रही है, लेकिन मोटर में खराबी के कारण पिछले 15 दिनों से सिंचाई प्रभावित है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand News : टमाटर की फसल दिखाते किसान
Jharkhand News : टमाटर की फसल दिखाते किसान
प्रभात खबर

Jharkhand News, बोकारो न्यूज (नागेश्वर) : झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया‌ प्रखंड अंतर्गत कर्री पंचायत के संताली बहुल गांव बाराटांड़ में तीन परिवारों ने कड़ी मेहनत से बंजर जमीन को उपजाऊ बना दिया है. अब वे चार एकड़ में ड्रिप एरिगेशन से जैविक खेती कर रहे हैं. सिंचाई की अच्छी सुविधा मिले, तो ये अच्छी खेती कर सकते हैं. आपको बता दें कि ये पांच दशक पूर्व विस्थापित होकर यहां पहुंचे. इन्हें आज भी नियोजन व मुआवजा का इंतजार है.

आपको बता दें कि इनके टमाटर व करेला की खरीददारी के लिए झारखंड के बोकारो, पेटरवार, विष्णुगढ़ व गोमिया के व्यापारी अपने वाहन से बाराटांड़ पहुंचते हैं. यहां जन सहयोग केन्द्र के सहयोग से सिंचाई की व्यवस्था की गयी. हजारीबाग के इस एनजीओ द्वारा एक किलोमीटर दूर से पाइप के माध्यम से पानी खेत में पहुंचाया गया. उसी से सिंचाई की जा रही है. मोटर में खराबी के कारण पिछले 15 दिनों से सिंचाई प्रभावित है.

किसानों ने कहा कि कुआं खुदवाने पर पानी निकलता ही नहीं है तथा आस-पास में अन्य कोई और सुविधा नहीं है. कृषि विभाग से डीप बोरिंग मिल जाये तो उन्हें सिंचाई में काफी मदद मिलेगी. शेष बंजर व परती जमीन को भी वे उपजाऊ बना सकते हैं. उन्हें अब तक किसी प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं मिली है. अनुदान पर ड्रिप एरिगेशन का लाभ मिले, तो अच्छी खेती कर सकते हैं.

बीडीओ कपिल कुमार ने कहा कि सिंचाई की सुदृढ़ व्यवस्था बहाल करने के लिए डीप बोरिंग को लेकर विभाग से पत्राचार किया जायेगा. बहुत जल्द प्रयास होगा कि कृषि कार्य से जुड़े लोगों को अन्य दूसरी योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके.

किसान गोपीनाथ मांझी का पुत्र अजित मांझी ने कहा कि काम के अभाव में उनका भाई दूसरे राज्यों में पलायन कर गया था. दुर्घटना के कुछ दिनों बाद उसकी मृत्यु हो गयी थी. इस हादसे के बाद श्री मांझी ने ठाना कि अन्य भाइयों को बाहर काम करने के लिए भेजने के बजाय परती जमीन में ही खेती करेंगे, वहीं किसान मेहीलाल मांझी ने कहा कि वे कर्ज लेकर कृषि कार्य से जुड़े हैं. इलहाबाद बैंक से कृषि लोन लेने का प्रयास किया था, पर बैंक के अधिकारी ने कार्यक्षेत्र से काफी दूर होने का हवाला देकर लोन नहीं दिया. इसके चलते बैंक से उन्हें लोन नहीं मिल सका.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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