Bokaro News : नयी स्वांग वाशरी को लेकर हुई जनसुनवाई
Published by : JANAK SINGH CHOUDHARY Updated At : 07 Jun 2025 12:11 AM
Bokaro News : बनने वाली नयी स्वांग वाशरी को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति हेतू कथारा में झारखंड राज्य पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा लोक सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
कथारा, बनने वाली नयी स्वांग वाशरी को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति हेतू कथारा स्थित सीसीएल ऑफिसर्स क्लब में शुक्रवार को झारखंड राज्य पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा लोक सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एडिशनल कलेक्टर मो मुमताज अंसारी ने कहा कि नयी वाशरी बनने में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित जन प्रतिनिधियों द्वारा जो सुझाव सामने आये हैं, उस पर प्रबंधन नियमों का पालन करते हुए अमल करें. राज्य सरकार की नीति के तहत 75 % रोजगार स्थानीय विस्थापितों को मिले. जिला खनन पदाधिकारी रवि कुमार सिंह और धनबाद के पर्षद आरओ आरओ विवेक कुजूर ने भी अपने विचार रखे. कथारा क्षेत्र के जीएम संजय कुमार ने कहा कि नयी वाशरी बनने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग छह सौ रोजगार मिलेगा. साथ ही क्षेत्र का विकास होगा. कहा कि विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता मिले, इसके लिए सीओ से वार्ता कर जल्द पेप कार्ड बनवाना होगा. 1.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता वाली नयी वाशरी के निर्माण की लागत 338 करोड़ रुपये है. निर्माण में तीन वर्ष का समय लगेगा. स्वांग वाशरी के पीओ बी मोहन बाबू नयी वाशरी में कोयले की आपूर्ति, डिस्पैच प्लांट और आसपास के लोगों को मिलने वाले लाभ आदि पर रिपोर्ट प्रस्तुत की. मौके पर रांची पर्यावरण विभाग के जेइ गीता एक्का, सीसीएल जीएम वाशरी निर्माण सुरेश कुमार तालांकर, मुख्यालय रांची के जीएम विद्या सागर सहित पंचायत प्रतिनिधि, विस्थापित प्रतिनिधि, एसीसी सदस्य आदि उपस्थित थे.
पंचायत प्रतिनिधियों ने कई बिंदुओं पर रखी बात
कार्यक्रम में जिप सदस्य सुरेंद्र राज, आकाश लाल सिंह, हजारी मुखिया तारामणि देवी, स्वांग उत्तरी मुखिया विनोद कुमार आदि ने कहा कि नयी वाशरी के निर्माण में विस्थापितों को रोजगार दिलाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा चिह्नित कर उनका पेप कार्ड बने. वर्षों पूर्व जिस स्थान पर स्वांग वाशरी बनी है, वहां रह रहे लोग बेघर हुए और आज भी गैरमजरूआ, गंझूडीह आदि गांवाें में रह रहे हैं. यहां के लोग आज भी पेयजल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार जैसी सुविधाओं से दूर हैं. सीएसआर फंड की राशि परियोजना के निकट प्रभावित गांवों में खर्च न होकर दूर के गांवों में खर्च की जाती है. स्वांग दक्षिणी पंसस सैफ अली, उत्तरी के सोमनाथ गंझू, केदार स्वर्णकार, नरेश प्रजापति, सुनील राम, रामदेव राम, मिनहाज अंसारी, सोहन कुमार, बबलू यादव, भोला यादव आदि ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए मापदंडों का पालन हो रहा है या नहीं, समय-समय पर इसकी निगरानी के लिए जन प्रतिनिधियों एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की एक कमेटी बने.कार्यक्रम में इनकी रही सहभागिता
प्रशासन की ओर से माइनिंग इंस्पेक्टर जितेंद्र महतो, सीताराम टुडू, कथारा ओपी प्रभारी राजेश प्रजापति, एसीसी सदस्य इकबाल अहमद, शमसुल हक, कामोद प्रसाद, प्रबंधन की ओर से जीएम सीपी अनंत कुमार, प्रबंधक रोशन कुमार, एसओ माइनिंग सीबी तिवारी, एसओ वित्त राजीव रंजन, एसओ सिविल संजय कुमार सिंह, एसओपी रामानुज प्रसाद, एसओ इन्वेस्टमेंट एसएस पाल, क्षेत्रीय सुरक्षा पदाधिकारी एसके गुप्ता, एसओ एक्स अभिजीत दत्ता, कार्मिक प्रबंधक एससी पासवान, समीराज सिंह, सूर्यप्रताप सिंह, उप प्रबंधक अमित कुमार, अमन भूषण, राहुल कुमार सिंह, वित्त प्रबंधक रवींद्र कुमार चौधरी के अलावा एके सिंह, बलराम नायक, अशोक ओझा, यदु उरांव, रोशन लाल रवि, निवारण केवट, लक्ष्मण बहा कश्चप, पीयूष कुमार वर्मा आदि उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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