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Bokaro News : गांवों में झाल-मजीरा व ढोलक के साथ गाये जाते थे फगुआ के गीत

Updated at : 12 Mar 2025 12:25 AM (IST)
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Bokaro News : गांवों में झाल-मजीरा व ढोलक के साथ गाये जाते थे फगुआ के गीत

Bokaro News : होली को लेकर पहले गांवों में कई दिन पहले से ही फगुआ के गीत गाये जाते थे. हर गांव में चौपाल (बैठकी) लगा करती थी.

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बेरमो. होली को लेकर पहले गांवों में कई दिन पहले से ही फगुआ के गीत गाये जाते थे. हर गांव में चौपाल (बैठकी) लगा करती थी. इसमें झाल, मजीरा व ढोलक के साथ मदमस्त होकर लोग फगुआ के गीत गाते थे. चंद्रपुरा प्रखंड के अलारगो निवासी बुटेश्वर ठाकुर, सुरेंद्र प्रसाद वर्णवाल, गोपाल तुरी, सयनाथ तुरी, त्रिभुवन पांडेय, हरि सत्र पांडेय, राजेंद्र पांडेय पुरानी परंपरा को निभाते हुए आज भी चौपाल लगा कर फगुआ के गीत गाते हैं. चिरुडीह, सिमराकुल्ही, चिरुडीह, तारमी सहित कई जगहों में लोग टोली बना कर फगुआ के गीत गाते हुए भ्रमण करते हैं. पहले होली के दिन सुबह में ही पूरे मुहल्ले की टोली निकल जाती थी तथा कीचड़ की जम कर होली होती थी. शाम में रंग व गुलाल की होली खेलते थे.

दोल पूर्णिमा के रूप में बंग समाज मनाता है होली का त्योहार

बंग समाज होली के त्योहार को दोल पूर्णिमा के रूप में मनाता है. पूर्णिमा के दिन होलिका दहन की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. इस दिन बंग समाज के लोग अपने-अपने घरों में राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं तथा भगवान के चरणों में गुलाल व अबीर चढ़ाते हैं. होलिका दहन स्थल पर बेल व नारियल चढ़ाते हैं. शाम को बंग समाज के लोग एक दूसरे के घर में जाकर अबीर-गुलाल लगा कर होली की शुभकामना देते हैं. बड़े-बुजुर्ग के पैरों में अबीर देकर आशीर्वाद लेते हैं. छोटे को बड़े-बुजुर्ग माथे पर अबीर का टीका लगा कर आशीर्वाद देते हैं तथा मिठाई खिलाते हैं. होली के दिन हर घर में मांस-मछली बनता है. बंग समाज की महिलाएं भी जमकर होली खेलती हैं. होली में बंग समाज के घर में मायके में बेटी-दामाद को निश्चित रूप से बुलाया जाता है.

बच्चू ठाकुर व जयराम तिवारी के फगुआ गीतों पर झूमते थे लोग

एक समय था जब बेरमो में होली के कई दिन पूर्व से ही गायक बच्चू ठाकुर व जयराम तिवारी के फगुआ गीतों पर लोग मदमस्त होकर झूमते थे. बेरमो देवी मंदिर में दोनों फगुआ गीत गाते थे. बच्चू ठाकुर के गाये बंगला में उड़ा ता अबीर अहो लाला…, बाबू कुंवर सिंह तेगवा बहादुर…. और जयराम तिवारी के गाये झूला झुलत में हो गये झगड़वा…., गोरिया करके सिंगार अंगना में पिसेली हरदिया… जैसे गीतों पर फगुआ का खूब रंग जमता था. अब तो गिने-चुने मंदिरों में ही होली पर भजन-कीर्तन व फगुआ गीत बजता है. बेरमो के भोजपुर इलाके में लोग काफी उत्साह के साथ होली का त्योहार मनाते थे. रंग, गुलाल व अबीर खेलने के साथ भांग की शरबत होली के दिन जरूर पीते थे. टोली बना कर लोग घर-घर जाकर होली के गीत गाते थे. इसके पहले मंदिर से होली गीत की शुरुआत की जाती थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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JANAK SINGH CHOUDHARY

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