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हजारीबाग, बोकारो और गिरिडीह के 47 मजदूर कैमरून में फंसे, Video जारी कर लगाई मदद की गुहार

Updated at : 05 Dec 2024 6:57 PM (IST)
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jharkhand laborers stuck in camroon
अफ्रीकी देश कैमरून में फंसे झारखंड के श्रमिकों की तस्वीर.

Jharkhand News: झारखंड के 3 जिलों के 47 मजदूर अफ्रीकी देश कैमरून में फंस गए हैं. 4 महीने से वेतन नहीं मिल रहा. खाने के लाले पड़े हैं. वीडियो संदेश जारी करके मदद की गुहार लगाई है.

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Jharkhand News|ललपनिया (बोकारो), नागेश्वर : झारखंड के 47 प्रवासी श्रमिक कैमरून में फंसे हैं. अफ्रीकी देश से इन मजदूरों ने एक वीडियो संदेश जारी करके झारखंड और भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है. ये श्रमिक बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह जिले के हैं. 4 महीने से कंपनी ने इनके वेतन का भुगतान नहीं किया है. इसकी वजह से खाने-पीने के लाले पड़ गए हैं. आलम यह है कि काम से लौटने के दौरान हादसे में एक श्रमिक का हाथ कट गया, लेकिन कंपनी की ओर से उसे कोई मुआवजा नहीं दिया गया.

केंद्र और झारखंड सरकार से श्रमिकों की मदद करने की अपील

मजदूरों ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा बताई है. श्रमिकों का वीडियो देखने के बाद झारखंड में प्रवासी श्रमिकों के लिए काम करने वाले स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने केंद्र और झारखंड सरकार से अपील की है कि इन मजदूरों की सकुशल वतन वापसी के लिए ठोस पहल की जाए. इसके पहले भी कई बार ऐसा मामला सामने आया है, जब प्रवासी मजदूर पैसे कमाने के लिए विदेश चले गए. वहां जाने के बाद उनका शोषण किया गया. काम करवाकर उन्हें पैसे नहीं दिए गए. बदहाली में वक्त गुजारने को मजबूर हो गए. फिर अपने देश और राज्य की सरकार से अपील की. सरकार की मदद से उनकी सुरक्षित वापसी करवाई गई.

प्रवासी मजदूरों ने कैमरून से वीडियो जारी कर बताई अपनी समस्या.

हजारीबाग जिले के इतने लोग फंसे हैं कैमरून में

हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़ प्रखंड के जोबर गांव के रेवतलाल महतो, कमलदेव कुमार महतो, विजय कुमार महतो, जय नारायण कुमार महतो, उमेश महतो, नागी गांव के राजेंद्र कुमार, अंबाटांड़ गांव के चिंतामणि महतो, भागीरथी महतो, प्रेमचंद महतो, पिंटू कुमार महतो, खरकी गांव के दशरथ महतो, मडमों गांव के सुरेश महतो, सिरैय के मनोज कुमार महतो, बलकमक्का के बलदेव महतो, केंदुवाडीह के रोहित महतो, बसरिया के टेकलाल महतो, निर्मल महतो, छोटी यादव, भूखलाल महतो, किशोर कुमार, योगेंद्र महतो, रामचंद्र महतो, निर्मल यादव, लोकनाथ यादव, चलकी के हीरालाल मांझी, लमकीटांड़ के धानेश्वर किस्कू, दुमुहान के मनोज मरांडी, गोविंदपुर के अशोक महतो, भुवनेश्वर महतो, बंदखारों के भरत महतो और चानो के दिनेश टुडू कैमरून में फंसे हैं.

बोकारो जिले के ये लोग हैं कैमरून में फंसे

बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड के मुंगो गांव के खिरोधर महतो, नारायण महतो, सीधाबारा के नीलकंठ महतो, नरकंडी के महेश महतो, तुसको के राजेश कुमार महतो, तिसकोपी के रोहित महतो, तुईयो के द्वारिका महतो, रजडेरवा के सत्येंद्र कुमार महतो, नावडंडा के छोटन टुडू, छोटन किस्कू, बड़की सीधाबारा के गणेश महतो, चेतलाल महतो, चंद्रदेव महतो और नावाडीह के संतोष महतो कैमरून में फंस गए हैं.

गिरिडीह जिले के फंसे लोगों के नाम

गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के महुरी गांव के रूपलाल महतो और हेंसला गांव के मुकेश महतो कैमरून में फंस गए हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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