बोकारो के 38 नदी घाटों से खुलेआम हो रही बालू की लूट, प्रशासन नहीं कर रहा कोई कार्रवाई
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 24 Feb 2023 11:27 AM
बोकारो में लगभग हर दिन बालू की खपत अवैध रूप से हो रहा है. जिले में एक भी घाट वैध नहीं है. 38 चिह्नित घाटों की टेंडर अवधि समाप्त हो चुकी है.
बोकारो जिले के 38 चिह्नित घाटों की नीलामी नहीं हो पायी है. जिला खनन टास्क फोर्स यानी डीएमटीएफ की बैठक मंगलवार को डीसी ऑफिस में की गयी थी. बैठक में डीएमओ रवि कुमार ने बताया था कि पिछले माह यानी जनवरी में 23 मामलों पर कार्रवाई हुई थी. वहीं विभागीय जानकारों की माने तो अवैध बालू खनन का यह आंकड़ा बहुत कम है. हकीकत इससे कहीं अधिक है. बालू चोरी का नजारा दामोदर नद तट पर आसानी से देखा जा सकता है. चाहे पेटरवार प्रखंड हो या चास प्रखंड, दामोदर नद तट पर हर जगह बालू की बेहतरीब तरीके से उठाव जारी है. दर्जनों ट्रैक्टर एक साथ बालू उठाव में लगे हुए हैं. बूढ़ीडीह-वास्तेजी तट पर बकायदे बालू को छान कर लदाई होती है. यह आम आंखों से देखा जा सकता है, अलग बात है कि प्रशासनिक आंख इसे नहीं देख पाती है.
बालू घाट नीलाम कराने की जिम्मेदारी जेएसएमडीसी पर है. 2022 की पहली तिमाही में प्रक्रिया शुरू की गयी. लेकिन माना जाता है कि जब जेएसएमडीसी ने नीलामी की प्रक्रिया प्रारंभ की तो पंचायत चुनाव की आचार संहिता बाधा बन गई. चुनाव संपन्न होने के बाद एनजीटी की रोक लग गयी. एनजीटी की रोक हटने के बाद फिर प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन फिर से यह फाइल में ही अटक कर रह गयी.
23 सितंबर 2022 को विधानसभा की कमेटी बोकारो दौरा पर आयी थी. टीम में शामिल पूर्वी जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने जेएसएमडीसी की कार्य पद्धति पर सवाल उठाया था. सरयू राय ने कहा था कि जिला खनन की टीम ने 42 घाट को चिह्नित किया है. लेकिन, जेएसएमडीसी के सर्वे में संख्या इससे अलग है. जेएसएमडीसी ने उन कैटेगरी 01 घाट को भी सर्वे में शामिल किया है, जिसे पंचायत स्तर पर संचालित किया जाता है. एनजीटी के रोक खत्म होने के बाद भी नहीं हुई नीलामी 15 अक्तूबर को एनजीटी की रोक खत्म हो गयी. पिछले तीन साल से एनजीटी की रोक लग रही है और हट रही है. लेकिन, बालू घाट की नीलामी प्रक्रिया रुकी हुई है. इससे एक-एक कर सभी घाट अब अवैध हो गया है. कुछ ब्लॉक से ट्रैक्टर निकलते देखे भी जा रहे हैं. जिला प्रशासन की ओर से टास्क फोर्स बनाया गया है. लेकिन,अवैध कारोबारी प्रशासन पर बीस ही पड़ते हैं.
जिला में 38 बालू घाट चिह्नित है, लेकिन इनमें से एक भी वर्तमान दौर में बंदोबस्त नहीं है. सभी चिह्नित घाट की आवंटन अवधि पूरी हो चुकी है. बालू घाट नीलाम कराने की जिम्मेदारी जेएसएमडीसी पर है. जिला खनन विभाग की मानें तो बालू घाट की नीलामी की प्रक्रिया चल रही है. जिला सर्वे रिपोर्ट (डीएसआर) बनाने की प्रक्रिया चल रही है. 10 को कॉमर्शियल घाट के रूप में चिह्नित किया गया है. वहीं अन्य घाट को कैटेगरी में बांटा गया है. कुछ घाट पर वन विभाग से भी सहमति का मामला प्रक्रियाधीन है. आपत्ति निवारण के बाद डीएसआर को स्टेट इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट की मंजूरी के लिए भेजा जायेगा. यहां से मंजूरी के बाद जेएसएमडीसी पर्यावरण स्वीकृति लेगी.
बालू नदियों के पानी को बांध कर रखती है. नदी में जल अधिक होने पर बालू ही पानी को बांधती है, बहाव से रोकती है. वहीं नदी में जलस्तर कम होने पर बालू खुद में बांधे जल को बहाव क्षेत्र में प्रवाहित करती है. पर्यावरणविद् नीतीश प्रियदर्शी की माने तो बालू निर्माण में बहुत समय लगता है, इसे बचाने की जरूरत है. हद से ज्यादा दोहन नदियों की जिंदगी खत्म कर देगी.
चास प्रखंड के चितामी – जाला स्थित इजरी नदी घाट पर बालू माफियाओं का राज है. बालू माफिया जेसीबी लगाकर नदी में जहां-तहां गड्ढे कर बालू निकालते हैं. नदी के पूरे हिस्से में उत्खनन कर जहां-तहां 15 से 20 फीट तक जेसीबी से गड्ढा कर दिया गया है. इन गड्ढों में कभी भी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है. ग्रामीणों के लिए यह गड्ढे खतरनाक बन गये हैं. भंडारडीह तथा जाला घाट से रोजाना बालू माफियाओं द्वारा जेसीबी से लोड कर ट्रैक्टर को गंतव्य तक भेजा जा रहा है. बालू माफियाओं द्वारा जेसीबी से बालू का उठाव कर नदी के बहते पानी पर दहा दिया जाता है. बालू से मिट्टी बहाने के उपरांत फिर से छानकर उस बालू को ट्रैक्टर में लोड कर बेच दिया जाता है. मिट्टी को नदी में बहाने से नदी का पानी भी दूषित हो जा रहा है.
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