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Bokaro News : छोटी-छोटी बात पर कोर्ट ना जायें, सामाजिक स्तर पर करें निपटारा

Updated at : 24 Nov 2025 12:48 AM (IST)
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Bokaro News : छोटी-छोटी बात पर कोर्ट ना जायें, सामाजिक स्तर पर करें निपटारा

Bokaro News : प्रभात खबर के लीगल काउंसलिंग में अधिक आये पारिवारिक विवाद के मामले

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Bokaro News : प्रभात खबर के लीगल काउंसेलिग में अधिक आये या में पारिवारिक विवाद के मामले 02 – बोकारो. एक्वायर जमीन का मुआवजा मिलने के बाद मालिकाना हक व्यक्ति का समाप्त हो जाता है. एक्वायर करनेवाली संस्था जमीन का उपयोग जब चाहे कर सकती है. इसमें किसी तरह का दोबारा दखल जमीन का मालिक किसी भी स्थिति में नहीं कर सकता है. ऐसा करने पर दावा करनेवाले व्यक्ति को कानूनी परेशानी झेलनी होगी. जमीन विवाद, मारपीट, घरेलू हिंसा सहित अन्य छोटे स्तर के मामले को सलटाने के लिए सामाजिक व्यवस्था का सहारा लेने की जरूरत है. छोटे मामले में सीधे पुलिस, कोर्ट कचहरी का चक्कर नहीं लगाना चाहिए. सामाजिक स्तर पर हर संभव निबटाने का प्रयास करें. यह बातें रविवार को प्रभात खबर ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग में बोकारो सिविल कोर्ट के वरीय अधिवक्ता ददन सिंह ने कही. ‘प्रभात खबर’ लीगल काउंसलिंग में धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, कोडरमा, बगोदर, रामगढ़, हजारीबाग सहित अन्य जगहों के पाठकों के लगातार फोन आते रहे. गोमिया के नंद किशोर का सवाल : बच्चे का आरटीइ (राइट टू एजुकेशन) के तहत गोमिया के एक विद्यालय में नामांकन हुआ है. छह माह पढाई पूरी करने के बाद उसका नामांकन रद्द करने की बात कही जा रही है. तर्क दिया जा रहा है कि आवास से स्कूल की तय दूरी अधिक है. जबकि पुत्री का नामांकन शिक्षा विभाग के अधिकारी की भेजी गयी सूची के अनुसार ही हुआ है. अधिवक्ता की सलाह : सभी कागजात के साथ शिक्षा विभाग को आग्रह आवेदन भेजें. इसमें नामांकन रद्द करने का कारण पूछें. पुत्री के भविष्य का ध्यान रखते हुए शिक्षा विभाग से नामांकन बने रहने देने का आग्रह करें. अमान्य होने पर सभी कागजातों के साथ उच्च न्यायालय में रिट दायर करें. हर हाल में न्याय मिलेगा. यही एक सरल विकल्प है. धनबाद की संगीता कुमारी का सवाल : मेरी शादी के 10 साल हो गये हैं. अब पता चला की पांच साल पूर्व पति ने दोबारा एक महिला के साथ कोर्ट मैरेज कर लिया है. सभी दस्तावेजों में उक्त महिला का नाम शामिल कराया है. मैं अपने बच्चों को कैसे हक दिला पाऊंगी. उसकी शादी को कैसे रद्द करायी जा सकती है? अधिवक्ता की सलाह : जिला के रजिस्ट्रार के पास शादी रद्द करने को लेकर आवेदन दें. अपनी सामाजिक शादी के सभी सबूत रजिस्ट्रार को उपलब्ध करायें. उन्हें बतायें की पहली शादी की जानकारी को छिपाते हुए दूसरी शादी का निबंधन कराया गया है. रजिस्ट्रार निबंधित शादी को रद्द करेंगे. साथ ही रजिस्ट्रार के निर्देश पर संबंधित व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ेगा. परेशान होने की जरूरत नहीं है. कोडरमा की बबीता कुमारी का सवाल : पांच साल से लीव इन रिलेशनशिप में रह रही थी. हमदोनों के बीच लिखित कागजात भी बना हुआ है. अब मेरा साथी युवक मुझे छोड़कर अलग हो गया है. मैं सरकारी सेवा और मेरा साथी सेना में है. मैं युवक पर कैसे दावा कर सकती हूं? अधिवक्ता की सलाह : लीव इन रिलेशनशिप के दौरान यदि आपके साथ घरेलू हिंसा की घटना हुई है, तो थाना में डोमेंस्टिक वायलेंस के तहत मामला दर्ज करायें. इसके बाद लिखित कागजात को कानूनी प्रक्रिया में लायें. इसके बाद न्यायालय द्वारा सुनवाई होगी. धनबाद के विजय कुमार का सवाल : हमारी जमीन पर पड़ोसियों ने दावा कर रखा है. बताते हैं कि हमारे घर के अभिभावक ने जमीन उन्हें लिख दिया है. कोई कागजात नहीं मिल रहा है. जबकि पड़ोसी कागज दिखा रहे हैं? अधिवक्ता की सलाह : डीड की सर्टिफाइड कॉपी कोर्ट से निकाल लें. उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है. न्यायालय का शरण लें. निश्चित रूप से आपकी समस्या का समाधान होगा. गोविंदपुर के विवेकानंद का सवाल : पोस्ट ऑफिस में मेरा एकाउंट है. साथ में पत्नी ज्वाइंट है. हम दोनों की बिना सहमति के खाते से लगातार ट्रांजक्शन हो रहा है. सूचना पर खाता को बंद किया गया है. अब इसमें मैं क्या करूं? अधिवक्ता की सलाह : मामला साइबर फ्राड से जुड़ा है. अपनी शिकायत पुलिस के पास लेकर जाये. जांच-पडताल के बाद पता चलेगा कि एकाउंट को फ्रिज क्यों किया गया. साथ ही ट्रांजक्शन का मामला कैसे शुरू हुआ. जांच-पडताल के बाद ही एकाउंट रेग्यूलर होगा. कतरास के समरेश कुमार का सवाल : मेरे पिता के हम दो संतान है. पिता लगातार संपत्ति मेरे बड़े भाई को देते जा रहे हैं. घर मेरी माता जी के नाम है. क्या पिताजी बड़े भाई के नाम कर सकते हैं? अधिवक्ता की सलाह : यदि घर माता जी के नाम है, तो पिता जी किसी भी स्थिति में नहीं बेच सकते है. यदि माता जी का देहांत हो जाता है, तो घर दोनों पुत्रों के बीच बंट जायेगा. पिता चाह कर भी बडे़ भाई को नहीं दे सकते हैं. धनबाद के ललन बनर्जी का सवाल : मेरे ससुर की संपत्ति में मेरी पत्नी को कैसे हिस्सा मिलेगा. इसके लिए क्या करना होगा. कौन सा कानूनी रास्ता है. जिसे आसानी से संपत्ति मिले? अधिवक्ता की सलाह : आपके ससुर को वसीयत बनानी होगी. जिसमें आपकी पत्नी का नाम होगा. वसीयत रजिस्ट्री कार्यालय में रजिस्ट्रट डीड के सामने बनाया जा सकता है. गिरिडीह के परेश कुमार का सवाल : एक जमीन के टुकड़े पर हम दो लोगों की हिस्सेदारी है. लेकिन मेरे एक रिश्तेदार ने जमीन के पूरे टुकड़े पर आवास बना लिया है. ऐसे में क्या करें? अधिवक्ता की सलाह : कोई परेशानी की बात नहीं है. न्यायालय में पार्टिशन शूट दाखिल करना होगा. इसके बाद जमीन की मापी कर दोनों दावेदारों को जमीन मिल जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MANOJ KUMAR

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MANOJ KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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