Bokaro News: घटती वन भूमि ने बढ़ाया हाथियों का खतरा

Published at :14 Feb 2025 12:41 AM (IST)
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Bokaro News: घटती वन भूमि ने बढ़ाया हाथियों का खतरा

Bokaro News: कोल माइंस के विस्तारीकरण होने से भी उजड़ गये कई घने जंगल

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Bokaro News:

राकेश वर्मा, बेरमो.

बेरमो अनुमंडल के गोमिया से लेकर नावाडीह प्रखंड के ऊपरघाट क्षेत्र में कई वर्षों से हाथियों का उत्पात जारी है. .घटती वन भूमि ने यह खतरा बढ़ा दिया है. सीसीएल के कमांड एरिया में कई नयी माइंस के खुलने तथा कई माइंसों के विस्तारीकरण के कारण कई घने जंगल उजड़ जाने से हाथियों का उत्पात बढ़ा है. वर्तमान में पिछले एक माह से हाथियों का झुंड गोमिया व ऊपरघाट क्षेत्र के कई घरों को तोड़ दिया और फसलों को नुकसान पहुंचाया है. कई लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा है.

माइंस के कारण हाथियों को नहीं मिलता रास्ता :

ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का विचरण पहले भी ऊपरघाट क्षेत्र में होता रहा है. पहले हाथी आते थे तथा कुछ दिनों के बाद झुमरा पहाड़ के रास्ते पलामू बेतला के जंगलों में चले जाते थे, लेकिन सीसीएल के कमांड एरिया में कई नयी माइंस के खुलने तथा कई माइंसों का विस्तार होने से घने जंगल उजड़ गये. सीसीएल अंतर्गत केदला, घाटो, बड़काकाना, रजरप्पा, कुजू, बेरमो के गोविंदपुर प्रोजेक्ट, एकेके व कारो परियोजना के अलावा ढोरी के अमलो, तारमी प्रोजेक्ट के खुलने व विस्तारीकरण के कारण जंगल उजाड़े गये. जंगल क्षेत्र में माइंस खुल जाने से अब हाथियों का झुंड क्षेत्र में आता है तो उसे वापस जाने का रास्ता नहीं मिलता है. हाथी कई दिनों तक एक ही क्षेत्र में रह कर उत्पात मचाते हैं. जब उन्हें खदेड़ा जाता है तो शहरी क्षेत्र होते हुए किसी तरह अन्य क्षेत्र के जंगल में प्रवेश कर जाते हैं.

10 वर्षों में हाथी के हमले में 15 लोगों की मौत :

गोमिया वन प्रक्षेत्र अंतर्गत 2014 में बड़कीपुनू में शिवलाल मांझी, दो सितंबर 2014 को केरी के जीवलाल मांझी, 15 अगस्त 2019 को घघरी की अनिता कुमारी, 7 अक्टूबर 2020 को ग्राम होन्हें की तिलवा देवी, 16 दिसंबर 2021 को ग्राम गोपो के मानकी महतो, 15 दिसंबर 2022 को कंडेर के मंगरा करमाली, 26 मार्च 2023 को बड़कीपुनू के कुसुमडीह जंगल में टुटू प्रजापति की मौत हाथी के हमले में हुई. इसी प्रकार, तेनुघाट वन प्रक्षेत्र अंतर्गत पचमो के बघरैया में दिव्यांग गुड़िया कुमारी, खखंडा स्थित लुगू पहाड़ जंगल में लालजी महतो, तुलबुल चैलियाटांड़ की सुहानी हेंब्रम, कोदवाटांड़ के सानू मांझी और ललपनिया बैंकमोड़ तुरी टोला की मंजूरी देवी, 19 अप्रैल 2024 में तिलैया के 65 वर्षीय लहरु महतो की मौत हाथी के हमले में गयी है. गत 24 जनवरी 2025 को नावाडीह प्रखंड के ऊपरघाट के बरई, पलामू, दरजी मुहल्ला व छोटकी कुड़ी में जमकर उत्पात मचाया था. तीन महिलाओं को दौड़ा कर कुचल दिया था, जिसमें सुरजी देवी की मौत हो गयी थी. कई किसानों की चहारदीवारी व घर का दरवाजा भी तोड़ दिया था. खेत में लगे फसल को रौंद कर बर्बाद कर दिया था. लगभग पांच घंटे के बाद वनकर्मी पहुंचे थे. कुछ दिन पहले सुबह साढ़े सात बजे सिमराबेड़ा गिधिनिया में हाथियों ने 24 वर्षीय रंजू देवी को मार डाला था.

कई हुई गंभीर रूप से जख्मी :

हाथियों के हमले में डेढ़ दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हो चुके हैं. इनमें से कई की बाद में मौत भी हो गयी थी. 30 जनवरी की सुबह हाथियों ने रजरप्पा व घघरी के बीच जंगल में एक अधेड़ को पटक कर बुरी तरह जख्मी कर दिया. एक जनवरी की रात गोपो में खूब उपद्रव मचाया. फसलों को रौंदा. दो जनवरी की रात हरिदगढ़ा में तीन-चार घरों और दुकानों को क्षतिग्रस्त कर सैकड़ों मन धान, चावल आदि बर्बाद कर दिया. बाड़ी में लगी सब्जी की फसलों को रौंद डाला.

जंगल बचाने का चला रहे अभियान :

वन एवं पर्यावरण सुरक्षा समिति के जिला संयोजक खिरोधर महतो कहते हैं कि ऊपरघाट क्षेत्र में घना जंगल होने के कारण हाथियों को काफी आहार मिल जाता है. वर्ष 1982 से वे लोग ऊपरघाट क्षेत्र में जंगल बचाने का अभियान चला रहे हैं और अभी तक लाखों पेड़ों को उजड़ने से बचाया है. लोग महुआ चुनने के दौरान जंगलों में आग लगा देते थे, जिसे रोका गया. लकड़ी तस्करी भी रोकी गयी. समिति की ओर से लगभग 10 हजार से ज्यादा पौधे भी लगाये गये हैं.

गोपो में कुएं में गिरने से हो गयी थी एक हाथी की मौत :

कुछ दिन पूर्व ही महुआटांड़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोपो(धवैया) में रात के अंधेरे में एक कुएं में गिरने से फंसकर एक हाथी की दर्दनाक मौत हो गयी थी. भले ही हाथी क्षेत्र में खूब उपद्रव कर रहे हैं, लेकिन इस हाथी की मौत से ग्रामीण भी दुखी थे.

वन विभाग के पास हाथियों को खदेड़ने का कारगर उपाय नहीं, ग्रामीणों में आक्रोश :

हाथियों के उत्पात को रोकने और उसे घनी आबादी वाले इलाके से खदेड़ने के लिए वन विभाग के पास कोई कारगर व्यवस्था नहीं है. क्षेत्र में हाथियों को आने से रोकने का भी कोई उपाय नहीं है. गांवों में भी ग्रामीणों को कोई ऐसी सुविधाएं मुहैया नहीं करायी जाती है, जिसकी मदद से वह लोग तत्काल हाथियों को खदेड़ सकें. लोगों के पास टार्च, केरोसिन व पटाखे तक मौजूद नहीं होते हैं. मुखिया संघ गोमिया प्रखंड के अध्यक्ष तेजलाल महतो लगातार वन विभाग के इस उदासीन रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते रहे हैं. ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यशैली को लेकर आक्रोश व्याप्त है. हाथियों के आतंक से नुकसान का दायरा लगातार बढ़ने से ग्रामीणों में खासी नाराजगी है.

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