BSL में कर्मियों ने तैयार किया इन-हाउस CDI सिस्टम, कोक की जगह पुल्वराइज्ड कोल से सालाना 100 करोड़ की बचत का अनुमान
BSL के मेन गेट का फोटो
बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के कर्मियों ने अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया है. इन-हाउस विकसित कोल डस्ट इंजेक्शन (CDI) न्यूमैटिक कन्वेयिंग सिस्टम से सालाना 100 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है. यह पहल आत्मनिर्भरता और नवाचार का एक बेहतरीन उदाहरण है.
बोकारो. विश्वकर्मा पूजा भारतीय औद्योगिक संस्कृति में श्रम, कौशल, सृजन, तकनीक और कर्म की उत्कृष्टता का पर्व है. यह दिन उन कर्मयोगियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है, जिनके परिश्रम और तकनीकी दक्षता से देश की औद्योगिक प्रगति को गति मिलती है. बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के कर्मियों की कार्यकुशलता, नवाचार और समर्पण भी इसी भावना को साकार करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं.

देश के प्रमुख एकीकृत इस्पात संयंत्रों में शामिल BSL में प्रतिदिन हजारों कर्मी अपने ज्ञान, अनुभव और तकनीकी कौशल के माध्यम से उत्पादन को आगे बढ़ाने के साथ प्रक्रियाओं में सुधार, ऊर्जा दक्षता, लागत अनुकूलन और तकनीकी नवाचार की दिशा में काम कर रहे हैं.
तकनीकी चुनौती को इन-हाउस समाधान में बदला
BSL के कर्मियों की तकनीकी क्षमता का एक उदाहरण कोल डस्ट इंजेक्शन (CDI) न्यूमैटिक कन्वेयिंग सिस्टम की इन-हाउस कमीशनिंग है. BPSCL से पुल्वराइज्ड कोल को ब्लास्ट फर्नेस-03 तक पहुंचाने के लिए विकसित इस प्रणाली को BSL की टीम ने उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी विशेषज्ञता के जरिये तैयार किया.

इस परियोजना में करीब 650 मीटर लंबी DN250 पाइपलाइन के साथ ऑटोमेशन, विद्युत और अन्य संबद्ध प्रणालियां शामिल थीं. परियोजना को अवधारणा से कमीशनिंग तक निर्धारित समय सीमा में पूरा किया गया.
कमीशनिंग परीक्षण के दौरान सिस्टम ने निर्धारित 10 टन प्रति घंटा की तुलना में करीब 15 टन प्रति घंटा की सैद्धांतिक कन्वेइंग क्षमता प्रदर्शित की. यह पहल संयंत्र में जटिल तकनीकी जरूरतों के लिए इन-हाउस इंजीनियरिंग और नवाचार की क्षमता को दर्शाती है.
कोक की जगह पुल्वराइज्ड कोल के इस्तेमाल की उम्मीद
CDI सिस्टम के जरिये कोक के स्थान पर पुल्वराइज्ड कोल के इस्तेमाल की संभावना है. इससे ईंधन दक्षता में सुधार के साथ उत्पादन लागत में कमी आने की उम्मीद है.
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0.85 के कोक रिप्लेसमेंट रेशियो के आधार पर इस पहल से करीब 100 करोड़ रुपये सालाना संभावित बचत का अनुमान लगाया गया है. इससे संसाधनों के बेहतर उपयोग और BSL की लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
इस्पात उत्पादन से आगे राष्ट्र निर्माण में योगदान
इस्पात आधुनिक अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण है. सड़क, रेल, ऊर्जा, निर्माण, रक्षा और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में इसकी अहम भूमिका है. ऐसे में इस्पात संयंत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, लागत घटाने और ऊर्जा दक्षता सुधारने वाले प्रयासों का व्यापक औद्योगिक प्रभाव पड़ता है.
BSL के कर्मियों का योगदान केवल इस्पात उत्पादन तक सीमित नहीं है. वे तकनीकी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने, संसाधनों का कुशल उपयोग करने, ऊर्जा बचाने, लागत कम करने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं.
इन-हाउस तकनीक से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
औद्योगिक जरूरतों के लिए संयंत्र के भीतर ही तकनीकी समाधान विकसित करना आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है. CDI सिस्टम की इन-हाउस कमीशनिंग भी इसी क्षमता का उदाहरण है.
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विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर BSL के कर्मियों की यह पहल श्रम और तकनीकी कौशल के महत्व को रेखांकित करती है. संयंत्र की प्रगति मशीनों और तकनीक के साथ उन कर्मियों की विशेषज्ञता और प्रतिबद्धता से भी जुड़ी है, जो लगातार उत्पादन और तकनीकी दक्षता को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं.
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