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Mental Health Day 2020: मानसिक बीमारी की चपेट में झारखंड की बौद्धिक राजधानी बोकारो

Updated at : 09 Oct 2020 9:29 PM (IST)
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Mental Health Day 2020: मानसिक बीमारी की चपेट में झारखंड की बौद्धिक राजधानी बोकारो

Bokaro News, Mental Health Day: झारखंड की बौद्धिक राजधानी बोकारो मानसिक बीमारी की चपेट में आ रहा है. सिर्फ सितंबर, 2020 में 310 लोग ओपीडी पहुंचे. 150 लोगों की टेली काउंसलिंग की गयी. इसका अर्थ यह हुआ कि प्रतिदिन 10 लोग ओपीडी पहुंच रहे हैं और पांच लोग टेली काउंसलिंग ले रहे हैं.

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बोकारो (सुनील तिवारी) : झारखंड की बौद्धिक राजधानी बोकारो मानसिक बीमारी की चपेट में आ रहा है. सिर्फ सितंबर, 2020 में 310 लोग ओपीडी पहुंचे. 150 लोगों की टेली काउंसलिंग की गयी. इसका अर्थ यह हुआ कि प्रतिदिन 10 लोग ओपीडी पहुंच रहे हैं और पांच लोग टेली काउंसलिंग ले रहे हैं.

पूरे विश्व में मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 सितंबर) मनाने का बस एक ही प्रमुख उद्देश्य है कि लोगों में इस बात का संदेह मिटाया जा सके कि हर मानसिक बीमारी पागलपन का लक्षण नहीं होता. किसी भी शारीरिक बीमारी की तरह ही इसे भी दवाओं और बातचीत के जरिये ठीक किया जा सकता है. विज्ञान के इतनी तरक्की कर लेने के बाद भी लोग मानसिक बीमारी के बारे में बात करने से डरते हैं.

बोकारो में बढ़ती मानसिक बीमारी और इसकी गंभीरता को देखते हुए 10 अक्टूबर, 2020 से स्क्रीनिंग शुरू होगी. इसके लिए सीएचओ को ट्रेनिंग दी गयी है. उधर, भारत की पहली नेशनल सुसाइड प्रिवेंशन हेल्पलाइन नंबर 18005990019 शुक्रवार को जारी की गयी. इस पहल को ‘किरण’ नाम दिया गया है. इसके साथ ही ई-संजीवनी ओपीडी सेवा भी शुरू की गयी है.

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एक सामान्य इनसान अगर सोचने, समझने, समाज के साथ तालमेल बिठाने का सामर्थ्य रखता है और अपने काम आसानी से कर सकता है, तो यह साफ संदेश है कि उसका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर है. लेकिन, कभी-कभी उम्र के किसी दौर में काम के तनाव या रिश्ते की नाकामियों से घबराकर यदि व्यक्ति किसी से सामंजस्य बिठाने में नाकाम होने लगता है, तो यह संकेत है कि उसमें कुछ मानसिक विकार पैदा हो गये हैं. पिछले कुछ सालों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है. इसके बावजूद आज भी कई लोग हैं, जो इसके बारे में बात करने से झिझकते हैं.

कई तरह से हैं मानसिक विकार : डॉ प्रशांत कुमार मिश्रा

बोकारो सदर अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ प्रशांत कुमार मिश्रा कहते हैं कि मानसिक विकार की श्रेणी बहुत ही लंबी-चौड़ी है. इसमें मस्तिष्क से जुड़ी हर तरह की समस्या को शामिल किया जा सकता है. जैसे पार्किंसन, अल्जाइमर, ऑटिज्म, डिस्लेक्सिया, डिप्रेशन, तनाव, चिंता, पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, कमजोर याददाश्त, डर, भूलने की बीमारी और भी बहुत-से लक्षण हैं.

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उन्होंने कहा कि मानसिक रोग होने के बहुत से कारण हैं. पहला कारण आसपास का वातावरण है, तो दूसरा आनुवांशिक कारण. मानसिक रोग के कुछ लक्षण होते हैं, जिनको अगर समय पर पहचान लिया जाये, तो सही इलाज के जरिये रोगी को ठीक किया जा सकता है. अगर व्यक्ति तनाव या डिप्रेशन का शिकार है, तो मनोचिकित्सक की सलाह और दवाइयों के माध्यम से इसे ठीक किया जा सकता है.

पांच मानसिक विकार, जिनके बारे में जानना जरूरी है

1. मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (तनाव) : इसे आम भाषा में डिप्रेशन कहा जाता है. यह एक बेहद गंभीर मानसिक बीमारी है. यह बीमारी आप कैसा महसूस करते हैं, क्या सोचते हैं और कैसे पेश आते हैं, इन सब पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. इस दौरान एक इनसान महीनों, यहां तक ​​कि सालों तक उदास महसूस कर सकता है.

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2. सिज़ोफ्रेनिया : सिज़ोफ्रेनिया भी एक गंभीर मानसिक बीमारी है. इस दौरान व्यक्ति वास्तविकता की व्याख्या करने में असमर्थ होता है. वे भ्रम, मतिभ्रम और अव्यवस्थित सोच का अनुभव करते हैं. इसके लक्षण काफी गंभीर होते हैं. दवा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और स्वयं सहायता संसाधन सिज़ोफ्रेनिया के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं.

3. चिंता करने का डिसऑर्डर : यह एक तरह का चिंता करने का डिसऑर्डर है, जिसमें जुनूनी विचार और चीजों को एक निश्चित तरीके से देखने की मजबूरी महसूस करने जैसे लक्षम शामिल हैं. जो शिकार होते हैं, वह हर चीज को अलग तरह से देखते हैं. उन्हें ऐसे विचार आते हैं, जिससे वे बेकाबू हो जाते हैं और कुछ चीजें करने के लिए बेताब हो जाते हैं. जैसे कई बार या लगातार हाथ धोना, अपने शरीर को चेक करते रहना, रोजाना एक तरह का रूटीन फॉलो करना इसके लक्षण हैं.

4. लगातार अवसादग्रस्त रहना : इस बीमारी को डिस्थीमिया भी कहा जाता है. इस अवस्था में एक इंसान लगातार अवसाद में रहता है. उसे लगातार उदासी, उत्पादकता में कमी, कम ऊर्जा, निराशा, भूख में बदलाव, कम आत्मविश्वास और खराब आत्मसम्मान की भावना महसूस होती है. दर्दनाक जीवन की घटनाएं, निरंतर चिंता, बायपोलर डिसऑर्डर और यहां तक ​​कि मस्तिष्क में एक प्रकार का रासायनिक असंतुलन लगातार हो रही इस अवसादग्रस्तता का एक प्रमुख कारण हो सकता है.

5. बायपोलर डिसऑर्डर : बायपोलर डिसऑर्डर एक प्रकार की मानसिक बीमारी है, जिसमें अचानक मूड में बदलाव होते हैं. बायपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति कई तरह की भावनाओं से गुजरता है. कभी अत्यधिक उत्तेजना, गहरी उदासी, आत्मघाती विचार, ऊर्जा की कमी का अनुभव होता है. ऐसे लोग अत्यधिक तनाव, शारीरिक बीमारी, दर्दनाक अनुभव और आनुवांशिकी, बायपोलर डिसऑर्डर के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं.

मेंटल हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हैं खाने की ये चीजें

हल्दी, ग्रीन टी, दाल, मछली, लैंब, चिकन, टर्की, बीफ, अंडे, मेवे और बीज (कद्दू और तिल), ज्यादा प्रोटीन वाली सब्जियां (जैसे ब्रोकली और पालक) एक्स्ट्रा-लीन (बेहद कम चर्बी वाला) रेड मीट, पकी हुई ड्राइड बींस और मटर, गहरे हरे रंग वाली पत्तेदार सब्जियां और सूखी खुबानी. ट्रिप्टोफैन युक्त फूड्स, जैसे कि अंडे, सी-फूड, छोले, नट्स और सीड्स (जो सेरोटोनिन बनाने में मदद करते हैं) को हेल्दी कॉर्बोहाइड्रेट्स जैसे कि शकरकंद, ऐमारैंथ (चौलाई), कुट्टू और क्विनोआ (जो मस्तिष्क में ट्रिप्टोफैन संरचरण में मदद करते हैं) के साथ मिलाएं. डार्क चॉकलेट भी सेरोटोनिन बढ़ाता है. ओमेगा 3 से भरपूर फैटी मछली, अखरोट और अलसी के बीज जैसे फूड्स खाएं, क्योंकि यह सेरोटोनिन को बढ़ाकर मूड को अच्छा करने में मदद करता है.

Posted By : Mithilesh Jha

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