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Bokaro News : मंगलचंडी मंदिर में मूलभूत सुविधाओं का टोटा

24 Jan, 2026 11:37 pm
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Bokaro News : मंगलचंडी मंदिर में मूलभूत सुविधाओं का टोटा

Bokaro News : कसमार प्रखंड के पुरनी बगियारी गांव में स्थित है मंदिर, हर मंगलवार को पूजा-अर्चना के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु.

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दीपक सवाल, कसमार, कसमार प्रखंड के पुरनी बगियारी गांव में स्थित मां मंगलचंडी मंदिर पीढ़ियों से लोकआस्था का एक सशक्त और जीवंत केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर केवल स्थानीय श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं, बल्कि इसकी आस्था की डोर दूर-दराज के क्षेत्रों तक मजबूती से बंधी हुई है. विशेषकर प्रत्येक मंगलवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि मां मंगलचंडी के दरबार में सच्चे मन से की गयी मन्नत अवश्य पूरी होती है. इसी आस्था के कारण हर मंगलवार दर्जनों बकरों की बलि दी जाती है और मंदिर परिसर में ही प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा चली आ रही है.

नहीं है चहारदीवारी, साफ-सफाई का भी अभाव

सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर में भक्तों का आना-जाना लगा रहता है. प्रसाद ग्रहण करने में भी देर हो जाती है, जिससे शाम के समय भीड़ बनी रहती है. इतनी गहरी आस्था और प्रसिद्धि के बावजूद मां मंगलचंडी मंदिर आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है. मंदिर परिसर में अब तक चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे परिसर असुरक्षित और अव्यवस्थित प्रतीत होता है. साफ-सफाई की स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक है. प्रसाद खाने के बाद जूठे पत्तल और कचरा परिसर में ही फेंक दिये जाते हैं, जो चारों ओर बिखर जाते हैं. इससे ना केवल मंदिर की पवित्रता प्रभावित होती है, बल्कि गंदगी और दुर्गंध भी फैलती है. पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था न होना श्रद्धालुओं के लिए बड़ी समस्या है. दूर-दूर से आने वाले भक्तों को साफ पानी के लिए भटकना पड़ता है. शौचालय का निर्माण आज तक नहीं हो सका है, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. विद्युतीकरण का कार्य भी अधूरा है. चूंकि प्रसाद ग्रहण करने का क्रम देर शाम तक चलता है, इसलिए रोशनी की समुचित व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है. लंबे समय से हाई मास्ट लाइट या सोलर लाइट लगाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है. जबकि प्रखंड के अन्य कई स्थानों पर लाइटें लगाई गई हैं, मंगलचंडी मंदिर इस सुविधा से वंचित रह गया है. श्रद्धालुओं के बैठने के लिए भी कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं है. यदि परिसर में स्थान-स्थान पर चबूतरे या बैठने के लिए पक्की संरचनाएं बनाई जाएं, तो बुजुर्गों और दूर से आए भक्तों को काफी राहत मिल सकती है.

अब तक नहीं बनी मंदिर संचालन समिति

सबसे गंभीर बात यह है कि आज तक मंदिर संचालन समिति का गठन नहीं हो पाया है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का मानना है कि समिति के अभाव में ही समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं. पूर्व उपप्रमुख ज्योत्सना झा, पूर्व जिला परिषद सदस्य विमल कुमार जायसवाल, पूर्व मुखिया रामसेवक जायसवाल, भाजपा नेता तुलसीदास जायसवाल, समाजसेवी तपन कुमार झा, पंकज कुमार जायसवाल, शुभम झा, घनश्याम महतो, विवेक ठाकुर सहित अन्य लोगों का कहना है कि मंदिर की विशेष मान्यताओं के कारण इसकी ख्याति दूर-दूर तक है, लेकिन उस अनुरूप सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है. इनका मानना है कि यदि एक सशक्त मंदिर संचालन समिति का गठन किया जाये, तो स्वच्छता, सुरक्षा, पेयजल, प्रकाश और अन्य सुविधाओं का विकास संभव है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANAND KUMAR UPADHYAY

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By ANAND KUMAR UPADHYAY

ANAND KUMAR UPADHYAY is a contributor at Prabhat Khabar.

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