सात साल से अकेलेपन का दंश झेल रही ‘गंगा’

Updated at : 10 Sep 2019 2:28 AM (IST)
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सात साल से अकेलेपन का दंश झेल रही ‘गंगा’

मैत्री बाग-भिलाई से 22 जनवरी 2012 को जैविक उद्यान लाया गया था बोकारो : सात साल से अकेलेपन का दंश झेल रही ‘गंगा’ को जीवनसाथी नहीं मिला. बाघिन के साथी बाघ ‘सतपुड़ा’ की मृत्यु के बाद बाघिन अकेली है. गंगा और सतपुड़ा को मैत्री बाग-भिलाई से 22 जनवरी 2012 को जैविक उद्यान लाया गया था. […]

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मैत्री बाग-भिलाई से 22 जनवरी 2012 को जैविक उद्यान लाया गया था

बोकारो : सात साल से अकेलेपन का दंश झेल रही ‘गंगा’ को जीवनसाथी नहीं मिला. बाघिन के साथी बाघ ‘सतपुड़ा’ की मृत्यु के बाद बाघिन अकेली है. गंगा और सतपुड़ा को मैत्री बाग-भिलाई से 22 जनवरी 2012 को जैविक उद्यान लाया गया था. 25 अगस्त 2012 को अपने पुरुष साथी सतपुड़ा की मृत्यु के बाद बाघ परिवार में सिर्फ एक गंगा ही जीवित है. उद्यान प्रबंधन ने गंगा के जीवनसाथी के लिए काफी प्रयास किया, मगर सफलता हाथ नहीं पायी. बाघिन गंगा 17 वर्ष की है.
वर्ष 2012 में भिलाई से आने के बाद गंगा और सतपुड़ा बोकारो के माहौल व मौसम को में तुरंत ढल गये. दोनों को बोकारो भा गया. कुछ दिनों बाद ही गंगा ने उद्यान परिवार को ‘खुशखबरी’ सुनायी. गंगा ने तीन शावकों को जन्म दिया. लेकिन, दुर्भाग्य से सभी शावक जिंदा नहीं रह पाये. तीनों की मौत जन्म के कुछ दिन बाद ही हो गयी. शावकों की मौत के बाद बाघ सतपुड़ा की भी मृत्यु 2012 में ही हो गयी. तब से लेकर आज तक गंगा एकाकी जीवन व्यतीत कर रही है. उसे कोई जीवनसाथी नहीं मिला.
उद्यान में गंगा की ही दहाड़ : गंगा के जीवनसाथी की तलाश के लिए उद्यान प्रबंधन ने भरसक प्रयास किया. झारखंड, छत्तीसढ़, उत्तर प्रदेश, आंध प्रदेश सहित आधा दर्जन से अधिक राज्यों के जू से संपर्क किया गया. चिठ्ठी-पत्री भी गयी. लेकिन, गंगा का जीवनसाथी नहीं मिल पाया. इस कारण, बाघ परिवार में सिर्फ गंगा की ही दहाड़ जैविक उद्यान में सुनायी पड़ती है. उद्यान प्रबंधन के अनुसार, अब गंगा की उम्र हो गयी है. इसलिए उसे जीवनसाथी की जरूरत नहीं है. अमूमन बाघों का जीवन काल 18 वर्ष का ही होता है.
सफेद खूबसूरत बाघिन गंगा : 2014-15 में जैविक उद्यान प्रबंधन ने सफेद खूबसूरत बाघिन गंगा के अकेलेपन को देखते हुए उसके लिए साथी की तलाश करने का प्रयास किया था, लेकिन उसमें सफल नहीं रहा. अब गंगा बूढ़ी हो गयी है. दांत उम्र के साथ चले गये. इससे खाने में उसे तकलीफ होती है. इसलिए बकरी के मांस के छोटे-छोटे टुकड़े कर दिया जाता है. उद्यान प्रबंधन की सजगता व सक्रियता से गंगा स्वस्थ है. गंगा को बाड़े के अंदर घूमते हुए व पानी के कुंड में बैठे हुए देखना आगंतुकों को पसंद आता हैं.
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