बोकारो : आंदोलन व आश्वासन के चक्कर में बीत गया साल
Author Prabhat khabar digital desk
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रंजीत कुमार, बोकारो : जिले में वर्ष 2018 में स्वास्थ्य व्यवस्था में कुछ खास परिवर्तन नहीं हुआ. साल घोषणा व आश्वासन के बीच बीत गया. ब्लड बैंक शुरू नहीं होने से कई तरह के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे. खून की कमी होने पर मरीज को वापस जाना पड़ रहा है. ब्लड बैंक संचालन के […]
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रंजीत कुमार, बोकारो : जिले में वर्ष 2018 में स्वास्थ्य व्यवस्था में कुछ खास परिवर्तन नहीं हुआ. साल घोषणा व आश्वासन के बीच बीत गया. ब्लड बैंक शुरू नहीं होने से कई तरह के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे. खून की कमी होने पर मरीज को वापस जाना पड़ रहा है. ब्लड बैंक संचालन के लिए जिले में दो चिकित्सकों पर लाखों रु खर्च कर प्रशिक्षण दिलाया गया.
एक तकनीशियन भी तैनात हो गया. अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या लगभग 500 के आसपास होती है. सामान्य, नेत्र, दंत, शिशु, चर्म, स्त्री एवं प्रसूति रोग के मरीज होते हैं. मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन डॉ पिंकी पाल कर रही हैं.
सीएम स्तर की घोषणा भी रही अप्रभावी
पिछले कई साल से नर्सिंग प्रशिक्षण शुरू करने का सिर्फ आश्वासन ही चक्कर काट रहा था. इस वर्ष भी सीएम स्तर से घोषणा की गयी. उपनिदेशक स्तर के अधिकारी भी बोकारो आये. नर्सिंग प्रशिक्षण के लिए बने कॉलेज भवन का निरीक्षण किया गया. कागजी कार्रवाई भी सिविल सर्जन ने की. बावजूद इसके कुछ नहीं हुआ.
स्थायीकरण की मांग को ले झारखंड अनुबंध कर्मचारी संघ के बैनर तले अनुबंधित स्वास्थ्य कर्मी लगातार आंदोलन पर रहे. इस बार भी संघ को आश्वासन मिला. सुरक्षा को ले चिकित्सक भी आंदोलन करते रहे, पर हथियारबंद सुरक्षा गार्ड सदर अस्पताल में मुहैया नहीं करवाया गया. आउटसोर्सिंग से सरकारी अस्पतालों में कर्मियों की कमी पूरी की जा रही है.
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