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लाखों की लगी पूंजी, कभी कभी बोहनी पर भी आफत

बोकारो : लाखों की पूंजी लगायी…कभी-कभी बोहनी पर भी आफत! जी हां, बोकारो के मुख्य बाजार सिटी सेंटर की स्थिति यही है. बाजार में दिन-ब-दिन ग्राहकों की संख्या कम होती जा रही है. अधिक दुकान होने की वजह से ग्राहक बंट जा रहे हैं. सेक्टर-03 में बोकारो मॉल के खुलने के बाद बाजार के ग्राहक […]

बोकारो : लाखों की पूंजी लगायी…कभी-कभी बोहनी पर भी आफत! जी हां, बोकारो के मुख्य बाजार सिटी सेंटर की स्थिति यही है. बाजार में दिन-ब-दिन ग्राहकों की संख्या कम होती जा रही है. अधिक दुकान होने की वजह से ग्राहक बंट जा रहे हैं. सेक्टर-03 में बोकारो मॉल के खुलने के बाद बाजार के ग्राहक पहले ही कम हो गये हैं.
सिटी सेंटर के दुकानदारों का मानना है कि बोकारो मॉल के खुलने के बाद बाजार में ग्राहकों की संख्या में कमी आयी है. अब रही-सही कसर आये दिन खुलने वाले नये दुकान पूरा कर रहे हैं. बोकारो की आबादी बढ़ने के बजाय घट रही है. ऐसे में खरीदारी कौन करेगा? बाजार के दुकानदारों में बताया : कई बार ऐसा होता है कि बोहनी तक नहीं हो पाती है.
मंदा चल रहा है बाजार का धंधा
सिटी सेंटर में छोटी-बड़ी दुकान मिला कर लगभग 2500 दुकान है. दुकानदारों ने बताया : पहले बोकारो मॉल और उसके बाद जीएसटी… बाजार की स्थिति ठीक नहीं है. धंधा मंदा चल रहा है. अभी कुछ स्थिति सुधरी है, लेकिन अब वह बाजार नहीं रहा. एक समय जहां बोकारो स्टील प्लांट में 50 से अधिक , एचएससीएल में 25 से हजार से अधिक व बियाडा में 10 हजार से अधिक मजदूर काम करते थे. लेकिन, आज बीएसएल में लगभग 13 हजार, एचएससीएल में लगभग 1000 व बियाडा में 500 कर्मी कार्यरत हैं. मतलब, बोकारो की आबादी कम हो गयी है. इसका प्रतिकूल प्रभाव सिटी सेंटर पर भी पड़ा है. बिक्री में कमी आयी है. ग्राहक कम हो गये हैं.
नया उद्योग-धंधा नहीं आया
बोकारो की आबादी मुख्य रूप से बीएसएल पर भी निर्भर है. बीएसएल भी लगातार दो वर्ष से घाटा में चल रहा था. अब थोड़ी बहुत स्थिति अच्छी हुई है. इसके अलावा बियाडा की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. एचएससीएल में भी कर्मियों की संख्या कम होती जा रही है. बोकारो में नया उद्योग-धंधा नहीं आया है और जो पुराने हैं, उनकी स्थिति भी अच्छी नहीं है. इस कारण नया रोजगार पैदा नहीं हो रहा है.
विद्यार्थियों की संख्या घटी
सिटी सेंटर बाजार बाहर से आने वाले विद्यार्थियों से भी गुलजार रहता है. लेकिन, हर साल की भांति इस बार बोकारो में बाहरी विद्यार्थी नहीं आये है. सिटी सेंटर के एक दर्जन से अधिक ब्याज व गर्ल्स हॉस्टल खाली रह गये हैं. इसका असर भी बिक्री पर पड़ा है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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