15 करोड़ रुपया खर्च, चार करोड़ वापस

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बोकारो : एससी-एसटी व बीसी विद्यार्थी को प्रारंभिक व उच्च शिक्षा के लिए कल्याण विभाग की ओर से छात्रवृत्ति दी जाती है. कुछ को छात्रवृत्ति मिल जाती है, तो कुछ को नसीब नहीं होती है. हालांकि सरकार कहती है कि योजना का लाभ देने में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाती है. बोकारो में […]

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बोकारो : एससी-एसटी व बीसी विद्यार्थी को प्रारंभिक व उच्च शिक्षा के लिए कल्याण विभाग की ओर से छात्रवृत्ति दी जाती है. कुछ को छात्रवृत्ति मिल जाती है, तो कुछ को नसीब नहीं होती है. हालांकि सरकार कहती है कि योजना का लाभ देने में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाती है. बोकारो में सत्र 2017-18 में 15 करोड़ से अधिक की राशि विद्यार्थी को छात्रवृत्ति के रूप में दी गयी. वहीं चार करोड़ की राशि लाभुक को नहीं मिल सकी. विभाग ने राशि सरेंडर कर दी.
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स्कूल व कॉलेज के लिए मिलती है छात्रवृत्ति : स्कूल व कॉलेज की पढ़ाई के लिए विद्यार्थी को छात्रवृत्ति दी जाती है. जिला में 81931 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है. स्कूल (प्राथमिक से प्री मैट्रिक) के लिए 83,164,000 रुपये की छात्रवृत्ति 76659 विद्यार्थी को मिली. वहीं कॉलेज लेवल की पढ़ाई के लिए 5272 विद्यार्थी को 61091508 रुपये की छात्रवृत्ति मिली. स्कूल के लिए 32,678,500 रुपया की राशि वापस लौट गयी. वहीं कॉलेज स्तर पर 17,623,017 रुपया लौट गया.
12690 विद्यार्थी को मिली साइकिल
कल्याण विभाग की ओर विद्यार्थी को आवागमन के लिए साइकिल भी दी जाती है. 2017-18 वित्तीय वर्ष में 12690 लाभुक को साईकिल दी गयी. इसके लिए विभाग ने तीन करोड़ 80 लाख रुपया खर्च करना पड़ा. हालांकि साइकिल में भी 2259 विद्यार्थी की राशि विभाग को लौटानी पड़ी. राशि का भुगतान विद्यार्थी के बैंक अकाउंट में सीधे ट्रांसफर किया जाता है.
आखिर क्यों नहीं मिला लाभ
विभाग की माने तो आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन हो गयी. ऑनलाइन प्रोसेस में विद्यार्थी की ओर से गलती की गुंजाइश से इन्कार नहीं किया जा सकता. विभाग की ओर से हर किसी के लिए पैसा निर्गत किया जाता है. लेकिन, बैंक अकाउंट नंबर की गलती समेत अनेक अनुपलब्धता के कारण पैसा निर्गत नहीं हो पाता है. सिस्टम ऑनलाइन हो चुका है. इस कारण आवेदन की जानकारी विभाग नहीं बता सकता. विद्यार्थी व संबंधित को ही आवेदन करना होता है. सुधार का विकल्प होता है, लेकिन तय तिथि के बाद कोई सुनवाई नहीं होती है.
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