39 हजार मनरेगा श्रमिकों को 45 दिनों से नहीं मिली है मजदूरी

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चास : बोकारो जिले में मनरेगा में आवंटन नहीं होने से मजदूरों को 45 दिनों से मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाया है. इस कारण मजदूरों ने काम करना छोड़ दिया है. इससे मनरेगा से संचालित अधिकांश योजनाएं बंद होने लगी हैं. गौरतलब हो कि राशि के अभाव में मार्च व 15 अप्रैल तक मनरेगा […]

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चास : बोकारो जिले में मनरेगा में आवंटन नहीं होने से मजदूरों को 45 दिनों से मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाया है. इस कारण मजदूरों ने काम करना छोड़ दिया है. इससे मनरेगा से संचालित अधिकांश योजनाएं बंद होने लगी हैं. गौरतलब हो कि राशि के अभाव में मार्च व 15 अप्रैल तक मनरेगा मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाया है.
अभी तक जिले में 39 हजार मजदूरों का तीन करोड़ 93 लाख रुपये मजदूरी के रूप में बकाया है. एक करोड़ 90 लाख सामग्री मद में राशि बकाया है. गौरतलब हो कि बोकारो जिले में तीन लाख 39 हजार 118 जॉब कार्डधारी मनरेगा मजदूर हैं. मार्च व 15 अप्रैल तक 39 हजार मजदूरों का दो लाख 33 हजार मानव दिवस सृजित हुआ है. जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न प्रखंड क्षेत्रों के एक लाख 90 हजार 351 जॉब कार्डधारियों ने रोजगार की मांग की है. मार्च माह में 28 लाख 27 हजार 882 पूरे जिले में मानव दिवस सृजित किये गये. वहीं 15 अप्रैल तक 40152 मानव दिवस सृजित किये गये.
सबसे अधिक नावाडीह प्रखंड में बकाया है मजदूरी : जिले के नावाडीह प्रखंड में कार्यरत मनरेगा मजदूरों का 78 लाख 59 हजार रुपये मजदूरी बकाया है. 35 लाख 85 हजार रुपये सामग्री मद में भुगतान करना है. चंद्रपुरा प्रखंड क्षेत्र में सबसे कम 26 हजार 544 रुपये मजदूरी बकाया है. बेरमो में 71 लाख मजदूरी व एक लाख रुपये सामग्री, चंदनकियारी में 47 लाख 11 हजार मजदूरी व 45 लाख 43 हजार सामग्री, चास में 48 लाख 91 हजार मजदूरी व सामग्री में 38 लाख 80 हजार रुपये, गोमिया में 70 लाख 30 हजार मजदूरी व सामग्री में 18 लाख 72 हजार, जरीडीह में 25 लाख रुपये मजदूरी व 69 लाख 68 हजार सामग्री, कसमार में 48 लाख मजदूरी व 32 लाख 52 हजार रुपये सामग्री, पेटरवार में 67 लाख 30 हजार मजदूरी व 10 लाख 82 हजार सामग्री मद में बकाया है.
रोजगार सेवक नहीं जा रहे पंचायत : मनरेगा मजदूरों को दो माह से मजदूरी का भुगतान नहीं होने से रोजगार सेवकों को अपमानित होना पड़ रहा है. मजदूरों रोजगार सेवकों से लगातार मजदूरी की मांग की जा रही है. इस कारण रोजगार सेवक पंचायत जाना छोड़ दिये हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर आधा दर्जन से अधिक रोजगार सेवकों ने बताया कि राशि के अभाव में मनरेगा से संचालित कुआं, मुर्गी व अन्य शेड, आवास योजना, डोभा सहित अन्य कार्य धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं. सामग्री देने वाले अभिकर्ता भी बकाया राशि भुगतान नहीं होने पर सामग्री देना भी बंद कर दिया है.
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