निगम व जनप्रतिनिधि करते हैं उपेक्षा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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चास : तेलीडीह बस्ती से आदर्श कॉलोनी तक की सड़क वर्ष 1990 में बीएसएल प्रबंधन की ओर से बनायी गयी थी, लेकिन इसके बाद फिर कभी ना तो सड़क की मरम्मत की गयी और ना ही दुबारा इसका निर्माण किया गया. चास के विस्थापित गांवों में शामिल तेलीडीह बस्ती शुरू से निगम व स्थानीय जनप्रतिनिधियों […]
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चास : तेलीडीह बस्ती से आदर्श कॉलोनी तक की सड़क वर्ष 1990 में बीएसएल प्रबंधन की ओर से बनायी गयी थी, लेकिन इसके बाद फिर कभी ना तो सड़क की मरम्मत की गयी और ना ही दुबारा इसका निर्माण किया गया. चास के विस्थापित गांवों में शामिल तेलीडीह बस्ती शुरू से निगम व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के उपेक्षा का शिकार है. जबकि तेलीडीह बस्ती, आदर्श कॉलोनी निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 29 में शामिल हैं. ग्रामीणों ने बताया कि कई बार स्थानीय पार्षद के माध्यम से निगम कार्यालय में आवेदन दिया, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला.
बीएसएल ने बनायी थी कालीकृत सड़क
तेलीडीह बस्ती को बोकारो इस्पात संयंत्र प्रबंधन की ओर से विस्थापित नंबर दो (जिनकी सिर्फ जमीन गयी) की सूची में शामिल किया गया है. बीएसएल प्रबंधन की ओर से तेलीडीह बस्ती के लोगों से जमीन लेकर एक नंबर विस्थापितों (जिनका घर व जमीन प्रबंधन ने हस्तांतरण किया) को बसाने का काम किया था. इसी दौरान बीएसएल प्रबंधन ने तेलीडीह बस्ती को विस्थापित (दो नंबर) गांव का दर्जा दिया. इस नजरिये से बीएसएल प्रबंधन ने यहां सड़क का निर्माण कराया. दुबारा 1990 में कालीकृत सड़क का निर्माण किया गया. इसके बाद फिर कभी यहां ना तो सड़क का निर्माण कराया गया और ना ही नाली का. इस कारण यहां बारिश व घरों का गंदा पानी बीच सड़क पर बहता है. वार्ड के पूर्व पार्षदों से लेकर वर्तमान पार्षद ने भी सड़क निर्माण को लेकर गंभीरता नहीं दिखायी.
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