बौद्धिक राजधानी बोकारो का साहित्यिक माहौल रहा जीवंत
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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वर्षावलोकन-2017 : बोकारो की साहित्यिक हलचल अच्युतानंद को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार दे गया सुखद झोंका शनै: शनै: वर्ष भर जारी रहीं साहित्यिक गतिविधियां बोकारो : बोकारो की पहचान इस्पात नगरी के रूप में तो है ही, इसे हाल के दिनों में साहित्य के क्षेत्र में रचनात्मक सक्रियताओं ने राष्ट्रीय फलक पर एक अलग पहचान […]
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वर्षावलोकन-2017 : बोकारो की साहित्यिक हलचल
अच्युतानंद को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार दे गया सुखद झोंका
शनै: शनै: वर्ष भर जारी रहीं साहित्यिक गतिविधियां
बोकारो : बोकारो की पहचान इस्पात नगरी के रूप में तो है ही, इसे हाल के दिनों में साहित्य के क्षेत्र में रचनात्मक सक्रियताओं ने राष्ट्रीय फलक पर एक अलग पहचान दी है. अगस्त में युवा कवियों को दिया जानेवाला भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार अच्युतानंद मिश्र को देने की घोषणा झारखंड-बिहार के साहित्यिक प्रदेश को एक सुखद झोंका दे गयी. हिंदी संसार में कथाकार प्रह्लाद चंद्र दास व खोरठा जगत में आकाश खूंटी किसी परिचय के मोहताज नहीं.
अंतर्भाषायी आयोजन ने दी चर्चा : बोकारो की साहित्यिक संस्थाओं ने वर्ष भर अपनी सक्रियताओं से नगर के साहित्यिक माहौल को जीवंत बनाये रखीं. वर्ष 2017 में भी शनै: शनै: साहित्यिक गतिविधियां चलती रहीं. साहित्य अकादमी-नयी दिल्ली व मिथिला सांस्कृतिक परिषद-बोकारो के संयुक्त तत्वावधान में ‘मैथिली-ओड़िया : परस्पर संबंध एवं प्रभाव’ विषयक परिसंवाद व मैथिली कवि-सम्मेलन का आयोजन मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल-सेक्टर 4 के सभागार में हुआ. इसमें बाहर से आमंत्रित व स्थानीय ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों की भागेदारी ने आयोजन को एक ऊंचाई दी. साहित्यलोक की रचना गोष्ठियों की निरंतरता ने साहित्यिक माहौल को ऊर्जा प्रदान किया. ज्योतिर्मयी दे (राणा) व भावना वर्मा की ख्याति राष्ट्र स्तर पर बढ़ी.
संस्थाओं ने निबाहा रचनात्मक धर्म : मैथिली रचनाकारों की प्रमुख संस्था ‘साहित्यलोक’ की मासिक रचनागोष्ठी, मिथिला सांस्कृतिक परिषद की मणिपद्म जयंती पर बहुभाषी कवि सम्मेलन, मिथिला सांस्कृतिक परिषद् के स्वर्ण जयंती पर बोकारो क्लब में आयोजित तीन दिवसीय स्वर्णिम मिथिला महोत्सव सह विद्यापति स्मृति पर्व समारोह में मैथिली कवि सम्मेलन, जनवादी लेखक संघ की मासिक गोष्ठियों का आयोजन, खोरठा साहित्य की कुछ उल्लेखनीय गतिविधियों के अलावा अखिल भारतीय साहित्य परिषद की कुछ गोष्ठियों का आयोजन व राजभाषा पक्ष पर बीएसएल की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन स्मरण करने योग्य हैं. ‘घुनपोका’ साहित्य पत्रिका की ओर से आयोजित कुछ आयोजन भी उल्लेखनीय रहा.
इनकी सक्रियता ने दी जीवंतता : विभिन्न साहित्यिक गोष्ठियों में साहित्यकार बुद्धिनाथ झा, सुखनंदन सिंह ‘सदय’, विनय कुमार मिश्र, दयाकांत झा, विजय शंकर मल्लिक ‘सुधापति’, प्रह्लाद चंद्र दास, महेश मेहंदी, भावना वर्मा, तुलानंद मिश्र, उदय कुमार झा, राम नारायण उपाध्याय, भुटकुन झा, दिलकश बोकारवी, डॉ परमेश्वर भारती, अमीरी नाथ झा ‘अमर’, अशोक श्रीवास्तव, राजीव कंठ, अमन कुमार झा, सुनील मोहन ठाकुर, अरुण कुमार पाठक, श्वेता झा, उषा झा, डॉ रणजीत कुमार झा, सतीश चंद्र झा, हरिमोहन झा, रणधीर चंद्र गोस्वामी, डॉ नर नारायण तिवारी, डॉ नरेंद्र कुमार राय, शिवनाथ प्रमाणिक, प्रदीप कुमार दीपक, देवेंद्र प्रसाद कंधवे, ललन तिवारी, कुमार सत्येंद्र, त्रिलोकी नाथ टंडन, प्रो. पीएल वर्णवाल, गिरिधारी गोस्वामी उर्फ आकाश खूंटी, बंशी लाल बंशी, मनपूरन गोस्वामी, वेंकटेश शर्मा, सुबोध कुमार शैलांश, अशोक मिश्र, डॉ सरिता सिन्हा, डॉ रंजना श्रीवास्तव, ज्योति वर्मा, कस्तूरी सिन्हा, मीनाक्षी अधीर, गंगेश कुमार पाठक, सत्यदेव तिवारी आदि की निरंतर सक्रिय सहभागिता रही.
वर्ष 2017 की प्रमुख साहित्यिक गविधियां
साहित्यलोक की रचना गोष्ठियों की निरंतरता ने साहित्यक माहौल को ऊर्जा प्रदान किया
साहित्यकार ज्योतिर्मयी दे (राणा) व भावना वर्मा की ख्याति राष्ट्र स्तर पर बढी
मिथिला सांस्कृतिक परिषद की मणिपद्म जयंती पर बहुभाषी कवि सम्मेलन
मिथिला सांस्कृतिक परिषद की स्वर्ण जयंती पर बोकारो क्लब में तीन दिवसीय स्वर्णिम मिथिला महोत्सव सह विद्यापति स्मृति पर्व समारोह में मैथिली कवि सम्मेलन
जनवादी लेखक संघ की मासिक गोष्ठियों का आयोजन
खोरठा साहित्य की कुछ उल्लेखनीय गतिविधियां
अखिल भारतीय साहित्य परिषद की कुछ गोष्ठियों का आयोजन
राजभाषा पक्ष पर बीएसएल की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन
‘घुनपोका’ साहित्य पत्रिका की ओर उल्लेखनीय आयोजन
बोकारो की झोली में खास
साहित्य अकादमी व मिथिला सांस्कृतिक परिषद, बोकारो के संयुक्त तत्वावधान में ‘मैथिली-ओड़िया : परस्पर संबंध एवं प्रभाव’ विषयक परिसंवाद का आयोजन जाते हुए साल का खास आयोजन रहा. इसी तरह हिंदी व खोरठा कथाकार प्रह्लाद चंद्र दास ‘पुटूस के फूल’, ‘पराये लोग’ के बाद अपने तीसरे कथा संग्रह रश्मि प्रकाशन से प्रकाशित ‘आग ही आग’ के साथ उपस्थित हुए. इससे भी बड़ी और गौरवशाली उपलब्धि यह कि प्रह्लाद की कहानी को झारखंड सरकार ने पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय किया है. बोकारो के ही बेहद मितभाषी अच्युतानंद मिश्र को उनकी कविता ‘बच्चे धर्म युद्ध लड़ रहे हैं’ के लिए ‘भारत भूषण अग्रवाल कविता पुरस्कार 2017’ दिया गया है.
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