कौशल विकास के नाम पर मत्स्य भ्रूण हत्या
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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चास. भोलूर बांध तालाब की नर्सरी की जगह बना दिया गया कौशल विकास केंद्र बोकारो : चास स्थित भोलूर बांध तालाब मछली उत्पादन के नजरिये से मत्स्य विभाग बोकारो का महत्वपूर्ण स्थल. प्रतिवर्ष साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक मछली उत्पादन होता था. मत्स्य विभाग का यह ऐसा तालाब था, जहां तीन नर्सरी भी बनायी […]
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चास. भोलूर बांध तालाब की नर्सरी की जगह बना दिया गया कौशल विकास केंद्र
बोकारो : चास स्थित भोलूर बांध तालाब मछली उत्पादन के नजरिये से मत्स्य विभाग बोकारो का महत्वपूर्ण स्थल. प्रतिवर्ष साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक मछली उत्पादन होता था. मत्स्य विभाग का यह ऐसा तालाब था, जहां तीन नर्सरी भी बनायी गयी थी. मतलब तालाब के बगल में ही मछली का बीज भी डाला जाता था. अब यह इतिहास मात्र बन कर रह गया है. क्योंकि, अब तालाब की नर्सरी का दर्शन करना तक मुश्किल हो गया है. दरअसल, चास नगर निगम की ओर से नर्सरी की जगह पर कौशल विकास केंद्र का निर्माण हो रहा है़ मत्स्य विभाग ने भोलूर बांध को सरकारी आदेश के बाद चास नगर निगम को सौंप दिया है.
लेकिन, बंदोबस्ती के कारण भोलूर बांध 31 मार्च 2019 तक चास अंचल मत्स्यजीवी सहयोग समिति व आंशिक रूप से मत्स्य विभाग के अंतर्गत आता है. इस कारण निगम बांध के पास कोई निर्माण कार्य नहीं कर सकता है. जब नगर निगम की ओर से कौशल विकास केंद्र निर्माण की बात कही गयी, तो मत्स्य विभाग ने निर्माण रोकने की बात कही. लेकिन, निगम ने विभाग की एक नहीं सुनी. कहीं न कहीं कौशल विकास के नाम पर मत्स्य भ्रूण की हत्या कर दी गयी.
अगस्त 2017 में हैंड ओवर, नवंबर 2016 में शिलान्यास
मत्स्य विभाग ने 09 अगस्त 2017 को भोलूर बांध तालाब को चास नगर निगम को सौंप दिया. लेकिन, नगर निगम की ओर से कौशल विकास केंद्र का शिलान्यास नवंबर 2016 में ही कर दिया गया था. मतलब, हैंड ओवर के पहले ही कौशल विकास केंद्र का शिलान्यास कार्य हो गया था. इतना ही नहीं बांध के ईदगिर्द नगर निगम की ओर से कचरा भी डंप किया जाता है.
तालाब का 40 प्रतिशत भूमि पर अवैध कब्जा
भोलूर बांध 7.75 एकड़ क्षेत्रफल पर फैला है. इनमें से 3.50 एकड़ जमीन जलक्षेत्र में है. मत्स्य विभाग की माने तो कुल भू-भाग का 28 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल का अतिक्रमित हो चुका है. तालाब को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए विभाग ने चास सीओ व चास थाना को पत्र लिखा है. पत्र 28 अक्तूबर 2015 व 28 नवंबर 2016 को लिखा गया है. अतिक्रमण में नगर निगम की हिस्सेदारी को नकारा नहीं जा सकता है.
शिलान्यास के दौरान या निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान ही मत्स्य विभाग को विरोध दर्ज कराना चाहिए था. अभी तक विरोध दर्ज नहीं हुआ है. यदि विभाग की ओर से कोई जानकारी इस संबंध में मिलती है, तो नियम के अनुसार कार्रवाई की जायेगी.
जेपी यादव, कार्यपालक पदाधिकारी – चास नगर निगम
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