‘समय को साध लिया तो जीवन सफल हो जायेगा’
चास: समय सबसे बड़ा बलवान है. इससे बढ़कर कोई नहीं. इसकी कीमत जिसने जान ली, समझ ली और साध लिया, उसका जीवन सफल हो जाता है. यह कहना है जैन श्वेताम्बर तेरापंथ संप्रदाय के 11वें धर्मगुरु आचार्य श्री महाश्रमणजी की शिष्या समणी निर्देशिका परिमल प्रज्ञाजी का. गुरुवार को गुजरात काॅलोनी स्थित गुजरात भवन में आयोजित […]
चास: समय सबसे बड़ा बलवान है. इससे बढ़कर कोई नहीं. इसकी कीमत जिसने जान ली, समझ ली और साध लिया, उसका जीवन सफल हो जाता है. यह कहना है जैन श्वेताम्बर तेरापंथ संप्रदाय के 11वें धर्मगुरु आचार्य श्री महाश्रमणजी की शिष्या समणी निर्देशिका परिमल प्रज्ञाजी का. गुरुवार को गुजरात काॅलोनी स्थित गुजरात भवन में आयोजित विशेष प्रवचन सत्र में उन्होंने यह बातें कही. समणीजी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को समय की महत्ता विस्तार से समझायी.
कहा कि मानव जीवन का प्रत्येक पल, क्षण अपने-आप में अमूल्य है. इसे नष्ट नहीं करना चाहिये. जिसने समय को नष्ट किया, उसे समय नकारात्मक परिणाम जरूर देता है. इसके ठीक विपरीत समय को साधने वाला ही जीवन का सच्चा साधक कहलाता है. इंसान समाज और दुनिया सुधारने की बात तो करता है, लेकिन स्वयं का प्रश्न आता है तो पीछे हट जाता है.
यदि व्यक्तिगत स्तर पर सुधार हो जाय तो समाज, देश व दुनिया में स्वतः बदलाव आ जायेगा. इसके साथ ही, नैतिकता के निर्वहन का भी संदेश दिया. चास-बोकारो तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद व तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में प्रत्येक दिन चास के कुलदीप टाकीज काम्प्लेक्स में सुबह-शाम प्रवचन के अलग-अलग सत्र आयोजित किये जा रहे हैं. समणी परिमल प्रज्ञाजी के साथ समणी रश्मि प्रज्ञा व समणी मर्यादा प्रज्ञा भी पधारी हैं.
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