अबकी दिवाली मेड इन इंडिया वाली...

Updated:
विज्ञापन

बोकारो: स्वदेशी अपनाओ-विदेशी भगाओ मुहिम का असर बोकारो में साफ महसूस किया जा सकता है. दिवाली के उमंग के बीच स्वदेशी अपनाने का जुनून बोकारो में आसानी से देखा जा सकता है. दिवाली का मौका सजावट का बहाना लेकर आता है. इस बात को बाजार बखूबी जानता है. लेकिन, स्वदेशी आंदोलन के कारण इस बार […]

विज्ञापन

बोकारो: स्वदेशी अपनाओ-विदेशी भगाओ मुहिम का असर बोकारो में साफ महसूस किया जा सकता है. दिवाली के उमंग के बीच स्वदेशी अपनाने का जुनून बोकारो में आसानी से देखा जा सकता है. दिवाली का मौका सजावट का बहाना लेकर आता है. इस बात को बाजार बखूबी जानता है. लेकिन, स्वदेशी आंदोलन के कारण इस बार दुकानदारों ने विदेशी सामग्री की खेप नहीं मंगायी है. सेक्टर चार के कई अस्थायी दुकानों में गंगा की मिट्टी की मूर्ति का फ्लैक्स चिपकाया गया है.

झालर से लेकर रंगोली रेडिमेड
दिवाली की सजावट घर के दरवाजे से शुरू होती है. मुख्य द्वार पर रंगोली बना कर लक्ष्मी प्रवेश का प्रचलन है. लेकिन, समयाभाव में रंगोली बनाने की फुरसत कहां. इस समस्या के निदान के लिए बाजार में रेडिमेड रंगोली मेकर की धूम है. धोतीनूमा जाली में अंकित विभिन्न डिजाइन वाली प्लेट में से स्पेशल रंग गुजारने के बाद रंगोली धरातल पर उतर आयेगी. लुधियाना मेड रेडिमेड रंगोली मेकर की कीमत 80 रुपया रखी गयी है. वहीं स्पेशल रंग 10 व 20 रुपया में मिल रहा है. इसके अलावा कई तरह का झालर भी लोगों को आकर्षित कर रहा है. दिल्ली मेड झालर की कीमत 100 रुपया से 4500 रुपया तक है. सजावटी बाजार का 90 प्रतिशत हिस्सा स्वदेशी है.
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति अनमोल
दीवाली में लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है. लगभग हर घर में लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है. बुधवार को मूर्ति खरीदारों की भीड़ बाजार में रही. बाजार में 80 रुपया से लेकर 2500 रुपया तक की मूर्ति की बिक्री हुई. दुकानदारों की माने तो छोटे साइज की मूर्ति की मांग ज्यादा है. लोग लक्ष्मी व गणेश की मूर्ति के अलावा मां काली (तारापीठ) की मूर्ति की डिमांड भी कर रहे हैं. दुकानदारों की माने तो इस बार की मूर्ति स्वदेश की मिट्टी की बनी हुई है. लोग खरीदने से पहले पूरी पड़ताल कर रहे हैं.
दीया-दीपक-दीपावली
दीया के बिना दीवाली की कल्पना नहीं की जा सकती है. शहर में कई जगह अस्थायी दुकान लगाकर दीया की बिक्री हो रही है. दीया के अलावा टेराकोटा डिजाइनर कलाकृति भी लोगों को आकर्षित कर रही है. मिट्टी के रेडिमेड घरौंदा भी खूब पसंद किया जा रहा है. मिट्टी के डोर बैंगल, फूलदानी, विभिन्न जानवर, गुल्लक, देवी-देवता की मूर्ति समेत कई आकृति की मांग की जा रही है. शहर में 10 रुपया प्रति दर्जन के हिसाब से दीया बिक रहा है. वहीं अन्य उत्पादों की कीमत 50 से 1500 रुपया व साइज के अनुसार तय की गयी है.
पटाखा में सोशल मीडिया की धूम
सोशल मीडिया का शोर समूचे विश्व में है. अब सोशल मीडिया की गूंज पटाखा के रूप में सुनायी देगी. बाजार में सोशल मीडिया नाम का पटाखा ध्यानाकर्षण कर रहा है. मसलन फेसबुक पटाखा की खूबी है कि आसमान में स्टेटस की तरह रंग बदलेगा. वहीं ट्वीटर पटाखा आवाज के साथ रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरेगा. वाट्सअप चटाई बम ग्रुप बनाने का मौका देगा. इसी पटाखा की कीमत लरी व साउंड के अनुसार 1000 से 10000 रुपया के बीच है. हालांकि अभी भी मुर्गा छाप के पटाखा की बिक्री ज्यादा देखी जा रही है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola