बिजली रानी कब आयेगी-कब जायेगी, पता नहीं
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बोकारो: बोकारो जिस उद्देश्य के लिए बना था. उससे कोसो दूर भाग गया है. शहर में बिजली के दर्शन मात्र हो रहे हैं. ऐसे में व्यवसाय करना नुकसान का सौदा साबित हो रहा है. ऐसा ही दर्द बोकारो के दुकानदारों का है. बिजली की समस्या दुकानदारों के लिए सिरदर्द बन गयी है. औसतन हर दिन […]
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बोकारो: बोकारो जिस उद्देश्य के लिए बना था. उससे कोसो दूर भाग गया है. शहर में बिजली के दर्शन मात्र हो रहे हैं. ऐसे में व्यवसाय करना नुकसान का सौदा साबित हो रहा है. ऐसा ही दर्द बोकारो के दुकानदारों का है. बिजली की समस्या दुकानदारों के लिए सिरदर्द बन गयी है. औसतन हर दिन 07-08 घंटा बिजली रानी गायब रह रही है.
इससे दुकानदारों को आर्थिक नुकसान हो रहा है. इस बार सितंबर माह में ही प्रमुख पर्व संपन्न हो जायेगा. बेटों के लिए जितिया से लेकर मां अंबे की दुआ इसी माह में बरसेगी. दुकानदारों ने फेस्टिव सीजन को भुनाने के लिए भरपूर तैयारी भी कर रखी है. लेकिन, बिजली की समस्या दुकानदारों के अरमानों पर पानी फेर रहा है. खास कर फैशन व इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट के दुकानदार इससे ज्यादा प्रभावित हैं.
खाना-पीना कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना
एक कहावत है खाना-पीना कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना. यह कहावत बोकारो के व्यवसायी जगत पर पूरी तरह लागू होती है. शहर में व्यवसाय की स्थित बेहतर स्थिति में नहीं है. ऐसे में दुकानदारी के समय बिजली व्यवस्था में अतिरिक्त खर्च दुकानदारों पर बोझ साबित हो रहा है. बिजली व्यवस्था के लिए दुकानदार जेनसेट का प्रयोग कर रहे हैं. इसमें हर दिन दुकानदारों को औसतन 500-700 रुपया खर्च हो रहा है.
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