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बानो : बच्चे थे सामने, इसलिए पुलिस अधिकारियों ने पहले उग्रवादियों पर नहीं चलायी गोली

Updated at : 11 Apr 2017 6:16 AM (IST)
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बानो :  बच्चे थे सामने, इसलिए पुलिस अधिकारियों ने पहले उग्रवादियों पर नहीं चलायी गोली

सिमडेगा: पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से घटना के दिन ही पीएलएफआइ के एक समर्थक काे गिरफ्तार किया था. पूछताछ के बाद सोमवार को पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. इस आशय की जानकारी प्रेस वार्ता में एसपी राजीव रंजन सिंह ने दी. उन्होंने कहा कि बानो के सिकोरदा में घटनास्थल पर नन्हें बच्चों को देख […]

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सिमडेगा: पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से घटना के दिन ही पीएलएफआइ के एक समर्थक काे गिरफ्तार किया था. पूछताछ के बाद सोमवार को पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. इस आशय की जानकारी प्रेस वार्ता में एसपी राजीव रंजन सिंह ने दी. उन्होंने कहा कि बानो के सिकोरदा में घटनास्थल पर नन्हें बच्चों को देख कर पुलिस ने उग्रवादियों पर पहले गोलियां नहीं चलायी.

इसी का नुकसान पुलिस को उठाना पड़ा. ज्ञात हो कि शनिवार की रात करीब 9.30 बजे बानो के सिकोरदा में पुलिस व पीएलएफआइ उग्रवदियों के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें बानो थाना प्रभारी विद्यापति सिंह तथा आरक्षी तुराम विरूली शहीद हो गये थे. इधर, घटनास्थल से एक महिला को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए पकड़ा. पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया. पीएलएफआइ समर्थक बालेश्वर महतो को गिरफ्तार कर सीएल एक्ट के तहत जेल भेज दिया गया.

पीएलएफआइ को खत्म कर के ही दम लेंगे: एसपी

एसपी राजीव रंजन सिंह ने कहा कि सिकोरदा गांव की घटना से पुलिस के हौसले पस्त नहीं हुए हैं. जवानों की शहादत बेकार नहीं जायेगी. इसका बदला जल्द ही पुलिस लेगी. पीएलएफआइ को जिले से खत्म कर ही दम लेंगे. श्री सिंह ने कहा कि पीएलएफआइ ने कायरतापूर्ण घटना को अंजाम दिया है. बहुत जल्द पीएलएफआइ को इसका करारा जवाब दिया जायेगा. एसपी ने कहा कि जिले में पीएलएफआइ के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है. एसपी ने बताया कि घटन स्थल से एके47 का कारतूस 10, एके47 का खोखा व 17 मोबाइल बरामद किये गये. पुलिस सभी मोबाइल की जांच कर रही है.

एके 47 देख थानेदार ने सरेंडर करने को कहा

बालेश्वर महतो ने शनिवार की रात सिकोरदा में पुलिस व पीएलएफआइ के बीच हुई मुठभेड़ का आंखों देखा हाल पुलिस को बताया है. बालेश्वर महतो ने जैसा पुलिस को बताया : रात के लगभग 7.30 बजे थे. पीएलएफआइ के तीन उग्रवादी सिकोरदा बालेश्वर महतो के घर पहुंचे, जिसमें एक का नाम गुजू गोप था. तीनों के हाथ में हथियार था. वे लोग एक मुर्गा अपने साथ लाये थे. गुजू गोप ने बालेश्वर से कहा हमें और मुर्गा चाहिए. गुजू गोप ने बालेश्वर की पत्नी को रुपये दिये. बालेश्वर से कहा हड़िया दो. बालेश्वर ने हड़िया निकाल कर आंगन में रख दिया. तीनों उग्रवादी आंगन में ही बैठ गये. सभी ने दो-दो डुभनी हड़िया का सेवन किया. इस दौरान बालेश्वर व उनकी पत्नी भी दो बच्चों के साथ आंगन में बैठ कर बातें कर रहे थे. इसी क्रम में रात करीब 9.30 बजे थाना प्रभारी विद्यापति सिंह व आरक्षी तुराम विरूली घर के आंगन के करीब पहुंचे.

थाना प्रभारी विद्यापाति सिंह ने आंगन में टॉर्च जला पूछा कि कौन हो. आंगन में बालेश्वर महतो के हाथ में एक बच्चा और उसकी पत्नी के हाथ में भी एक छोटा बच्चा था. इसी क्रम में विद्यापति सिंह ने टॉर्च की रोशनी में चटाई पर रखे एके 47 को देख लिया. एके 47 को देखते के साथ ही विद्यापति सिंह ने कहा कि तुम लोग अपने हाथ ऊपर कर आत्मसर्पण कर दो, किंतु गुजू गोप ने कॉक कर चटाई पर रखे एके47 उठा कर पुलिसकर्मी पर अंधाधुंध फायरिंग की दी, जिसमें विद्यापति सिंह व आरक्षी तुराम विरूली शहीद हो गये. बालेश्वर किसी प्रकार रेंग कर अपने बच्चे को बचाया. इस क्रम में उसकी बांह में गोली छू कर निकल गयी. बालेश्वर की पत्नी भी बच्चा तथा स्वयं को बचाने में घायल हो गयी. आंगन में महिला व छोटे-छोटे बच्चे होने के कारण पुलिस ने पहले गोली नहीं चलायी. इसी का फायदा उठा कर गुजू गोप ने पुलिस पर हमला कर फरार हाे गया.

पुलिस ने दिनेश गोप का पोस्टर चिपकाया

सिमडेगा पुलिस ने वहां के सुदुर इलाकों में पीएलएफआइ के सुप्रीमो दिनेश गोप का पोस्टर चिपकाया है. जिसमें लिखा हुआ है कि दिनेश गोप पर सरकार ने 25 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है. दिनेश गोप को जिंदा या मुर्दा पकड़वानेवाले व्यक्ति को 25 लाख का इनाम दिया जायेगा. सूचना देनेवाले का नाम गुप्त रखा जायेगा. दिनेश गोप के बारे में सूचना सिमडेगा एसपी के अलावा वहां के सभी थाना प्रभारियों को उनके मोबाइल नंबर पर दी जा सकती है. पोस्टर में सभी को फोन नंबर भी दिये गये हैं.

शहीद तुराम को दी गयी अंतिम विदाई

सिमडेगा के बानो में हुई मुठभेड़ में शहीद तुराम बिरुली के पार्थिव शरीर का सोमवार को पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान माहौल काफी गमगीन रहा. शहीद तुराम बिरुली की पत्नी ललिता अपने पति के शव से लिपट रोती रही. उसके सामने उसके शहीद पति का शव पड़ा था, लेकिन वो यह मानने को तैयार नहीं थी कि उसके पति अब इस दुनिया में नहीं रहे. गमगीन माहौल में जैसे ही शहीद की चिता में अग्नि प्रज्ज्वलित की गयी, पत्नी ललिता बेचैन हो गयी. वो चिता की ओर से जाने का बार-बार प्रयास कर रही थी. कई लोगों ने उसे पकड़ रखा था. पकड़ने वालों पर काफी गुस्सा हो रही थी.

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