पतरातू में टेंडर के बाद भी तय दर पर नहीं मिल रहा बालू, स्थानीय ट्रक मालिकों में उबाल

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रामगढ़ उपायुक्त से मुलाकात करते ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारी और सदस्य. फोटो: प्रभात खबर

रामगढ़ उपायुक्त से मुलाकात करते ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारी और सदस्य. फोटो: प्रभात खबर

पतरातू में बालू उठाव के टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद, निर्धारित दर पर बालू उपलब्ध नहीं होने और स्थानीय ट्रक मालिकों को प्राथमिकता न मिलने से उनमें भारी रोष है. एसोसिएशन ने अंचल अधिकारी के माध्यम से उपायुक्त और जिला खनन पदाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है.

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Ramgarh News: रामगढ़ जिले के पतरातू में बालू उठाव के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निर्धारित दर पर बालू उपलब्ध नहीं कराए जाने और स्थानीय ट्रक मालिकों को काम में प्राथमिकता नहीं मिलने के विरोध में मंगलवार को पतरातू ट्रक ओनर एसोसिएशन ने आवाज बुलंद की. एसोसिएशन के सदस्यों ने पतरातू अंचल कार्यालय में बैठक कर अपनी समस्याओं पर चर्चा की और इसके बाद अंचल अधिकारी से मुलाकात कर विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा.

डीसी और जिला खनन पदाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग

एसोसिएशन ने अंचल अधिकारी के माध्यम से रामगढ़ उपायुक्त और जिला खनन पदाधिकारी को पत्र भेजकर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की. साथ ही मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, क्षेत्र के सांसद और विधायक से भी स्थानीय ट्रक मालिकों की समस्याओं का समाधान कराने की अपील की. ट्रक मालिकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से बालू घाटों का टेंडर हो चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर तय दर पर बालू उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. इसका सीधा असर उनके व्यवसाय और आय पर पड़ रहा है.

निर्धारित दर पर बालू नहीं मिलने से बढ़ रही लागत

एसोसिएशन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बालू खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है. इससे वाहन संचालन की लागत लगातार बढ़ रही है और ट्रक मालिक आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. उनका कहना है कि डीजल, वाहन रखरखाव और अन्य खर्च पहले से ही बढ़े हुए हैं. ऐसे में बालू की ऊंची कीमत ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है. कई वाहन मालिकों के लिए ट्रकों का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है.

स्थानीय ट्रकों की जगह बाहर के वाहनों को मिल रहा काम

ट्रक मालिकों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में परिवहन कार्य के लिए स्थानीय वाहनों की अनदेखी की जा रही है. उनकी जगह दूसरे क्षेत्रों से आने वाले वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है. इससे पतरातू के स्थानीय ट्रक मालिकों और चालकों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है. एसोसिएशन का कहना है कि स्थानीय लोगों ने वर्षों से इस व्यवसाय के माध्यम से अपनी आजीविका चलाई है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है.

बिचौलियों पर लगाए गंभीर आरोप

बैठक के दौरान ट्रक मालिकों ने आरोप लगाया कि स्थानीय फैक्ट्रियों द्वारा परिवहन के लिए निर्धारित भाड़े का पूरा लाभ वाहन मालिकों तक नहीं पहुंच रहा है. ठेकेदारों, ब्रोकरों और बिचौलियों की भूमिका के कारण ट्रक मालिकों को उचित भुगतान नहीं मिल पाता. उन्होंने कहा कि यदि बिचौलियों की भूमिका पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए, तो वाहन मालिकों को निर्धारित दर के अनुसार उचित भाड़ा मिल सकेगा और परिवहन व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी होगी.

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प्रशासन से की कई मांगें

ट्रक ओनर एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की कि बालू निर्धारित सरकारी दर पर उपलब्ध कराया जाए, स्थानीय ट्रकों को परिवहन कार्य में प्राथमिकता दी जाए तथा बिचौलियों की भूमिका पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए. उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो स्थानीय ट्रक मालिकों की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है. बैठक और ज्ञापन सौंपने के दौरान आनंद कुमार ओझा, सूरज साहू, संजय कुमार, वीरेंद्र साहू, रंजीत यादव, प्रकाश कुमार महतो, दुबेश कुमार महतो, सुल्तान अंसारी, अजीत साहू, अरविंद सिंह, भुवनेश्वर कुमार, मुकेश कुमार, विनोद साहू, जाहिद अंसारी, सुनील कुमार, तारकेश्वर साहू, परवेज, सहदेव कुमार, महेंद्र गंजू, विकास कुमार, गणेश महतो, मनोज महतो, कामेश्वर महतो, राजू यादव, नवल कुमार साव, सुरेंद्र जी सहित बड़ी संख्या में ट्रक मालिक मौजूद रहे.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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