सड़क एक, दो विभागों ने निकाले पैसे

Published at :05 Jul 2014 1:20 AM (IST)
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सड़क एक, दो विभागों ने निकाले पैसे

रांची: ग्रामीण विकास के कार्यपालक अभियंता ने विभागीय सचिव की शक्ति का इस्तेमाल किया है. इस इंजीनियर ने अपने स्तर से सड़क निर्माण के मूल प्रस्ताव में तब्दीली की.सिमडेगा जिले में एक ही सड़क दो अलग -अलग विभागों के इंजीनियरों ने बनवाये हैं. एक विभाग ने 1.56 करोड़ में, दूसरे विभाग ने 69 लाख में […]

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रांची: ग्रामीण विकास के कार्यपालक अभियंता ने विभागीय सचिव की शक्ति का इस्तेमाल किया है. इस इंजीनियर ने अपने स्तर से सड़क निर्माण के मूल प्रस्ताव में तब्दीली की.सिमडेगा जिले में एक ही सड़क दो अलग -अलग विभागों के इंजीनियरों ने बनवाये हैं. एक विभाग ने 1.56 करोड़ में, दूसरे विभाग ने 69 लाख में वही सड़क बनवायी है. प्रधान महालेखाकार(पीएजी) ने सिमडेगा के कार्यपालक अभियंता के कार्यालय की जांच के बाद सरकार को भेजी गयी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण विकास विभाग ने सिमडेगा जिले के कुरडेग प्रखंड में एक आरसीसी पुल और पहुंच पथ बनाने की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी. विभाग के मुख्य अभियंता ने वर्ष 2010 में 2.21 करोड़ की लागत से पुल और 69 लाख की लागत से पहुंच पथ बनाने की तकनीकी स्वीकृति दी. इसमें पहुंच पथ का नाम केसुटोली-कनजोबा सड़क के रूप में चिह्न्ति किया गया. टेंडर निबटारे के बाद पुल और सड़क निर्माण का काम मेसर्स बाबा कंस्ट्रक्शन को दिया गया.

पीएजी की ऑडिट टीम ने जांच में पाया कि ग्रामीण कार्य विभाग(आरइओ) ने केसुटोली-कनजोबा सड़क का ही टेंडर वर्ष 2009 में निकाला था. आरइओ के टेंडर में इस सड़क का नाम बाघ चट्टी-थेसुटोली बताया गया था. आरइओ ने जून 2012 में 1.56 करोड़ की लागत से प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत पूरा कराया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता ने आरसीसी पुल और पहुंच पथ के मूल प्रारूप में अपने ही स्तर से बदलाव कर दिया. ग्रामीण विकास विभाग के स्पेशल जोन से कार्यपालक अभियंता ने 64.98 लाख रुपये की लागत से एक सड़क और गार्ड वाल बनवा दिये. मूल प्रारूप में बदलाव कर उसमें काम कम करने या बढ़ाने का अधिकार विभागीय सचिव को है. यह अधिकार कार्यपालक अभियंता को नहीं है. ऑडिट के दौरान पूछे जाने पर कार्यपालक अभियंता ने कहा कि ऐसा मुख्य अभियंता के निर्देश पर किया गया है. पीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कार्यपालक अभियंता के जवाब को असंतोषप्रद और नहीं मानने लायक बताया है.

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