गोपालगंज में फर्जी प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी कर रहे पंचायत शिक्षक पर गिरी गाज, बर्खास्तगी और FIR का आदेश

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Gopalganj News: गोपालगंज में फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे पंचायत शिक्षक के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है. एफआईआर दर्ज कराने, सेवा समाप्त करने और अब तक दिए गए वेतन की वसूली के निर्देश जारी किए गए हैं.

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(गोपालगंज से विकास दुबे की रिपोर्ट)

Gopalganj News: गोपालगंज जिले में फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर शिक्षक नियोजन के एक मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. बरौली प्रखंड की खजुरिया पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय हलुवार में कार्यरत पंचायत शिक्षक ग्यासुद्दीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने, सेवा से बर्खास्त करने तथा अब तक मिले वेतन की वसूली करने का आदेश दिया गया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) योगेश कुमार ने जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है.

जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं


शिक्षा विभाग द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने शिक्षक के शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण प्रमाण-पत्रों की विस्तृत जांच की. जांच के दौरान प्रमाण-पत्रों और नामांकन से जुड़े कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्हें विभाग ने गंभीर अनियमितता माना है.

रिपोर्ट के अनुसार बताया गया कि शिक्षक ने बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना से वर्ष 2001 में फोकानिया, 2003 में मौलवी और 2008 में आलिम उत्तीर्ण होने के प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए थे. जांच में पाया गया कि इन सभी प्रमाण-पत्रों पर एक ही पंजीयन संख्या अंकित है, जिससे स्पष्ट होता है कि वे मदरसा बोर्ड में नियमित छात्र के रूप में नामांकित थे.

एक ही अवधि में दो संस्थानों में नामांकन


जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित शिक्षक ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से वर्ष 2006 का मैट्रिक प्रमाण-पत्र और मंगल सिंह उच्च विद्यालय, रतनपुरा का विद्यालय परित्याग प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत किया था. विद्यालय अभिलेखों की जांच में उनका नामांकन 22 जनवरी 2001 से 14 जून 2006 तक नियमित छात्र के रूप में दर्ज पाया गया.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि संबंधित शिक्षक एक ही समय में दो अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों और दो बोर्डों में नियमित छात्र के रूप में नामांकित थे, जो नियमानुसार संभव नहीं है. इसी आधार पर प्रमाण-पत्रों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.

सीनियर सेकेंडरी प्रमाण-पत्र भी रहा संदिग्ध

जांच समिति ने शिक्षक द्वारा प्रस्तुत दिल्ली राज्य मुक्त विद्यालय से जारी सीनियर सेकेंडरी प्रमाण-पत्र की भी जांच की. समिति के अनुसार कई प्रयासों के बावजूद संबंधित संस्थान का कार्यालय नहीं मिल सका. शिक्षक से संस्थान का सही पता और आवश्यक दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके. इसके बाद समिति ने उक्त प्रमाण-पत्र को प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना.

नोटिस के बावजूद भी नहीं दिया जवाब


जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय ने 30 मई को संबंधित शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया था. हालांकि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी शिक्षक की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया. विभाग ने इसे भी कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार माना.



एफआईआर कर बर्खास्तगी और वेतन वसूली का निर्देश

मामले को गंभीर मानते हुए डीईओ ने पंचायत सचिव सह सदस्य सचिव, पंचायत शिक्षक नियोजन समिति को संबंधित शिक्षक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने और सेवा समाप्ति की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. साथ ही प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, बरौली को भी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके अलावा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) मुकेश कुमार को आदेश दिया गया है कि शिक्षक को अब तक वेतन मद में भुगतान की गई राशि का आकलन कर सरकारी धन की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाए.

फर्जी प्रमाण-पत्र मामलों पर विभाग की सख्ती


इस कार्रवाई के बाद जिले में फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर हुए शिक्षक नियोजन के मामलों की चर्चा फिर तेज हो गई है. शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रमाण-पत्रों की जांच का अभियान लगातार जारी है और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में ऐसे अन्य मामलों की भी समीक्षा की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि नियोजन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए फर्जी प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी करने वालों के खिलाफ आगे भी प्राथमिकी, सेवा समाप्ति और सरकारी राशि की वसूली जैसी कार्रवाई जारी रहेगी.

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विवेक पाण्डेय

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विवेक रंजन पाण्डेय पिछले 8 वर्षों से मुख्यधारा की पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, प्रशासन, अपराध, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकार और स्थानीय-क्षेत्रीय मुद्दों की गहरी समझ है. खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए वे तथ्यों की पुष्टि और विभिन्न स्रोतों से जानकारी का सत्यापन करने को प्राथमिकता देते हैं.

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पत्रकारिता के क्षेत्र में विवेक रंजन पाण्डेय का आठ वर्षों का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीवी और डिजिटल मीडिया से की तथा विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए रिपोर्टिंग, डिजिटल कंटेंट लेखन, लाइव कवरेज, हेडलाइन लेखन, ब्रेकिंग न्यूज, फैक्ट चेकिंग में विशेषज्ञता हासिल की. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिहार से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों का लेखन और विश्लेषण कर रहे हैं.

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विवेक रंजन पाण्डेय ने आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी, पटना से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, मीडिया एथिक्स, डिजिटल जर्नलिज्म और जनसंचार के विभिन्न आयामों का अध्ययन किया.

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