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करोड़ों के प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति घाेटाले का क्या है राज और धनबाद में किस पर गिरी गाज, पढ़ें रिपोर्ट

Jharkhand news, Dhanbad news : वर्ष 2019-20 के दौरान अल्पसंख्यक छात्रों को दी गयी प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति में हुए घोटाले की अंतरिम जांच रिपोर्ट के आधार पर बुधवार (11 नवंबर, 2020) को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. प्रशासन ने प्रथमदृष्टया इसे 9.99 करोड़ रुपये का घोटाला माना है. प्रशासन ने 96 स्कूलों के अलावा 9 अन्य लोगों के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में प्राथमिकी दर्ज करायी है. इसके साथ ही जिला कल्याण पदाधिकारी दयानंद दुबे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और विभागीय कार्यवाही की राज्य सरकार से अनुमति मांगी गयी है.

Jharkhand news, Dhanbad news : धनबाद : वर्ष 2019-20 के दौरान अल्पसंख्यक छात्रों को दी गयी प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति में हुए घोटाले की अंतरिम जांच रिपोर्ट के आधार पर बुधवार (11 नवंबर, 2020) को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. प्रशासन ने प्रथमदृष्टया इसे 9.99 करोड़ रुपये का घोटाला माना है. प्रशासन ने 96 स्कूलों के अलावा 9 अन्य लोगों के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में प्राथमिकी दर्ज करायी है. इसके साथ ही जिला कल्याण पदाधिकारी दयानंद दुबे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और विभागीय कार्यवाही की राज्य सरकार से अनुमति मांगी गयी है.

जांच टीम ने इस घोटाले में जिले के अधिकारियों के साथ- साथ राज्य स्तर के अधिकारियों की भूमिका की जांच की अनुशंसा की है. राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा नेता कमाल खान की भूमिका पर भी सवाल उठाये गये हैं. टीम ने उनके खिलाफ भी जांच की अनुशंसा की है.

एडीएम लॉ एंड ऑर्डर की अध्यक्षता वाली 4 सदस्यीय जांच टीम ने कल्याण विभाग के लिपिक एवं बिलिंग क्लर्क विनोद कुमार पासवान को बर्खास्त करने और विभाग के अनुबंध कर्मी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर अजय कुमार मंडल की सेवा समाप्त करने की भी अनुशंसा की है.

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इनके खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी

अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर कल्याण विभाग के लिपिक विनोद पासवान, विभाग के कंप्यूटर अजय कुमार मंडल, गुलाम मुस्तफा (वकील), झरीलाल महतो (प्राचार्य, जीबीएम पब्लिक स्कूल, तेतुलमारी), प्रताप जसवार (प्राचार्य, जिनियस पब्लिक स्कूल गोविंदपुर), कलीम अख्तर (प्राचार्य, गुरुकुल विद्या निकेतन, भौंरा 19), नीलोफर परवीन (दलाल), संतोष विश्वकर्मा (दलाल) और अब्दुल हमीद (दलाल) को नामजद अभियुक्त बनाया गया है. सादिक खान उर्फ शाहिद को इस घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है. सादिक चतरा का रहने वाला बताया गया है. इस गिरोह में 20 से 25 सदस्य होने की बात सामने आयी है.

जांच रिपोर्ट में गिरोह के कुछ सदस्यों के नाम का भी उल्लेख है. इनमें सबीना, सुहैल, नाजनीन, तौशिफ, ताविस आदि शामिल हैं. यह पूरा गिरोह चतरा का है. इस गिरोह ने राज्य में साहिबगंज, रांची, लोहरदगा, बोकारो के साथ-साथ बिहार के कुछ जिलों में इस तरह के घोटाले को अंजाम दिया है. डीसी के निर्देश पर 96 स्कूलों के खिलाफ उस थाना क्षेत्र में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है, जिस थाना क्षेत्र में वह स्थित है.

झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के सचिव की भूमिका की होगी जांच

जांच के दौरान झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन (Jharkhand Private School Association) के सचिव इरफान खान का भी नाम सामने आया है. इरफान मुख्य साजिशकर्ता सादिक खान उर्फ शाहिद से लंबे समय से संपर्क थे. इरफान पर आरोप है कि उन्होंने स्कूलों के संबंध में सादिक के गिरोह को सूचना उपलब्ध करायी है. जांच टीम ने इनके खिलाफ विस्तृत जांच की अनुशंसा की है. इनका नाम का उल्लेख पूछताछ के दौरान स्कूल संचालकों ने किया था.

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यू-डायस के बिना भी स्कूलों के नाम पर किया भुगतान

जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. कई स्कूलों के नाम पर भी भुगतान कर दिया गया है. जिनका यू-डायस कोड नहीं था. जिले के 486 स्कूलों के 13,605 छात्रों को वर्ष 2019-20 के दौरान यह छात्रवृत्ति दी गयी थी. इन छात्रों को कुल 11,55,16,808 रुपये छात्रवृत्ति के रूप में दी गयी थी. इसमें से 96 स्कूलों के नाम भुगतान की गयी 9.99 करोड़ रुपये की राशि को गलत पाया है. यह राशि इन नामजद लोगों ने साजिश कर फर्जी छात्रों को भुगतान करवा दिया है. जिन फर्जी छात्रों को यह छात्रवृत्ति भुगतान की गयी है. उनके अकाउंट के संबंध में अभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं पायी है. हालांकि, प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आयी है कि ऐसे छात्रों का बैंक अकाउंट आधार से लिंक नहीं था. उनके आधार नंबर तक फर्जी थे. जांच टीम ने इन छात्रों के बैंक खातों के संबंध में जिला व राज्य कल्याण विभाग के साथ केंद्र सरकार के नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल से जानकारी मांगी है. लेकिन यह अभी तक उपलब्ध नहीं करायी गयी है.

एक सप्ताह में की गयी जांच

डीसी उमाशंकर सिंह ने 4 नवंबर, 2020 को एडीएम लॉ एंड ऑर्डर चंदन कुमार के नेतृत्व में इस घोटाले की अंतरिम जांच के लिए कमेटी गठित की थी. टीम ने एक सप्ताह में प्रारंभिक जांच कर अपनी अंतरिम रिपोर्ट बुधवार (11 नवंबर, 2020) को डीसी को सौंप दी. टीम के अन्य सदस्यों में कार्यपालक दंडाधिकारी मोहम्मद गुलजार अंजुम, सहायक सूचना विज्ञान पदाधिकारी प्रियांशु कुमार और डीपीओ यूआइडी अमित कुमार शामिल थे. बुधवार की शाम धनबाद परिषदन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) ने मीडिया के समक्ष जांच के निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मीडिया के माध्यम से ही प्रशासन को इस घोटाले के संबंध में जानकारी मिली. उन्होंने बताया कि इस घोटाले को बड़े पैमाने पर सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया.

Posted By : Samir Ranjan.

Prabhat Khabar Digital Desk
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