बिहार के पुलिस थानों में अब दब नहीं पायेगा वारंट, राज्य स्तर पर की जायेगी ट्रैकिंग
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Nov 2022 10:13 AM
पुलिस मुख्यालय वारंट की ट्रैकिंग के लिए सीआइडी को जिम्मा सौंपने जा रहा है. पुलिसिंग को पीपुल्स फ्रेंडली बनाने के लिए वारंट ट्रैकिंग को राज्य स्तर पर लागू किया जा रहा है. अपर पुलिस महानिदेशक सीआइडी जितेंद्र कुमार को इसका प्रस्ताव तैयार कराने का जिम्मा मिला है.
पटना. पुलिस थाने में लंबित वारंट की ट्रैकिंग की जायेगी. अब इसे दबा कर रखना या किसी की गिरफ्तारी को रोके रखना पुलिस के लिए आसान नहीं होगा. पुलिस मुख्यालय वारंट की ट्रैकिंग के लिए सीआइडी को जिम्मा सौंपने जा रहा है. पुलिसिंग को पीपुल्स फ्रेंडली बनाने के लिए वारंट ट्रैकिंग को राज्य स्तर पर लागू किया जा रहा है. अपर पुलिस महानिदेशक सीआइडी जितेंद्र कुमार को इसका प्रस्ताव तैयार कराने का जिम्मा मिला है.
वारंट ट्रैकिंग सिस्टम राज्य स्तर पर कार्य करने लगेगा, तो पुलिस मुख्यालय से लेकर थाना स्तर तक के अधिकारी यह जान सकेंगे कि किस कोर्ट ने किस मामले में किस व्यक्ति के लिए वारंट जारी किया है. संबंधित व्यक्ति को वारंट प्राप्त हुआ है कि नहीं. इससे कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या कम होगी. एक अनुमान के मुताबिक 50 फीसदी से अधिक कोर्ट केस के लंबित होने का सबसे बड़ा कारण मामले से जुड़े पक्षकारों को समय से वारंट नहीं मिलना है.
जांच अधिकारियों, अपराध की जांच और अपराधियों की खोजबीन सुगम बनाने की दिशा में अपनायी जा रही प्रौद्योगिकी को उत्कृष्ट बनाने की दिशा में बिहार पुलिस प्रयासरत है. इसी कड़ी में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स यानी सीसीटीएनएस से सभी थानों को जोड़ने के लिए मिशन मोड अपनाया जा रहा है. इस योजना के लिए कितने पुलिसकर्मियों की जरूरत है इसके लिए गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय से जानकारी मांगी है. जिला स्तर पर की जा रही डाटा एंट्री की एकरूपता के लिए भी निर्देश दिये गये हैं. बीते दिनों निरीक्षण में पाया गया था कि एसपी- एसएसपी कार्यालय द्वारा की जाने वाली डाटा इंट्री में समान प्रारूप- प्रक्रिया नहीं अपनायी जा रही है. सीसीटीएनएस परियोजना के लिए चयनित एजेंसी के साथ जल्द ही समीक्षा बैठक भी होने जा रही है.
सरकार ने बिहार पुलिस अधिनियम 2007 का अंग्रेजी में अनुवाद करा लिया है. गृह विभाग अब इस अनुवाद का मिलान कराने जा रहा है. पुलिस मुख्यालय गृह विभाग के माध्यम से राजभाषा विभाग और विधि विभाग को अनुवादित प्रति भेज रहा है. दोनों विभागों की मंजूरी के बाद बिहार पुलिस अधिनियम को प्रकाशन के लिए भेज दिया जायेगा.
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