Vivah Muhurat 2022: चार को देवोत्थान एकादशी के बाद शुरू होगा लग्न,जानें मिथिला पंचांग के हिसाब से शुभ दिन

Updated at : 01 Nov 2022 11:33 AM (IST)
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Vivah Muhurat 2022: चार को देवोत्थान एकादशी के बाद शुरू होगा लग्न,जानें मिथिला पंचांग के हिसाब से शुभ दिन

Vivah Muhurat 2022: कार्तिक शुक्ल एकादशी शुक्रवार यानी चार नवंबर को भगवान नारायण के चार मास के बाद निद्रा से जागृत होते ही सनातन धर्मावलंबियों के मांगलिक कार्य आरंभ हो जायेंगे.

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Vivah Muhurat 2022: कार्तिक शुक्ल एकादशी शुक्रवार यानी चार नवंबर को भगवान नारायण के चार मास के बाद निद्रा से जागृत होते ही सनातन धर्मावलंबियों के मांगलिक कार्य आरंभ हो जायेंगे. चतुर्मा स के दौरान हिंदुओं के सभी मांगलिक कार्य शादी विवाह, जनेऊ, मुंडन तथा अन्य शुभ कृत्य बंद रहते हैं, जो देवोत्थान एकादशी से शुरू हो जाते हैं. 17 नवंबर को सूर्य के वृश्चिक राशि में गोचर तथा 20 नवंबर को शुक्र का उदय होने के बाद लग्न मुहूर्त आरंभ हो जायेंगे.

मिथिला में 13 तो बनारसी पंचांग में 12 मुहूर्त

आचार्य राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि चतुर्मास के बाद इस वर्ष में कुल 13 शुभ लग्न मुहूर्त शेष होंगे. बनारसी पंचांग के अनुसार नवंबर में तीन और दिसंबर में भी नौ वैवाहि क लग्न हैं. वहीं, मिथिला पंचांग के मुताबिक नवंबर में सात एवं दिसंबर में छह शुभ विवाह मुहूर्त हैं. इसके बाद अगले साल 2023 में मकर संक्रांति के बाद शादी ब्याह का लग्न शुरू होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना जरूरी है. रवि गुरु का संयोग सिद्धिदायक और शुभ फलदायी होते हैं. इन तिथियों पर शादी विवाह को बेहद शुभ माना गया है.

ऐसे तय होता है शुभ मुहुर्त और लग्न

पंडित गजाधर ने बताया कि शादी के शुभ लग्न व मुहूर्त के निर्णय के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु एवं मीन लग्न में से किन्हीं एक का होना जरूरी है. वहीं, नक्षत्रों में से अश्विनी, रेवती, रोहिणी , मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति , श्रवणा, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भद्र व उत्तरा आषाढ़ में किन्हीं एक का रहना जरूरी है. अति उत्तम मुहूर्त के लिए रोहिणी, मृगशिरा या हस्त नक्षत्र में से किन्ही एक की उपस्थिति रहने पर शुभ मुहूर्त बनता है. उन्होंने ने बताया कि यदि वर और कन्या दोनों का जन्म ज्येष्ठ मास में हुआ हो, तो उनका विवाह ज्येष्ठ में नहीं होगा. तीन ज्येष्ठ होने पर विषम योग बनता है और ये वैवाहिक लग्न में निषेध है. विवाह माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ एवं अगहन मास में हो तो अत्यंत शुभ होता है.

विवाह के लग्न मिथिला पंचांग के अनुसार

नवंबर : 20, 21 , 24, 25, 27, 28, 30

दि संबर : 4, 5, 7, 8, 9, 14

जनवरी : 18,19, 22, 23, 25, 26, 27, 30

फरवरी : 1, 6, 8, 10, 15, 16, 17, 22, 24, 27

मार्च : 1, 6, 8, 9, 13

मई : 1, 3, 7, 11, 12, 17, 21, 22, 26, 29, 31

जून : 5, 7, 8, 9, 12, 14, 18, 22, 23, 25, 28

विवाह के लग्न बनारसी पंचांग के अनुसार

नवंबर : 24, 25, 26

दिसंबर : 2, 3, 7, 8, 9, 13, 14, 15, 16

जनवरी : 15, 17, 18, 19, 25, 26, 27, 30, 31

फरवरी : 1, 6, 7, 8, 9, 10, 12, 13, 15, 16, 17,18, 22, 23, 27, 28

मार्च : 1, 5, 6, 7, 8, 9, 11, 14

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