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Vat Savitri: सुहागिन महिलाएं आज करेंगी वट सावित्री, बन रहा पुण्यफल देने वाला संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Updated at : 19 May 2023 12:25 AM (IST)
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Vat Savitri: सुहागिन महिलाएं आज करेंगी वट सावित्री, बन रहा पुण्यफल देने वाला संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Vat Savitri Vrat 2023: इस बार वट सावित्री व्रत पर ग्रहों की स्थिति भी बेहद शुभकारी बन रही है. वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन न्याय के देवता शनि के अपने स्वराशि कुंभ में गोचर से शश योग बनेगा. पढ़िए किस काल में पूजा का शुभ मुहूर्त कब बन रहा है.

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Vat Savitri Vrat 2023: अखंड सौभाग्य की कामना से सुहागिन महिलाएं शुक्रवार 19 मई को ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या से युक्त भरणी नक्षत्र व शोभन योग में वट सावित्री का व्रत करेंगी. वट वृक्ष को देव वृक्ष माना गया है. शुक्रवार को बरगद के वृक्ष की पूजा कर महिलाएं देवी सावित्री के त्याग, पति प्रेम व पतिव्रत धर्म का स्मरण करेंगी. पुराणों में इस व्रत को स्त्रियों के लिए सौभाग्यवर्धक, पापहारक, दुःखप्रणाशक और धन-धान्य प्रदान करने वाला बताया गया है. इस पेड़ में बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ लटकी हुई होती हैं, जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना गया है. इसमें ब्रह्मा, शिव, विष्णु व स्वयं सावित्री भी विराजमान रहती हैं. अग्नि पुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है. इसीलिए संतान प्राप्ति के लिए भी महिलाएं इस व्रत को करती हैं.

अशुभ प्रभाव से मिलेगा छुटकारा

आचार्य राकेश झा ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री का व्रत पुण्यफल देने वाला संयोग बना है. आज सूर्यपुत्र शनि की जयंती, भरणी व कृत्तिका नक्षत्र का युग्म संयोग, शोभन योग के अलावे जयद् योग भी विद्यमान रहेगा. वहीं इस बार वट सावित्री व्रत पर ग्रहों की स्थिति भी बेहद शुभकारी बन रही है. वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन न्याय के देवता शनि के अपने स्वराशि कुंभ में गोचर से शश योग बनेगा. वट सावित्री व्रत के दिन बरगद व पीपल की पूजा करने से शनि, मंगल और राहू के अशुभ प्रभाव से छुटकारा मिलेगा.

मिलेगा अखंड सुहाग का वरदान

आचार्य राकेश झा ने ब्रह्मवैवर्त्तपुराण व स्कंद पुराण के हवाले से बताया कि वट सावित्री का व्रत और इसकी पूजा व परिक्रमा करने से सुहागिनों को अखंड सुहाग, पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य वंश वृद्धि, दांपत्य जीवन में सुख-शांति में आने वाले कष्ट दूर होते हैं. पूजा के बाद भक्तिपूर्वक सत्यवान-सावित्री की कथा का श्रवण और वाचन करना चाहिए. वट सावित्री के व्रत के दिन बरगद पेड़ के नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा सुनने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पतिव्रत से पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था. भविष्य पुराण के हवाले से बताया गया है कि यमराज ने चने के रूप में ही सत्यवान के प्राण सावित्री को वापस दिये थे. सावित्री चने को लेकर सत्यवान के शव के पास आयीं और चने को सत्यवान के मुख में रख दिया, इससे सत्यवान पुनः जीवित हो गए थे. चना के प्राणदायक महत्व होने के कारण वट सावित्री की पूजा में अंकुरित चना का अर्पण किया जाता है.

पूजा का शुभ मुहूर्त

  • तिथि के मुताबिक: प्रातः 05:21 बजे से पूरे दिन

  • गुली काल मुहूर्त: सुबह 06:44 बजे से 08:25 बजे तक

  • अमृत काल मुहूर्त : सुबह 08:25 बजे से 10:06 बजे तक

  • अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:19 बजे से 12:13 बजे तक

  • शुभ योग मुहूर्त : दोपहर 11:46 बजे से 01:27 बजे तक

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