राजस्थानी बकरियों से सजा बाजार

Updated at : 15 Nov 2016 12:14 AM (IST)
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राजस्थानी बकरियों से सजा बाजार

हाजीपुर : बकरी बाजार पूरी तरह सज गया है. सोनपुर मेले में इस बार राजस्थानी बकरियों को बेचने के लिए लाया गया है. पूरी तरह रेगिस्तानी तरीके में रची बसी बकरियां यहां के माहौल में घुलने-मिलने का प्रयास कर रही हैं. अभी तक तीन प्रकार की बकरियां आयी हैं. जिनमें तोतापरी, जमुनापारी और अजमेरी शामिल […]

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हाजीपुर : बकरी बाजार पूरी तरह सज गया है. सोनपुर मेले में इस बार राजस्थानी बकरियों को बेचने के लिए लाया गया है. पूरी तरह रेगिस्तानी तरीके में रची बसी बकरियां यहां के माहौल में घुलने-मिलने का प्रयास कर रही हैं. अभी तक तीन प्रकार की बकरियां आयी हैं. जिनमें तोतापरी, जमुनापारी और अजमेरी शामिल हैं.

सबसे मूल्यवान बकरी तोतापरी है. जो छह लीटर दूध दे रही है. इसके विक्रेता ने बीस हजार रुपये मूल्य रखा है. जिसके कारण इस नस्ल की बकरियां अभी तक एक भी नहीं बिकी हैं, जबकि जमुनापारी और अजमेरी दस हजार से लेकर बीस हजार तक में बिक रही हैं. इसके बच्चे पांच हजार में भी मिल जा रहे हैं. आसपास के लोगों ने कहा कि जो लोग बकरी फॉर्म चलाने की तैयारी कर रहे हैं. वे लोग बच्चे की ही खरीदारी कर रहे हैं. जिससे उन्हें कुछ दिन रख कर तैयार किया जाये इसके बाद मूल्य के अनुसार या समयानुसार बिक्री की जाये. बद्री प्रसाद मीणा ने कहा कि वे अभी एक हजार बकरियां लेकर आये हैं.

जिनमें अधिकतर अजमेरी हैं. उनका कहना है कि इसका दूध और मांस काफी बेहतर होता है. इसका वजन काफी बड़ा होता है. जिसके कारण लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं. साथ ही यह किसी भी मौसम में अपने को ढालने में माहिर होती हैं. रामेश्वर दयाल कटकर जो उदयपुर से आये हैं. उनके पास तोतापरी नस्ल की बीस बकरियां हैं. जिनमें अभी मात्र दो की बिक्री हुई है. सबसे ज्यादा परेशानी नोटों को लेकर भी है. बाहर के व्यापारी सौ रुपये के नोटों को ही लेने को तैयार हैं. वे पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों को नहीं ले रहे हैं.

जिससे खरीदार नहीं आ रहे हैं.
बकरों की बिक्री भी जमकर हो रही है. स्थानीय नस्ल को उम्दा बनाने की नीयत से कुछ लोग इनकी खरीदारी कर रहे हैं. जो दो हजार से लेकर पांच हजार तक में मिल रहे हैं. बकरियां पूरी तरह राजस्थानी ऊंट की तरह दिख रही हैं. उनका थुथना उठा हुआ है और कान लंबे हैं. जिससे वे अपने आप को किसी भी तूफान से बचा लेती हैं. इसके साथ ही काफी कम भोजन में ये बकरियां जिंदा रह लेती हैं. जिसके कारण इनकी मांग है.
बिकने के लिए आयीं बकरियां .
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