आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को विवश

Updated at : 14 Jun 2016 4:06 AM (IST)
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आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को विवश

जिले के 16 प्रखंडों के लगभग सभी गांव आर्सेनिक युक्त पानी से प्रभावित हैं. इन गांवों में किडनी, लिवर, कैंसर एवं पेट से संबंधित गंभीर बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है. इन बीमारियों से बचने के लिए डॉक्टर भी आरओ का पानी पीने की सलाह देते हैं. जिले में 2009-10 में 136.5 करोड़ […]

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जिले के 16 प्रखंडों के लगभग सभी गांव आर्सेनिक युक्त पानी से प्रभावित हैं. इन गांवों में किडनी, लिवर, कैंसर एवं पेट से संबंधित गंभीर बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है. इन बीमारियों से बचने के लिए डॉक्टर भी आरओ का पानी पीने की सलाह देते हैं. जिले में 2009-10 में 136.5 करोड़ से चेचर-गोपालपुर में बहुउद्देशीय ग्रामीण जलापूर्ति योजना अब तक कार्य रूप नहीं ले सकी है.
हाजीपुर : पानी में आर्सेनिक का ऐसा डर है कि अब गरीब भी पानी खरीद कर पीने को विवश हैं. जिले के अधिकतर हिस्सों का पानी आर्सेनिक युक्त है. इसकी मात्रा इतनी है कि लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. जिले में शायद कोई ऐसी जगह है, जहां पानी नहीं खरीदा जा रहा है. आर्सेनिक प्रभावित कई क्षेत्रों में शुद्ध जलापूर्ति योजनाएं चलायी जानी थीं, पर यह जमीन पर नहीं उतर पा रही हैं, जबकि लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं. ऐसे में पानी बेचने का कारोबार फल-फूल तो रहा ही है, गरीब आदमी पानी खरीदने में पानी-पानी हो रहा है.
जिले के अधिकतर गांव है प्रभावित : जिले के 16 प्रखंडों के लगभग सभी गांव आर्सेनिक युक्त पानी से प्रभावित है. इन गांवों में गंभीर बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है, जिसमें मुख्य रूप से किडनी, लिवर, कैंसर एवं पेट से संबंधित बीमारियां शामिल हैं. बीमारियों से बचने के लिए डॉक्टर भी आरओ का पानी पीने का सलाह देते हैं. जिले में 2009-10 में 136.5 करोड़ से चेचर-गोपालपुर में बहुउद्देशीय ग्रामीण जलापूर्ति योजना अब तक कार्य रूप नहीं ले सकी है. सरकारी स्तर पर लोग उदासीन हैं. आर्सेनिक का जहर लोगों के शरीर में घुल रहा है.
इससे ग्रामीण रोष में हैं और कहते है इसकी चिंता न सरकार को है और न विभाग को.
मिनरल वाटर खरीदने को विवश : पानी में घुले जहर से लोग मिनरल पानी खरीदने को विवश हैं. इसके कारण पानी का व्यापार फलने-फूलने लगा है. जिले में कई जगह पानी के प्लांट लगा दिये गये हैं, जिसका कारोबार लाखों में हो रहा है. ऑटो पर पानी लदे जार गांव-गांव में देखे जा सकते हैं. रोजाना मजदूरी करनेवाले लोग भी अब जार का इस्तेमाल करने लगे हैं. हाजीपुर शहर में ही करीब एक दर्जन प्लांट लगा दिये गये हैं. गंगा किनारे के इलाकों में लोगों की मजबूरी ने पानी बेचने के धंधे ने उद्योग की शक्ल ले ली है. हालांकि लोगों की इस आशंका को भी बल मिलता है कि कहीं ये पानी भी तो आर्सेनिक युक्त नहीं है, इसकी जांच होनी चाहिए.
जल स्रोतों की सफाई है जरूरी : जल स्रोतों के निकट पर्याप्त सफाई जरूरी है. विशेषज्ञों की मानें, तो बीमारियों से बचने के लिए नल, चापाकल एवं अन्य जल स्रोतों के निकट सफाई की जानी चाहिए. कुएं एवं चापाकल के पानी को शुद्ध करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करना चाहिए. पानी को उबाल कर पीना बेहतर होता है. पानी को कम-से-कम 15-20 मिनट उबालने से हानिकारक तत्व नष्ट हो जाते हैं. कम-से-कम दो से ढाई सौ गहरी पाइप लाइन का पानी अपेक्षाकृत कम हानिकारक है.
क्या कहते हैं अधिकारी
आर्सेनिक मुक्त शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना का काम प्रगति पर है, जिसे शीघ्र ही पूरा कर लिया जायेगा. ग्रामीण इलाकों में ज्यादा-से-ज्यादा शुद्ध पानी मिले, ऐसा प्रयास किया जा रहा है. नगर में जलापूर्ति की व्यवस्था नगर पर्षद के जिम्मे है. आरओ के लिए लगाये गये प्लांटों की जांच होगी.
इ रामचंद्र प्रसाद
कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी
प्रशासनिक शिथिलता बन रही कारण
पानी की जांच नहीं होती
बाजार में पानी भरे जार से दौते वाहनों की जांच नहीं होती, क्या पता उस जार में साधारण पानी ही हो. प्रशासन इस तरफ से बिल्कुल बेखबर है कि आखिर जो लोग पानी खरीद कर पी रहे हैं वास्तव में मिनरल वाटर ही है अथवा आर्सेनिक युक्त. लोगों का कहना है बड़े शहरों का बात अलग है, जब छोटे-छोटे शहरों एवं ग्रामीण इलाके के लोगों को पानी खरीद कर पीना पर रहा है, तो इसकी भी जांच होनी चाहिए. लगाये गये प्लांट की भी जांच हो.
कही ऐसा तो नहीं है कि पैसा कमाने के चक्कर में लोगों को आर्सेनिक युक्त पानी ही पिलाया जा रहा है. कई मोहल्लों के आवासीय परिसर में ही प्लांट लगा दिये गये हैं. निर्धारित मानक का इस्तेमाल हो रहा है कि नहीं यह देखना आवश्यक है.
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