बहाली न होने से बढ़ रहे भूमि विवाद

Updated at : 01 Jun 2016 5:17 AM (IST)
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बहाली न होने से बढ़ रहे भूमि विवाद

अधिकतर अंचल कार्यालयों में रिक्त हैं अमीन के पद, नहीं हो पा रही नापी सरकारी परियोजनाओं की संख्या में वृद्धि से बढ़ी अमीनों की व्यस्तता बढ़ते भूमि विवाद बन रहे विधि-व्यवस्था के लिए समस्या प्रत्येक अंचल में एक अमीन का पद स्वीकृत है. इसके अलावा जिला भूमि सुधार कार्यालय, जिला भू-अर्जन कार्यालय में अमीन का […]

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अधिकतर अंचल कार्यालयों में रिक्त हैं अमीन के पद, नहीं हो पा रही नापी

सरकारी परियोजनाओं की संख्या में वृद्धि से बढ़ी अमीनों की व्यस्तता
बढ़ते भूमि विवाद बन रहे विधि-व्यवस्था के लिए समस्या
प्रत्येक अंचल में एक अमीन का पद स्वीकृत है. इसके अलावा जिला भूमि सुधार कार्यालय, जिला भू-अर्जन कार्यालय में अमीन का पद स्वीकृत है. अमीन की नियुक्ति न होने और लगातार सेवानिवृत्ति के कारण अब हाल यह हो गया है कि एक अमीन तीन से चार अंचलों के प्रभार में हैं. इसके कारण भूमि विवाद के मामले बढ़ रहे हैं,
जो अंतत: विधि-व्यवस्था की समस्या बन जाते हैं.
हाजीपुर/देसरी : राज्य सरकार की अदूरदर्शिता के कारण भूमि विवाद के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है और सरकार मौन है. मामला अमीन के रिक्त पदों पर बहाली से जुड़ा है. अमीन का पद रिक्त रहने के कारण भूखंडों की मापी नहीं हो पाती और विवाद सुलगते- सुलगते गंभीर रूप धारण कर लेता है, जो अंतत: विधि-व्यवस्था की समस्या बन जाता है. जिले में घटित आपराधिक मामलों में अधिकतर के मूल में भूमि विवाद ही होते हैं.
लंबे समय से नहीं हुई नियुक्ति : वर्ष 1990 के बाद सरकार ने अमीनों की नियुक्ति नहीं की है. यानी बिहार सरकार 26 साल से अमीन की बहाली नहीं कर रही है. इसके कारण 1990 से पहले बहाल अमीन लगातार सेवानिवृत्त होते चले गये. 26 साल या उससे पूर्व नियुक्त अमीन या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या सेवानिवृत्त हो रहे हैं. ऐसे में भूखंडों की मापी एक समस्या बन गयी है.
प्रभार में चल रहे अंचल : प्रत्येक अंचल में एक अमीन का पद स्वीकृत है.
इसके अलावा जिला भूमि सुधार कार्यालय, जिला भूअर्जन कार्यालय में अमीन का पद स्वीकृत है. अमीन की नियुक्ति न होने और लगातार सेवानिवृत्ति के कारण अब हाल यह हो गया है कि एक अमीन तीन से चार अंचल के प्रभार में हैं. देसरी अंचल के अमीन रामेश्वर सिंह को राजापाकर और सहदेई बुजुर्ग अंचल का भी प्रभार कई महीनों से सौंपा हुआ है, जिसके कारण वह सप्ताह में सोमवार-मंगलवार को राजापाकड़ अंचल, बुधवार,
गुरुवार को देसरी अंचल एवं शुक्र और शनिवार को सहदेई अंचल के क्षेत्रों में भूमि की मापी करते हैं. जिस दिन भूमि मापी करना निर्धारित है, उस दिन किसी कारणवश नापी नहीं होने पर लोगों को नापी के लिए दो से तीन माह बाद का ही समय मिल पाता है. इसके कारण क्षेत्र में भूमि विवाद की घटनाएं बढ़ रही हैं. अगर सभी अंचलों में अमीन होते, तो उसे नापी कर शीघ्र सुलझा देते पर अमीन नहीं रहने के कारण धीरे-धीरे विवाद गहराता चला जाता है.
बढ़े भूमि विवाद और सरकारी परियोजनाएं
जिले में एक साथ कई सरकारी परियोजनाएं चल रही हैं, जिसके लिए अमीन की आवश्यकता है. जिले में एनएच 77, हाजीपुर-सुगौली रेलखंड, कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल आदि परियोजनाओं में अमीनों की व्यस्तता के बीच निजी भूखंडों के विवाद भी जिले में बढ़े हैं. ऐसे में अमीन के और अधिक पद सृजित किये जाने की आवश्यकता है. जबकि वर्ष 1972 में किये गये आकलन के आधार पर सृजित पद ही रिक्त हैं.
कहीं भी नये भवन बनाने के लिए नापी आवश्यक है या सरकारी जमीन नहीं रहने पर नापी कर भू-अर्जन के लिए भी भेजना पड़ता है, वह कार्य भी अंचल अमीन नहीं रहने के कारण समय पर नहीं हो पा रहा है. अगर सरकार एक वर्ष में अमीन की बहाली नहीं कर पाती है, तो जो अमीन अभी कार्यरत हैं वह भी सेवानिवृत्त हो जायेंगे फिर अत्यधिक मुश्किलों का सामना करना आमलोगों के अलावा सरकार को नये विकास कार्यों के लिए करना पड़ेगा.
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