परमात्मा को अपने मन में धारण करना ही महाशिवरात्रि ''

Updated at : 04 Mar 2016 3:57 AM (IST)
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परमात्मा को अपने मन में धारण करना ही महाशिवरात्रि ''

महुआ सदर : अज्ञानता रूपी अंधकार को मिटा कर परम पिता शिव परमात्मा को अपने मन में धारण करना ही महाशिवरात्रि कहलाती है. उक्त बातें प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र पर महाशिवरात्रि को लेकर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए बीके दिव्या बहन ने कहीं. इसके पूर्व केंद्र संचालिका बीके दिव्या […]

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महुआ सदर : अज्ञानता रूपी अंधकार को मिटा कर परम पिता शिव परमात्मा को अपने मन में धारण करना ही महाशिवरात्रि कहलाती है. उक्त बातें प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र पर महाशिवरात्रि को लेकर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए बीके दिव्या बहन ने कहीं.

इसके पूर्व केंद्र संचालिका बीके दिव्या बहन, बीके डॉ श्याम सुंदर सिंह, बीके डाॅ शशि भूषण सिंह, पैक्स अध्यक्ष उमाशंकर राय ने संयुक्त रूप से दीप जला कर उद्घाटन किया. महाशिवरात्रि के रहस्य बताते हुए उन्होंने कहा कि सत्यम शिवम‍् सुंदरम परमज्योति स्वरूप, निराकार परमपिता शिव का पुन: भारतभूमि पर दिव्य अवरतरण ही महाशिवरात्रि है.

समारोह को बीके प्रह्लाद, डाॅ शिवभाई, नागेश्वर भाई, शत्रुघ्न भाई, परमानंद भाई, शशि बाला बहन, पूजा बहन, जगन्नाथ भाई आदि ने संबोधित करते हुए कहा कि इस संगम युग में परमपिता शिव परमात्मा हम आत्मा रूपी बच्चों को ज्ञान का पाठ पढ़ा कर पुन: सतयुगी दुनिया जहां देवी-देवता का राज्य था, उस राज्य की सत्ता सौंपने हेतु अवतरित हुए हैं. समारोह के बाद पधारे बीके भाई-बहनों एवं जिज्ञासुओं को भंडारे का महाप्रसाद खिलाया गया.

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