विकास की बाट जोह रहा लक्ष्मीनारायणपुर

Updated at : 04 Feb 2016 4:31 AM (IST)
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विकास की बाट जोह रहा लक्ष्मीनारायणपुर

महुआ नगर : महुआ प्रखंड में किसी जमाने में पान की खेती के लिए प्रसिद्ध लक्ष्मीनारायणपुर पंचायत अपने विकास की बाट जोह रही है. पंचायत के किसानों को सुविधाओं के अभाव में नहीं मिल पा रहा उचित लाभ, जिससे किसानों की हालत खस्ताहाल है. पंचायत के किसान दशकों पूर्व यहां पान की खेती अधिक करते […]

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महुआ नगर : महुआ प्रखंड में किसी जमाने में पान की खेती के लिए प्रसिद्ध लक्ष्मीनारायणपुर पंचायत अपने विकास की बाट जोह रही है. पंचायत के किसानों को सुविधाओं के अभाव में नहीं मिल पा रहा उचित लाभ, जिससे किसानों की हालत खस्ताहाल है. पंचायत के किसान दशकों पूर्व यहां पान की खेती अधिक करते थे.

समय के साथ इसमें नुकसान होने से अब धीरे-धीरे किसान पान की खेती से मुंह मोड़ने लगे. अब तो महज गिने-चुने किसान ही पान की खेती करते हैं. इस पंचायत में सरकार के स्वच्छता अभियान का कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है. दो तिहाई आबादी अब भी खुले में शौच करने को विवश है.

पंचायत में हैं कुल आठ राजस्व गांव : इस पंचायत में कुल आठ गांव मानपुर, रामपुर, चकोली, हरपुर जादो, चककिशुन, शाहपुर चकुमर, चकमोहम्मद एवं लक्ष्मीनारायणपुर गांव हैं. यहां के अधिकतर लोग आज भी कृषि पर निर्भर हैं. लेकिन यहां कृषि संसाधनों की घोर कमी है. पंचायत के किसान सिचाई के लिए निजी संसाधनों पर ही निर्भर हैं. निजी बोरिंग मशीन से ही किसान अपने खेतों में सिंचाई करते हैं. सिंचाई के लिए सरकारी स्तर से कोई व्यवस्था नहीं है.
गलका रोग से पान उत्पादकों को होती है क्षति : पंचायत के पान उत्पादकों को गलका सहित अन्य रोगों से पान की खेती में भारी क्षति का सामना करना पड़ता है. यही कारण है किसान धीरे-धीरे पान की खेती छोड़ कर खाद्यान्न एवं सब्जी की खेती करने लगे हैं. हालांकि यहां के किसानों का मुख्य नकदी फसल पान ही थी.
पंचायत में पेयजल की है समस्या : पंचायत में लोगों को अभी शुद्ध पेयजल नहीं मिलता है. पंचायत की अधिकतर आबादी आज भी निजी चापाकलों पर ही आश्रित है. सरकारी स्तर से भी कुछ चापाकल गाड़े गये, लेकिन पेयजल की समस्या आज भी बरकरार है. महुआ के दक्षिणी छोर पर स्थित इस पंचायत को इस पंचायत को सरकार के नये फैसले से नगर पंचायत का दर्जा मिल सकता है, लेकिन फिलहाल यह समस्या बरकरार है.
पंचायत की सड़क हैं बदहाल : पंचायत की कई सड़के जर्जर हैं. बीते एक दशक में कुछ सड़कें बनीं, लेकिन अब भी सड़कें बदहाल हैं.
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