एमडीएम में कोताही बर्दाश्त नहीं

Updated at : 16 Sep 2017 3:26 AM (IST)
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एमडीएम में कोताही बर्दाश्त नहीं

बैठक . शिक्षा विभाग की समीक्षात्मक बैठक में मिले निर्देश सभी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन संचालन सुनिश्चित करने का निदेश हाजीपुर : शुक्रवार को समारहणालय परिसर स्थित सभागार में शिक्षा विभाग की समीक्षात्मक बैठक हुई. बैठक में बच्चों के छात्रवृत्ति व पोशाक राशि के भुगतान, मध्याह्न भोजन, टोला सेवक के कार्यों, साफ-सफाई और शिक्षक व […]

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बैठक . शिक्षा विभाग की समीक्षात्मक बैठक में मिले निर्देश

सभी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन संचालन सुनिश्चित करने का निदेश
हाजीपुर : शुक्रवार को समारहणालय परिसर स्थित सभागार में शिक्षा विभाग की समीक्षात्मक बैठक हुई. बैठक में बच्चों के छात्रवृत्ति व पोशाक राशि के भुगतान, मध्याह्न भोजन, टोला सेवक के कार्यों, साफ-सफाई और शिक्षक व अभिभावकों के साथ चर्चा की गयी. बैठक के दौरान प्रखंड स्तरीय शिक्षक पदाधिकारियों ने डीएम को बताया कि ग्रामीण बैंकों की उदासीनता के कारण लाभार्थी छात्रों के खाते में राशि नहीं भेजी जाती है,
जबकि विद्यालय द्वारा संबंधित विद्यार्थी को पोशाक एवं छात्रवृत्ति की राशि के भुगतान के लिए बैंक को एडवांस भेज दिया जाता है. शिक्षक पदाधिकारियों ने डीएम रचना पाटील से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के प्रति लापरवाही बरतने वाले बैंक के प्रबंधक पर कार्रवाई करने तथा उपविकास आयुक्त के माध्यम से शाखा प्रबंधकों को नोटिस भेजकर इस संबंध में पूछताछ करने की मांग की. डीएम रचना पाटील की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में डीएम ने एमडीएम के डीपीओ को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित की जाये कि जिले में ऐसा कोई भी विद्यालय नहीं हो, जहां एमडीएम का संचालन नहीं हो रहा हो.
डीपीओ ने जंदाहा और पातेपुर प्रखंड में विद्यालयों में एमडीएम का संचालन नहीं होने की जानकारी दी और बताया कि स्थानीय विवाद को लेकर फिलवक्त मध्याह्न भोजन दोनों विद्यालयों में बाधित है, लेकिन उसे जल्दी ही संचालित कर लिया जायेगा. डीएम ने टोला सेवक के एकरारनामा के अनुसार, विद्यालय में 90 प्रतिशत से कम बच्चों की उपस्थिति में संबंधित टोला सेवक के मानदेय में कटौती करने का आदेश दिया.
बैठक में यह स्पष्ट कहा गया कि टोला सेवक का मुख्य कार्य बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करना तथा कमजोर बच्चों को एक घंटे का ट्यूशन देना है. टोला सेवक की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र के निरक्षर बच्चों को स्कूल में लाना और पढ़ाना सुनिश्चित करें. सभी विद्यालय में शिक्षक और अभिभावकों के बीच एक निश्चित अंतराल के अंदर बैठक कर बच्चों की साफ-सफाई से रखने, घर में शौचालय बनाने के लिए प्रेरित करने, बच्चों को स्कूल भेजने में होने वाली समस्याओं की जानकारी हासिल करें. स्कूल से घर जाने के बाद बच्चे क्या करते हैं, इस संबंध में भी शिक्षक अभिभावकों से
जानकारी लिया करें.
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