चाइल्ड लाइन पीड़ित बच्चों के लिए बन रहा सहारा

Updated at : 01 Aug 2017 1:37 AM (IST)
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चाइल्ड लाइन पीड़ित बच्चों के लिए बन रहा सहारा

पहल.टॉल फ्री नंबर 1098 पर फोन करने पर तत्काल हेल्प लाइन से जुड़ जाते है पीड़ित वर्ष 2011 से जिले में चाइल्ड लाइन संस्था सक्रिय हाजीपुर : केंद्र सरकार के बाल विकास मंत्रालय की परियोजना के अंतर्गत समेकित बाल विकास संरक्षण योजना का संचालन जिले में चाइल्ड लाइन संस्था की ओर से किया जाता है. […]

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पहल.टॉल फ्री नंबर 1098 पर फोन करने पर तत्काल हेल्प लाइन से जुड़ जाते है पीड़ित

वर्ष 2011 से जिले में चाइल्ड लाइन संस्था सक्रिय
हाजीपुर : केंद्र सरकार के बाल विकास मंत्रालय की परियोजना के अंतर्गत समेकित बाल विकास संरक्षण योजना का संचालन जिले में चाइल्ड लाइन संस्था की ओर से किया जाता है. केंद्र सरकार की नोडल एजेंसियां जिसे जिले में चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन के नाम से जाना जाता है. जिले में वर्ष 2011 से चाइल्ड लाइन संस्था सक्रिय होकर पीड़ित बच्चों के लिए सहारा बन रहा है. चाइल्ड लाइन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार टॉल फ्री नंबर 1098 पर फोन करने पर पीड़ित बच्चों एवं अभिभावकों से हेल्प लाइन जुड़ जाता है और एक घंटे के अंदर रेस्क्यू टीम संबंधित स्थान पर पहुंच कर बच्चों की सहायता करती है.
बच्चों की मनोभावना को ध्यान में रख कर ही उनका पुनर्वास कराया जाता है. पूरे देश में एक बड़े नेटवर्क के रूप में संस्था कार्य करती है. सरकारी एवं कॉरपोरेट केंद्रों से जुड़ कर संस्था कार्य करती है. विभिन्न तकनीकों के जरिये भी समस्याओं का समाधान निकाला जाता है.
गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर कड़ी सजा का प्रावधान: गोद लेने से पहले संबंधित व्यक्तियों को एक कानूनी प्रक्रिया के दौर से गुजरना अनिवार्य होता है. बिना कानूनी प्रक्रिया संपन्न किये गोद लेने वाले लोगों को तीन वर्ष की सजा एवं एक लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ता है. किशोर न्याय अधिनियम के तहत कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई का प्रावधान है. उक्त अधिनियम के तहत लावारिस हालत में मिले बच्चों को बाल कल्याण समिति एवं संबंधित थाने में से किसी एक के सामने चौबीस घंटे के अंदर प्रस्तुत करना पड़ता है. ऐसा नहीं करने पर छह महीने का कारावास एवं 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है. जिला नोडल डायरेक्टर ने बताया कि चाइल्ड लाइन की परामर्श दात्री समिति के अध्यक्ष जिला पदाधिकारी होते है.
विशिष्ट ग्रहण संस्थान को सौंपे जाते है बच्चे
चाइल्ड लाइन से मिली जानकारी के अनुसार संस्था की ओर से शून्य से छह वर्ष तक की उम्र के पीड़ित बच्चों को विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान को सौंपा जाता है. छह से 18 वर्ष उम्र के पीड़ित बच्चों को संस्थान में अलग-अलग रख कर उन्हें नि:शुल्क सभी तरह की सुविधाएं मुहैया करायी जाती है. इस दौरान बच्चों को तकनीकी कौशल की जानकारी भी दी जाती है. संस्था की ओर से सरकार से 18 वर्ष के बाद बच्चों के बड़े होने पर उनके लिए रोजगार आदि की व्यवस्था करने का अनुरोध किया जाता रहा है.
क्या कहते है पदाधिकारी
जनवरी 2016 से जून 2017 तक कुल आठ सौ 98 बच्चों की सहायता की गयी. सरकार से अनुरोध है कि वह 18 वर्ष के बाद भी संस्था से पास आउट होने वाले बच्चों के लिए समुचित सुविधाएं मुहैया कराएं. पटना में बालिकाओं के लिए ऑफर केयर होम की व्यवस्था की गयी है. उसी तर्ज पर यहां भी व्यवस्था की जाये और इस दौरान बच्चों को कौशल शिक्षा प्रदान किया जाये.
सुधीर कुमार शुक्ला, जिला नोडल डायरेक्टर, चाइल्ड लाइन वैशाली
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