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बिहार के दस फीसदी अपार्टमेंट में भी सोसाइटी का गठन नहीं, फंस रहा आरक्षण का पेच, जानिये क्या कहता है कानून

Updated at : 10 Apr 2021 1:15 PM (IST)
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बिहार के दस फीसदी अपार्टमेंट में भी सोसाइटी का गठन नहीं, फंस रहा आरक्षण का पेच, जानिये क्या कहता है कानून

रेरा ने अपने एक्ट का हवाला देते हुए गाइडलाइन जारी की है कि अपार्टमेंट निर्माण होने के तीन माह के भीतर अपार्टमेंट में सोसाइटी का गठन जरूरी है. ऐसे नहीं करने पर बिल्डर और फ्लैट धारकों को जुर्माना लगाया जायेगा. मगर, राज्य के छह से दस फीसदी अपार्टमेंट में भी सोसाइटी का गठन नहीं किया जा रहा है.

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अनिकेत त्रिवेदी, पटना. रेरा ने अपने एक्ट का हवाला देते हुए गाइडलाइन जारी की है कि अपार्टमेंट निर्माण होने के तीन माह के भीतर अपार्टमेंट में सोसाइटी का गठन जरूरी है. ऐसे नहीं करने पर बिल्डर और फ्लैट धारकों को जुर्माना लगाया जायेगा. मगर, राज्य के छह से दस फीसदी अपार्टमेंट में भी सोसाइटी का गठन नहीं किया जा रहा है.

रेरा की ओर से दिये गये आंकड़ों के अनुसार बीते तीन वर्षों में 1535 लोगों ने अपार्टमेंट निर्माण के लिए आवेदन किया है. इनमें मुश्किल से 100 अपार्टमेंट में भी वैधानिक रूप से सोसाइटी का गठन नहीं किया जा सका है. इस हिसाब से एक अनुमान के अनुसार राज्य में एक लाख के लगभग अपार्टमेंट अगर हैं, तो छह हजार अपार्टमेंट में ही सोसाइटी का गठन किया गया है.

हाउसिंग पॉलिसी से होता है निबंधन

अपार्टमेंट में सोसाइटी निबंधन के लिए बिहार स्वावलंबी सहकारी समिति अधिनियम 1996 के तहत जिला सहकारिता पदाधिकारी के पास निबंधन कराया जाता है. वर्तमान में हाउसिंग पॉलिसी के नियम से सोसाइटी का निबंधन होता है. हाउसिंग पॉलिसी में अपार्टमेंट सोसाइटी के लिए सरकारी आरक्षण पॉलिसी का पालन करना होता है.

अपार्टमेंट सोसाइटी में 13 मेंबर होते हैं. इनमें छह पद आरक्षित होते हैं. दो अतिपिछड़ा, दो पिछड़ा, दो अनुसूचित जाति का सदस्य होना चाहिए. इस वर्ग में भी एक-एक पद महिलाओं के लिए आरक्षित है. इसके अलावा सामान्य वर्ग में भी तीन पुरुष और दो महिला न्यूनतम सदस्य होने चाहिए. इसके अलावा एक अध्यक्ष व एक सेक्रेटरी होता है. कुल 13 पदों के लिए एक-एक प्रस्ताव होना चाहिए. इस हिसाब से अपार्टमेंट में न्यूनतम 25 सदस्य होना आवश्यक है.

क्या फंस रहा पेच

दरअसल, जब निर्माण कंपनी या बिल्डर अपार्टमेंट का निर्माण कर बेचने की शुरुआत करता है तो उसमें अधिक- से -अधिक पैसा कमाने की चाहत होती है. बिल्डर ग्राहकों की जाति या सरकार की आरक्षण पालिसी के तहत फ्लैट नहीं बेचता है. ऐसे में अपार्टमेंट में फ्लैट की बिक्री के बाद जब सोसाइटी का गठन करना होता है तो पेच फंसने लगता है.

विस में उठा था मामला

अपार्टमेंट में सोसाइटी गठन को लेकर विधानसभा में भी मामला उठाया गया था. मधुबनी के विधायक समीर कुमार महासेठ ने विधानसभा में कहा था कि अपार्टमेंट में लोग अपने स्तर से एसोसिएशन बनाने के लिए पैसे का कलेक्शन करते हैं, लेकिन, वैध सोसाइटी गठन नहीं होने से बैंक के किसी खाते में पैसा जमा नहीं हो पाता. सुरक्षा से लेकर सुविधा के लिए भी सोसाइटी का गठन जरूरी है. राज्य के लगभग एक लाख से अधिक अपार्टमेंट से जुड़े लोगों का यह मामला है.

सोसाइटी की होती है सारी जिम्मेदारी

सोसाइटी का गठन बहुत जरूरी होता है. सोसाइटी अपार्टमेंट की खुले पार्किंग, अपार्टमेंट के मरम्मत, सुरक्षा- गार्ड, गार्डेन, क्लब, हाउस किपिंग, पानी और बिजली (डीजी सेट), लिफ्ट आदि की जिम्मेदारी होती है. नियमानुसार सोसाइटी दो रुपये प्रति वर्गफुट न्यूनतम चार्ज फ्लैट धारकों से ले सकती है. आपके फ्लैट को छोड़ कर अन्य सभी जगहों का मालिकाना हक सोसाइटी का होता है.

सोसाइटी का नहीं हो रहा निबंधन

राज्य के जिला सहकारिता कार्यालय में हाउसिंग पॉलिसी के तहत सोसाइटी निबंधन के लिए आवेदन आ रहे हैं,लेकिन अपार्टमेंट की सोसाइटी का निबंधन नहीं हो पा रहा है. पटना जिला सहकारिता ने बताया कि बीते वर्ष में एक भी अपार्टमेंट सोसाइटी का गठन नहीं किया गया है.

Posted by Ashish Jha

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