IIT पटना में लगेगा सुपर कंप्यूटर, सी-डैक के साथ हुआ समझौता, 833 टेरा फ्लॉप की होगी स्पीड

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नेशनल सुपर कंप्यूटिंग मिशन के तहत इस साल सितंबर तक आइआइटी सुपर कंप्यूटर पावर से लैस हो जायेगा. 20 करोड़ रुपये की लागत से सुपर कंप्यूटर को लगाया जा रहा है.

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आइआइटी पटना में सितंबर 2023 तक सुपर कंप्यूटर स्थापित हो जायेगा. नेशनल सुपर कंप्यूटिंग मिशन के तहत इस साल सितंबर तक आइआइटी सुपर कंप्यूटर पावर से लैस हो जायेगा. 20 करोड़ रुपये की लागत से सुपर कंप्यूटर को लगाया जा रहा है. सीडैक चिप लगा रहा है. सीडैक सितंबर तक सुपर कंप्यूटर को स्थापित कर देगा. इसको लेकर मंगलवार को आइआइटी पटना और सीडेक के बीच एमओयू साइन हुआ है.

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833 टेरा फ्लॉप की होगी स्पीड

प्रो टीएन सिंह ने कहा कि इसके लिए जगह को चिह्नित किया जा चुका है. इससे 833 टेरा फ्लॉप एक ट्रीलियन फ्लोटिन प्वाइंट ऑपरेशन के साथ डेटा की गणना कर सकते हैं. चिकित्सा, मौसम के साथ शिक्षा के क्षेत्र में सुपर कंप्यूटर से नये आयाम जुडेंगे. यह सुपर कंप्यूटर एक मील का पत्थर साबित होगा और यह विभिन्न उद्देश्यों के लिए उच्च स्तर की डेटा गणना को बढ़ायेगा. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से देश के नौ संस्थानों में आइआइटी पटना का चयन किया गया है.

मौसम पूर्वानुमान में होगी आसानी

सबसे बड़ा फायदा मौसम पूर्वानुमान लगाने में मिलेगा. इससे खेतीबारी से लेकर बाढ़ की आशंका पर अलर्ट किया जा सकेगा. यही नहीं उद्यमिता के क्षेत्र में भाग्य आजमाने वाले युवाओं को इससे बहुत फायदा मिलेगा. कंप्यूटर साइंस के प्रो सोमनाथ त्रिपाठी ने बताया कि सुपर कंप्यूटर आने से आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस, बिग डेटा, सिक्योरिटी, क्वांटम सिमुलेशन, प्रोसेस सिमुलेशन एंड ऑप्टिमाइजेशन, कम्प्यूटेशनल फ्यो डायनामिक्स, वेदर मॉडलिंग, डिजास्टर रिकवरी, ड्रग डिस्कवरी, मॉलिक्यूलर डायनेमिक्स, मशीन लर्निंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम हो सकेगा. इसके अलावे दूसरे सेक्टर के लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे.

खेतीबारी और पढ़ाई में भी होगा उपयोगी 

टेली मेडिसीन के साथ खेतीबारी और पढ़ाई में भी इसका इस्तेमाल हो सकेगा. बुनियादी ढांचा रुद्र सर्वर पर आधारित है, जिसे भारत में स्वदेशी रूप से डिजाइन, निर्मित और असेंबल किया गया है. यह आत्मनिर्भर भारत की ओर एक कदम है. नोडल अधिकारी प्रो सोमनाथ त्रिपाठी ने आइआइटी निदेशक और डीजी सी-डैक के अमूल्य सहयोग के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि यह संस्थान, शिक्षकों व स्टूडेंट्स के लिए फायदेमंद होगा.

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ये रहे मौजूद

एमओयू पर आइआइटी पटना के निदेशक प्रो टीएन सिंह और सी-डैक के महानिदेशक (डीजी) ई मगेश ने हस्ताक्षर किया. इस मौके पर नोडल अधिकारी प्रो सोमनाथ त्रिपाठी, डॉ स्नेहासिस दास चक्रवर्ती, सी-डैक की टीम उपस्थित थी.

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