– अलाव बना सहारा, सड़कों पर पसरा सन्नाटा सुपौल. जिले में इन दिनों पछुआ हवा के साथ पड़ रही कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. सुबह से लेकर देर रात तक बर्फीली हवा लोगों के शरीर को भेदती महसूस हो रही है. ठंड का असर इतना तेज है कि लोग अपने घरों से निकलने में हिचक रहे हैं. नतीजतन, आम दिनों में चहल-पहल से गुलजार रहने वाली सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है. जिंदगी जैसे ठिठुरकर थम सी गई है. सुबह के समय स्थिति और भी भयावह नजर आती है. कोहरे की चादर में लिपटा सुपौल शहर देर तक धूप का इंतजार करता दिखता है. स्कूल जाने वाले बच्चे, दिहाड़ी मजदूर, ठेला-खोमचा लगाने वाले और कार्यालय जाने वाले कर्मचारी सभी ठंड से परेशान हैं. वहीं, दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. ठंड के कारण काम के अवसर कम हो गए है. शहर से गांव तक अलाव बना लोगों का सहारा शहर और ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह सड़क किनारे जलते अलाव इस भीषण ठंड में लोगों के लिए एकमात्र सहारा बने हुए है. बस स्टैंड, चौक-चौराहों, अस्पताल के बाहर, बाजार और रेलवे स्टेशन के आसपास लोग अलाव के पास बैठे नजर आते है. कोई हाथ सेंक रहा है तो कोई ठंड से कांपते शरीर को अलाव की गर्मी से राहत देने की कोशिश कर रहा है. बुजुर्गों और बच्चों पर ठंड का असर सबसे अधिक देखा जा रहा है. सवारियों के इंतजार में खड़ी रहती है वाहन सुबह-सुबह सड़कों पर निकलने वालों की संख्या बेहद कम है. ऑटो, ई-रिक्शा और बसें सवारियों के इंतजार में खड़ी दिखती हैं. दुकानदार भी देर से अपनी दुकानें खोल रहे हैं. बाजारों की रौनक गायब है और रोजमर्रा की गतिविधियां सुस्त पड़ गई है. पछुआ हवा के झोंके जब तेज़ी से चलते है, तो लोग जल्दी-जल्दी अपने गंतव्य की ओर बढ़ते दिखते है. मानो ठंड से बचकर किसी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हों. ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भी चिंताजनक है. कच्चे मकानों में रहने वाले गरीब परिवार ठंड से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. पर्याप्त गर्म कपड़ों और साधनों के अभाव में वे रातें जागकर गुजारने को मजबूर हैं. खेतों में काम करने वाले किसान भी ठंड के कारण समय पर खेत नहीं जा पा रहे हैं, जिससे खेती-बाड़ी के काम प्रभावित हो रहे हैं. पशुपालकों को भी पशुओं को ठंड से बचाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं. खिली धूप, खिले लोग जिले में मंगलवार की सुबह धूप खिलने से लोग खिल उठे. लंबे समय से धूप का इंतजार कर रहे लोग अपने-अपने छूटे कार्य को निपटाने में जुट गये. वहीं लोग बागवानी में भी काम करते दिखे. कई लोग स्नान के बाद धूप का आंनद उठाया. वहीं लोग अपने-अपने घरों की समुचित सफाई व कपड़े धोने के कार्य में व्यस्त रहे. वहीं धोबी वर्ग भी धूप का खूब आनंद उठाया. ग्राहकों का लंबे समय से रखा कपड़े को धोने का कार्य निपटाया. ठंड से मरीजों की संख्या में वृद्धि ठंड के बढ़ते प्रकोप का असर स्वास्थ्य पर भी साफ दिखने लगा है. सर्दी, खांसी, बुखार और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है. सदर अस्पताल और निजी क्लिनिकों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है. डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए लोग गर्म कपड़े पहनें, ठंडी हवा से बचें और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखें. हालांकि नगर परिषद और प्रशासन की ओर से कुछ प्रमुख स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है. ठंड से राहत के लिए और अधिक स्थानों पर अलाव और गरीबों के बीच कंबल वितरण की आवश्यकता है.
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