सुरसर नदी के कीर्तन घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, भक्तिमय माहौल में हुआ समापन जदिया. पौषी पूर्णिमा के पावन अवसर पर सुरसर नदी के तट स्थित जदिया कीर्तन घाट में पिछले 48 घंटों से आयोजित अष्टयाम संकीर्तन का सोमवार को विधिवत समापन हो गया. दो दिनों तक हरे राम हरे कृष्ण के अखंड जाप से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा. संकीर्तन के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी व पूरा घाट परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया. अष्टयाम संकीर्तन के दौरान विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने ढोल, मृदंग, करताल और हारमोनियम के मधुर संगम के साथ भजन-कीर्तन प्रस्तुत किया. दिन-रात चले इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालु भक्ति रस में लीन होकर नृत्य-संकीर्तन करते दिखे. आयोजक समिति के सदस्यों ने बताया कि सुरसर नदी के किनारे स्थित यह कीर्तन घाट वर्षों से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है. पौषी पूर्णिमा के अवसर पर यहां अष्टयाम का आयोजन पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसे हर वर्ष श्रद्धा व उल्लास के साथ निभाया जाता है. मान्यता है कि इस अनुष्ठान से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और आपसी सौहार्द बना रहता है. अष्टयाम संकीर्तन के समापन के बाद विधिवत पूजा-अर्चना, हवन एवं प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया. स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, सुरसर नदी का यह कीर्तन घाट आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां आयोजित संकीर्तन से लोगों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है. आयोजन के सफल समापन से क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक भाईचारे का संदेश भी देखने को मिला.
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