यूरिया की किल्लत से किसान परेशान, फसल बर्बाद होने की चिंता

Published at :18 Feb 2025 5:55 PM (IST)
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ऐसे में थाना क्षेत्र में सरकारी खाद बिक्री केंद्रों पर यूरिया की किल्लत से किसान परेशान हैं

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जदिया. कृषि विभाग के लाख सख्ती के बावजूद किसानों की पहुंच से यूरिया दूर होता जा रहा है. एक तरफ विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकारी लाइसेंसी प्रतिष्ठानों में यूरिया प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. जबकि खाद विक्रेताओं का कहना है कि बाजार में यूरिया की जो खपत है, उसका एक हिस्सा भी आपूर्ति नहीं होती है. ऐसे में थाना क्षेत्र में सरकारी खाद बिक्री केंद्रों पर यूरिया की किल्लत से किसान परेशान हैं. रबी सीजन में मक्का व गेंहू की दूसरी सिंचाई चल रही है. ऐसे में खेतों में यूरिया का छिड़काव जरूरी है. लाइसेंसी खाद दुकानों पर यूरिया की स्टॉक खत्म होने की बात कही जा रही है. कुछ लोग की शिकायत है कि यूरिया कालाबाजारी में 500 रुपये तक प्रति बोरी मिल रही है. थाना क्षेत्र में आधा दर्जन से भी अधिक लाइसेंसी खाद विक्रेता हैं. अधिकांश दुकानदारों के पास यूरिया का स्टॉक उपलब्ध नहीं है. थाना क्षेत्र के किसानों की मानें तो खुले बाजारों में खाद 400 से 500 रुपये की दर से बिक्री हो रही है. कई दुकानदार यूरिया की किल्लत बताकर पिछले गेट से खाद की बिक्री कर रहे हैं. संबंधित अधिकारी इससे अनजान बने हैं. किसान फसल बर्बाद होने की आशंका से सशंकित है. एक तरफ प्रशासन जहां खाद बिक्री को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति की बात कर रही है. जबकि हकीकत इसके उलट है. विभाग द्वारा यूरिया 266 रुपये में मिलने की बात की जा रही है. जबकि उर्वरक की उपलब्धता के मामले में कृषि विभाग की सारी तैयारी सिफर साबित हुई है. कृषि विभाग की मानें तो यूरिया का निर्धारित मूल्य 266 रुपये व डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरा है. जबकि बाजार में 266 के बजाय 400 से 500 रुपये में यूरिया व 1600 से 1700 रुपये में डीएपी प्रति बैग मिला रहा है. किसानों की मानें तो दुकानदार जान-बूझ कर खाद की किल्लत बताते हैं. ताकि दुकानदार मनमाने कीमत पर खाद बेच सके. किसान ब्रह्मदेव यादव, पंचू मेहता, देव साह आदि ने बताया कि अभी गेंहू व मक्का का पटवन हो रहा है. इसके लिए किसानों को उर्वरक की काफी आवश्यकता पड़ती है. जबकि बाजार में उन लोगों को आसानी से खाद नहीं मिल पा रहा है. किसान अधिक मूल्य भुगतान कर खाद खरीदने को विवश हैं.

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