ऑनलाइन दाखिल-खारिज के दौरान हुई त्रुटि, फर्जीवाड़ा का लगाया आरोप

सीजेएम कोर्ट ने मामले की जांच का आदेश छातापुर पुलिस को दिया है
बलुआ बाजार. थाना क्षेत्र के बलुआ पंचायत अंतर्गत मटियारी गांव में जमीन के ऑनलाइन दाखिल-खारिज के दौरान हुई संख्या त्रुटि विवाद का कारण बन गया है. गांव के रैयतदार गोपाल सिंह, रामेश्वर सिंह, किशन सिंह, मुरारी सिंह, अजय सिंह और विजय सिंह पर फर्जी केवाला के आधार पर जमीन का दाखिल-खारिज कराने का आरोप लगाया गया है. आरोप में पूर्व अंचलाधिकारी, कर्मचारी, सीआई और पीड़ित जमीन मालिक के अन्य सदस्य भी शामिल हैं. पीड़ित पक्ष द्वारा त्रिवेणीगंज अनुमंडल लोक शिकायत कार्यालय, डीसीएलआर कोर्ट त्रिवेणीगंज और सीजेएम कोर्ट में शिकायत दर्ज करवाई गई थी. लोक शिकायत कार्यालय में अंतिम सुनवाई के दौरान केवाला संख्या 3913 के स्थान पर 3918 अंकित होने को लिपिकीय भूल मानते हुए दस्तावेज को सही पाया गया. हालांकि मामला अभी डीसीएलआर और सीजेएम कोर्ट में न्यायाधीन है. सीजेएम कोर्ट ने मामले की जांच का आदेश छातापुर पुलिस को दिया है, जिसके आलोक में पुलिस जांच में जुट गई है. इस बीच पीड़ित रैयतदारों ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए जमीन से जुड़े तमाम कागजात को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय, भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी, अपर सचिव दिलीप कुमार सिंह, डीजीपी बिहार, डीआईजी सहरसा, जिलाधिकारी सुपौल और पुलिस अधीक्षक को भेजा है. मटियारी निवासी गोपाल सिंह के पुत्र बीरेंद्र सिंह उर्फ बीरबल ने बताया कि सन 1950 में उनके पूर्वजों ने लेखकारी बुदन महतो, बाल किशुन महतो और भूटाय महतो से मोजा मटियारी, हल्का बलुआ के खाता संख्या 62, खेसरा संख्या 296, 287, 289, 419, 420ए में कुल 2.50 एकड़ जमीन खरीदी थी. यह जमीन लंबे समय से उनके कब्जे में है, जिस पर वे आवास भी बनाए हुए हैं और उपभोग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि 2022 में जमीन का दाखिल-खारिज करते समय ऑनलाइन प्रक्रिया में केवाला संख्या 3913 के स्थान पर 3918 अंकित हो गया था, जिसे लोक शिकायत निवारण अधिकारी ने लिपिकीय भूल माना है. बताया इस आधार पर उन्हें फर्जीवाड़ा का दोषी ठहराना पूरी तरह से बेबुनियाद है. उन्होंने यह भी कहा कि गोविंद महतो के पूर्वजों के नाम से दो जमाबंदी (76 और 278) चल रही थीं, जिनमें से 76 जमाबंदी में आपसी बंटवारा हो चुका है और 278 से उनका नाम खारिज हो चुका है. फिलहाल छातापुर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और रैयतदार पक्ष का कहना है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, ऐसे में फर्जीवाड़ा का कोई सवाल ही नहीं उठता.
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