विशिष्ट दत्तक ग्रहण व वृहद आश्रय में संचालित बाल गृहों का डीएम ने किया निरीक्षण

Published at :17 Feb 2025 7:13 PM (IST)
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विशिष्ट दत्तक ग्रहण व वृहद आश्रय में संचालित बाल गृहों का डीएम ने किया निरीक्षण

दो बाल गृहों में से एक को पूर्णिया से तथा दूसरे को सहरसा से स्थानांतरित किया गया है

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– कानूनी तरीके से अनाथ बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करने का दिया निर्देश सुपौल. जिलाधिकारी कौशल कुमार की अध्यक्षता में गठित जिला निरीक्षण समिति द्वारा समाज कल्याण विभाग अंतर्गत संचालित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान एवं वृहद् आश्रय गृह में संचालित बाल गृहों का सोमवार को निरीक्षण किया गया. शहर के वार्ड नंबर 04 पिपरा रोड में स्थित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में 06 वर्ष तक की आयु के अनाथ, बेसहारा एवं परित्यक्त बच्चों को संरक्षित करते हुए उनका उनके परिवार में पुनर्वासन का प्रयास किया जाता है. उनके जैविक माता-पिता नहीं मिलने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया के द्वारा ऐसे बच्चों को किसी परिवार को गोद दिया जाता है. विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी द्वारा लोगों को कानूनी तरीके से गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करने का निर्देश दिया गया. बताया गया कि इस उद्देश्य के लिए जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए अनाथ, बेसहारा एवं परित्यक्त बच्चों को संरक्षित करने में सहायता मिलेगी एवं ऐसे बच्चों को गोद लेने वाले नए परिवारों में नया जीवन मिलेगा. वहीं सुकमारपुर में स्थित वृहद् आश्रय गृह अंतर्गत संचालित दो बाल गृहों के निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी द्वारा इन गृहों में की गई व्यवस्था की सराहना की गई. इन दो बाल गृहों में से एक को पूर्णिया से तथा दूसरे को सहरसा से स्थानांतरित किया गया है. इन गृहों में गुमशुदा, अनाथ, बेसहारा, बाल-श्रम से विमुक्त एवं अन्य देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे आवासित हैं. इन गृहों में 06 से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों को देखभाल एवं संरक्षण की सुविधा दी जाती है. इन गृहों के संचालन के लिए कर्मियों के चयन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है. नवचयनित कर्मियों के योगदान के संबंध में जिला पदाधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि शीघ्र इन कर्मियों का पुलिस सत्यापन कराना सुनिश्चित किया जाए. जिससे कि इन गृहों का बेहतर संचालन हो सके. गृहों में आवासित बच्चों के खान-पान, शिक्षा की व्यवस्था, चिकित्सा-व्यवस्था, देखरेख-व्यवस्था, आदि का बारीकी से निरीक्षण कर उत्तम व्यवस्था की सराहना की गई. जिला पदाधिकारी द्वारा यह भी निर्देश दिया गया कि प्रत्येक सप्ताह चिकित्सक एवं चिकित्सा-कर्मी गृहों में आकर अपने बच्चों की स्वास्थ्य-जांच करना सुनिश्चित करें. जिला पदाधिकारी द्वारा बाल गृह में आवासित विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विशेष प्रयास करने का भी निर्देश दिया गया. निरीक्षण के दौरान बाल देख-रेख संस्थानों के लिए गठित जिला निरीक्षण समिति के अन्य सदस्य सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर, पुलिस उपाधीक्षक, सहायक निदेशक (बाल संरक्षण), खाद्य संरक्षा पदाधिकारी, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, रेड क्रॉस के प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे.

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