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बाबापीठ, कर्णपूर में सहस्त्र चण्डी महायज्ञ का दिव्य आयोजन

Updated at : 31 Mar 2025 7:00 PM (IST)
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बाबापीठ, कर्णपूर में सहस्त्र चण्डी महायज्ञ का दिव्य आयोजन

परमहंस बाबा निश्चलानंद नाथ जी की तपस्या और साधना से इस भूमि में विशेष दिव्यता है

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– फ्रांस, जनकपुर और दिल्ली से आये यजमानों ने की विशेष पूजा सुपौल धर्म, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत बाबापीठ, कर्णपूर में चल रहे सहस्त्र चण्डी महायज्ञ के द्वितीय दिवस का आयोजन भव्यता और श्रद्धा के साथ किया गया. वेद मंत्रों की गूंज और यज्ञ की पवित्र अग्नि से संपूर्ण वातावरण दिव्य आभा से आलोकित हो उठा. इस पावन अनुष्ठान में फ्रांस, जनकपुर (नेपाल) और दिल्ली से पधारे श्रद्धालु यजमानों ने विशेष पूजा-अर्चना कर विश्व कल्याण की मंगलकामना की. उन्होंने वेदाचार्यों के सान्निध्य में आहुतियां अर्पित कर सनातन संस्कृति की इस महान परंपरा में सहभागी बनने का पुण्य लाभ प्राप्त किया. यज्ञ की महत्ता और आध्यात्मिक ऊर्जा महायज्ञ का संचालन कर रहे गुरुदेव शिवाचार्य पंडित जीवेश्वर मिश्र ने यज्ञ की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का आधार है. उन्होंने बताया कि बाबापीठ, कर्णपूर जैसे सिद्ध स्थलों पर किए गए यज्ञों की शक्ति कई गुना अधिक हो जाती है, जिससे इसका प्रभाव संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त होता है. उन्होंने कहा, परमहंस बाबा निश्चलानंद नाथ जी की तपस्या और साधना से इस भूमि में विशेष दिव्यता है, जिसके कारण यहां किया गया यज्ञ शीघ्र फलदायक होता है. सहस्त्र चण्डी महायज्ञ दैवीय शक्तियों को प्रसन्न करने और नकारात्मक ऊर्जा के नाश का सर्वोत्तम उपाय है. देवी भागवत कथा में आदिशक्ति की महिमा का गुणगान महायज्ञ के अवसर पर आयोजित देवी भागवत कथा में पूज्य व्यास श्री शुकदेवानंद जी महाराज ने आदिशक्ति की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया. उन्होंने प्रवचन में कहा, जब-जब देवताओं पर संकट आया, तब-तब वे मां भगवती की शरण में गए और उन्हीं की कृपा से संकटों का निवारण हुआ. संपूर्ण सृष्टि में शक्ति ही सर्वोपरी है, और प्रत्येक मनुष्य को भगवती की आराधना कर उनके चरणों में समर्पित होना चाहिए, क्योंकि वे ही संकटमोचक और कल्याणकारी हैं. इस अवसर पर पंडित श्रीधर झा, पंडित गोविंद मिश्र, पंडित मणिरमण, पंडित चंदन झा, पंडित मनोज झा, पंडित कुंदन राय, पंडित आशीष झा सहित कई विद्वान आचार्यों ने पूजा-अर्चना की. इसके साथ ही कर्णपूर, मलहनी, सुखपुर, सुपौल आदि स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने इस दिव्य अनुष्ठान में सम्मिलित होकर अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा और आनंद का अनुभव किया. भक्तों का मानना है कि इस महायज्ञ में भाग लेने से उन्हें एक अलौकिक शक्ति की अनुभूति हुई है, जो उनके जीवन को शुभता और सकारात्मकता से भर देगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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